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Thursday, January 29, 2026

गुरु कन्हैया लाल नृत्य कला संगम द्वारा एक शानदार नृत्य संध्या का आयोजन

Thursday 29th January 2026 at 4:49 PM Regarding Dance Evening at Tagore Theater Chandigarh

इस विशेष नृत्य संध्या में 30 छात्रों ने भी भाग लिया


चंडीगढ़
: 29 जनवरी 2026: (संगीत स्क्रीन डेस्क)::

कन्हैया लाल नृत्य कला संगम   द्वारा  आज यहाँ एक विशेष नृत्य संध्या का आयोजन किया गया । इस विशेष संध्या की 17वी कड़ी को  कत्थक के जाने माने गुरु कन्हैया लाल जी की मधुर समृति  में आयोजित किया गया।  जिसमें प्राचीन कला केन्द्र के छात्रों एवं गुरू शिष्य परम्परा के अन्तर्गत सीख रहे छात्रों द्वारा  कत्थक नृत्य की खूबसूरत प्रस्तुतियां पेश की गई । इस कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु गुरु  योगेश शर्मा  के सधे हुए नेतृत्व में छात्रों ने खूबसूरत नृत्य प्रस्तुतियां पेश करके समां बांधा  । इस नृत्य संध्या का आयोजन टैगोर थिएटर में सायं 6:00  बजे से किया गया । जिसमें लगभग 30 छात्रों ने भाग लिया और अपनी नृत्य प्रतिभा से दर्शकों की खूब तालियां बटोरी ।  

सबसे पहले पारम्परिक द्वीप प्रज्वलन किया गया जिस में प्राचीन कला केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर तथा गुरु माँ कमला देवी जी द्वारा  कार्यक्रम से पहले द्वीप प्रज्वलन की रस्म निभाई गयी।  इसके पश्चात  गुरु कन्हैया लाल नृत्य कला संगम  के कलाकारों द्वारा  गणेश वंदना पेश की गयी और इसके उपरांत   कत्थक नृत्य के रंग से सजी शिव स्तुति पेश करके कलाकारों ने बखूबी समां बांधा ।  इसके उपरांत उन्नति शर्मा (जोकि गुरु कनहैया लाल की पौत्री हैं)  ,  द्वारा  बेहतरीन एकल कत्थक नृत्य विष्णु वंदना  पेश किया गया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।  इसके उपरांत  डॉ. समीरा कौसर द्वारा कथक नृत्य की प्रस्तुति पेश की गयी । दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकार समीरा को बचपन से ही नृत्य  में गहरी रूचि और  समझ थी। उन्होंने जयपुर घराने के प्रमुख गुरु कन्हैया लाल से इस शास्त्रीय नृत्य सीखने की शुरुआत की । कला के प्रति समीरा की अटूट निष्ठा और समर्पण को एक नया जीवन तब मिला जब कथक  गुरु डॉ शोभा कोसर ने उन्हें भरपूर सहयोग और मार्गदर्शन दिया। गुरु शोभा कोसर द्वारा दिए गए विशेष प्रशिक्षण ने समीरा को एक निपुण नर्तकी के रूप में ढाला। उन्हें जयपुर घराने के कथक की बारीकियों से परिचित कराया । उन्होंने गुरु बृज मोहन गंगानी से भी  नृत्य की बारीकियां सीखी और अपने कला कौशल को निखारा। समीरा कौसर  ने आध्यात्मिक प्रस्तुति गणेश स्तुति, के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की और उसके बाद पारंपरिक कथक नृत्य की प्रस्तुति दी और साथ ही विरही नायिका के  बेहतरीन भावों द्वारा  प्रस्तुत किया । नृत्य नाटिका काया स्वरूपा उनकी अगली प्रस्तुति थी, जिसमें उन्होंने कथक के अभिनय पहलू पर अपनी पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया । नृत्य में भावों को प्रस्तुत करने की अपनी अनोखी शैली से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य नाटिका में समीरा ने अपने नृत्य के माध्यम से मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को चित्रित करने की कोशिश की, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। गुरु बृजमोहन गंगानी ने पढंत  पर, महमूद खान ने तबले पर , सलीम कुमार ने सितार पर और रमेश परिहार ने गायन में बखूबी संगत करके कार्यक्रम को चार चाँद लगा दिए ।

इसके उपरांत कत्थक की पितामह कही जाने वाली वरिष्ठ कत्थक गुरु डॉ शोभा कौसर द्वारा भाव अंग पर आधारित एक खूबसूरत ठुमरी पर  कत्थक नृत्य  के बैठिकी भाव अंग की सुंदर  प्रस्तुति पेश करके दर्शकों की खूब तालियां बटोरी ।  गुरु शोभा कौसर कत्थक नृत्य के जयपुर घराने की प्रथम श्रेणी की गुरु मानी जाती हैं जिन्होंने कत्थक के जयपुर घराने को पंजाब जैसे क्षेत्र में  प्रफुल्लित करने का श्रेय भी प्राप्त है।  इन्होने भी गुरु कन्हैया लाल से  नृत्य की बारीकियां सीखी।  

कार्यक्रम का समापन एक विशेष नृत्य नाटिका कृष्ण चरितं से किया गया जिसमें लगभग 30  कलाकारों ने भाग लिया और भगवान कृष्ण के खूबसूरत लीलाओं का नृत्य के माध्यम से प्रदर्शन किया   इन सभी छात्रों के नृत्य में रियाज और गुरू द्वारा दी गई शिक्षा का बेहतरीन पक्ष देखने को मिला । कत्थक नृत्य का सुंदर प्रदर्शन करके इन सभी छात्रों ने दर्शकों का मन मोह लिया।  इनके साथ तबले पर अक्षय शर्मा  एवं भास्कर , गायन पर उन्नति शर्मा , पडंत पर गुरु योगेश शर्मा , सारंगी पर राजेश कुमार , बांसुरी पर मोहित एवं काश पर अंश ने बखूबी संगत की  

केंद्र के सचिव श्री सजल  कौसर ने सभी कलाकारों  का प्रशंसा भरे शब्दों से उत्साहवर्धन किया । कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को अंग वस्त्र  देकर सम्मानित किया गया

Thursday, December 25, 2025

नृत्य की विशेष संध्या में अमेरिका से आयी प्राची दीक्षित एवं समूह

Emailed on 24th December 2025 at 6:56 PM Regarding Kathak Dance Event at PKK

प्राचीन कला केंद्र में कत्थक नृत्य से सजी एक और शाम बनी यादगारी 


चंडीगढ़:24 दिसंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह/ /संगीत स्क्रीन डेस्क )::

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आयोजित किये जा रहे विशेष कार्यक्रम में  अमरीका से आयी प्राची दीक्षित एवं समूह ने  अपने कत्थक नृत्य से दर्शकों को खूब आनंदित किया । पंडित कन्हैया लाल जी के  सानिध्य में प्राची ने नृत्य की शिक्षा प्राप्त  की और कत्थक नृत्य की बारीकियां सीखी । प्राची  अमेरिका में नूपुर डांस अकादमी की संस्थापक भी है और केंद्र का  सम्बद्ध  सेंटर भी चला रही हैं ।  इन्होंने विभिन्न प्रस्तुतियों से दर्शकों के दिल में जगह बनाई है । प्राची विदेश में भारतीय कला को प्रफुल्लित करने का अद्भुत कार्य कर रही हैं

आज के कार्यक्रम की शुरुआत इन्होने  एक भक्तिमयी रचना शिव वंदना से की।  इसके उपरांत  कृष्ण कविताओं  पर आधारित एक भाव पक्ष की रचना पेश की गयी  जोकि इनके गुरु द्वारा रचित कविताओं पर आधारित थी।  इसके उपरांत इनके समूह द्वारा कत्थक नृत्य के तकनीकी पक्ष को प्रस्तुत किया । जिस में तीन ताल पर आधारित विलम्बित, मध्य एवं द्रुत लाया पर आधारित  परन,गत,उठान,चालें,आमद,त्रिपल्ली,प्रमिलू,तिहाई और चक्रदार परन प्रस्तुत करके तकनीकी पक्ष पर अपनी मजबूत पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया । इसके उपरांत इन्होने भाव पक्ष पर आधारित एक खूबसूरत रचना पेश की कृष्णा एवं काली  जिस में दो दिव्य शक्तियों - कृष्ण और काली - के बीच एक कालातीत संवाद पेश किया गया।  कृष्ण माया का प्रतिनिधित्व करते हैं - दुनिया की सुंदरता और भ्रम जो हमें खुशी, प्रेम और आनंद के माध्यम से अपनी ओर खींचता है। उनकी बांसुरी आत्मा को मंत्रमुग्ध कर देती है, हमें याद दिलाती है कि अस्तित्व सार्थक और आकर्षक क्यों लगता है। दूसरी तरफ काली, उग्र और अडिग, शक्ति का प्रतीक हैं - कच्ची शक्ति, समय और परिवर्तन। वह भ्रम को तोड़ देती हैं, जहाँ आराम नहीं रह सकता, वहाँ जागृति लाती हैं। हालांकि वे विपरीत दिखते हैं, लेकिन वे संघर्ष में नहीं हैं। वे दिव्य पूरक हैं।

जहाँ कृष्ण आनंद जगाते हैं, वहीं काली जागृति लाती हैं। जहाँ कृष्ण भ्रम बनाए रखते हैं, वहीं काली सत्य को प्रकट करती हैं।

साथ मिलकर, वे आत्मा को भ्रम से मुक्ति की ओर, आनंद से उद्देश्य की ओर मार्गदर्शन करते हैं। यह प्रस्तुति डेविड आर. किंसले की किताब 'द स्वॉर्ड एंड द फ्लूट: काली एंड कृष्णा , हिंदू पौराणिक कथाओं से प्रेरित है

कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को पुष्प, उत्तरीया  एवं मोमेंटो  देकर सम्मानित किया गया ।

Wednesday, December 10, 2025

प्राचीन कलाकेंद्र की तरफ से एक और विशेष आयोजन गुरुवार 11 दिसंबर को

Emailed on Wednesday 10th December 2025 at 6:29 PM

प्राचीन कलाकेंद्र की तरफ से एक और विशेष आयोजन गुरुवार 11 दिसंबर को 

कथक आर्टिस्ट मुजफ्फर मुल्ला और विद्यागौरी अडकर का जादू 

चंडीगढ़:10 दिसंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

गीत संगीत और डांस के जादू की परंपरा को यह ऐतिहासिक स्थान निरंतरता से जारी रखे हुए है। जब मैं पहली बार यहां आया था तो अपने मामा के साथ आया था। ज्ञानी राजिंदर सिंह छाबड़ा के साथ। बस स्टैंड से उतर कर यहां पहुंचने तक मां ने रिक्शा कर लिया था। इसके बावजूद दो तीन बार जब भीड़ भरे किसी रस्ते को पार करना होता तो मुझे मां की ऊँगली पकड़ना ज़रूरी लगता था। वही प्राचीन कला केंद्र मुझे तब का याद है। उस समय भी अच्छा था यहाँ का माहौल। लोगों को विधिवत संगीत की शिक्षा दी जाती थी। बचपन गुज़रा कर पत्रकारिता में पांव रखा तो फिर यहाँ एक आयोजन में आना हुआ। मोहाली के उस समय के प्रसिद्ध पत्रकार राजेंद्र सेवक अग्रवाल के साथ। उन्होंने मुझे कौसर परिवार से मिलवाया। तब से इस स्नेह का सिलसिला बना हुआ है। 

इसी सिलसिले के अंतर्गत यहां प्राचीन कला केंद्र पेश करता है 314वीं मंथली बैठक जिसमें मशहूर कथक आर्टिस्ट मुजफ्फर मुल्ला और विद्यागौरी अडकर की कथक डुएट होगी।

आयोजन का विवरण इस प्रकार होगा। कल अर्थात 11 दिसंबर 2025 को शाम 6:00 बजे हो गई औपचारिक शुरुआत। इस आयोजन का स्थान होगा-प्राचीन कला केंद्र, सेक्टर 35-B, चंडीगढ़। इंडियन क्लासिकल म्यूज़िक की एक और शानदार शाम के लिए आप भी इस आयोजन के साथ जुड़ें।

इस मौके पर इंडियन क्लासिकल डांस, इंडियन क्लासिकल म्यूज़िक, चंडीगढ़ इवेंट्स, डांस लवर, डांस इत्यादि की तरंगें आपको भी अपना जादू सा असर दिखाएंगी। 

Monday, December 1, 2025

वैश्विक एकता का असली अहसास भी करवाता रहा PKK का इवेंट

Emailed By PKK on 1st Dec 1, 2025 at 6:54 PM Regarding an event

कवालियों ने भी खूब यादगारी समय बांधा 


चंडीगढ़
: पहली दिसंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

इस बार तो प्राचीन कला केंद्र ने एक बिलकुल ही अनूठा प्रयोग किया। सचमुच यह संगीत का एक अनूठा प्रयोग ही था। संगीत इस विश्व को एकात्मकता के सूत्र में पिरोता है। यह वैश्विक एकता का असली अहसास भी करवाता है। प्राचीन कला केंद्र ने यह सब साबित भी किया। यह एक बहुत ही यादगारी आयोजन था जिसका सन्देश भी बहुत अर्थपूर्ण रहा। 

प्राचीन कला केंद्र द्वारा आज यहाँ टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में सायं 5 :50  से  एक विशेष कार्यक्रम वन  वर्ल्ड वन रिदम  आयोजित किया गया जिस में  केंद्र के मोहाली परिसर में "गुरु शिष्य परम्परा" के अंतर्गत  संगीत एवं नृत्य का गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे देशी एवं विदेशी छात्रों द्वारा पेश किया गया।    इस कार्यक्रम में   इन विदेशी छात्रों द्वारा अपने अपने देश की नृत्य एवं संगीत कला का बखूबी प्रदर्शन किया गया।  अपने देश की पारम्परिक वेशभूषा में सजे इन छात्रों ने अपनी देश की कला और संगीत की सुन्दर झलकियां पेश की।  कज़ाकिस्तान , मिश्र , मैक्सिको , फिजी , स्पेन , ज़िम्बावे , उज्बेकिस्तान , तंज़ानिया , फ्रांस   और बांग्लादेश से आये इन छात्रों ने अपने देश की कला और संस्कृति का परिचय दिया ।  इस कार्यक्रम में तबला शिक्षक एवं जाने माने तबला वादक श्री आविर्भाव वर्मा के निर्देशन  में  इस संगीतमयी संध्या को विभिन्न देशों की खूबसूरत कलाओं से संजोया गया।  

सबसे पहले गोंग पेश किया गया और  गिलास और चम्मच के टकराने से उत्पन्न हुई ध्वनि से  कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।  इसके उपरांत डेनियल, साहिल  और वैलेंटिना द्वारा गिटार वादन पेश किया गया जिस में उनका साथ  नुरू ने गाना गाकर दिया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।   इसके बाद  उपरोक्त देशों के छात्रों द्वारा अपने अपने देश के गाने और नृत्य का बखूबी प्रदर्शन किया गया जिस में विभिन्न अद्वितीय प्रस्तुतियों से दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए।  इसके उपरांत तबला वादन पेश  गया जिस में सब छात्रों ने  भाग लिया।   

कार्यक्रम के अगले भाग में कव्वाली पेश की गयी जिस में  सब विदेशी छात्रों ने सूफी संगीत पर नृत्य करके तालियां बटोरी।  इसके उपरांत नेपाल के संमुद्र ने आलाप पेश किया   तथा इजीपट से आयी रेवन ने पंजाबी संगीत पर पंजाब का दमदार भंगड़ा पेश किया जिस पर न केवल दर्शक झूम उठे बल्कि पूरा आनद भी उठाया।  

कार्यक्रम के अंत में  सभी देशी विदेशी  वाद्यों की अनूठी जुगलबंदी ोपेश की गयी जो दर्शकों के दिल को छू गयी।  इन वाद्यों में तबला , गोंग , कांगो , चिमटा, ढोल , ढोलक , डीजम्बे  , कहोंन , वुड शेकर, एग शेकर  , जेम्बे इत्यादि वाद्यों का प्रदर्शन  एक साथ किया गया।  ऐसी प्रस्तुतियों देशों की सीमाओं को तोड़ कर संगीत की  मिठास से हर सीमा को लांघते हुए  विभिन्न देशों को साथ जोड़ने का एक विनम्र प्रयत्न है।  

प्राचीन कला केंद्र द्वारा  देश की प्राचीन गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत  भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य  का प्रचार, प्रसार एवं विस्तार किया जा रहा  है जो एक सराहनीय कदम है।

Monday, November 10, 2025

पं.आशिम चौधरी और उनके साथ तबले पर पं. तबले पर देबाशीष अधिकारी

Emailed By PKK on Monday 10 th November 2025 at  5:57 PM Regarding Sitar Vadan Event सितार वादन

प्राचीन कला केंद्र द्वारा 313वां मासिक बैठक कार्यक्रम 11 को

चंडीगढ़: 10 नवंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

पंडित असीम चौधरी के नाम का उच्चारण अगर अंग्रेज़ी में करें तो उच्चारण होता है Pt. Ashim Choudhary वाले स्पेलिंग के साथ। इस लिए कई बार  लोग अशीम भी कहते हैं। वैसे भी जब पता करो तो इस नाम के कई व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन इस खोज ले दौरान जल्दी ही सपष्ट हो जाता कि सितार वादन की धुनों से संगीत लहरियां छेड़ देने वाला असीम चौधरी कौन है! सितार की तारों पर स्वर लहरियों का जादू उस समय खूब बोलता है जब असीस साहिब की उंगलियां सितार पर दौड़ रही हों। पं.आशिम चौधरी और उनके साथ तबले पर पं. तबले पर देबाशीष अधिकारी

वास्तव में प्रख्यात सितार वादक पंडित असीम चौधरी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात सितार वादक हैं। जिन्होंने उन्हें मंच पर देखा सुना वे इस बात से भलिभांत अवगत हैं कि वह सितार के जादूगर ही हैं। रेडियो से उनके राब्ते ने उनके इस जादू को और महान बनाया। उनकी कला में निखार का एक कारण रेडियो भी रहा। रेडियो कलाकारों को जितने भी सुअवसर देता है तो उनमें से हर सुअवसर कलाकार की कला को और भी निखारता चला जाता है।  है। शायद रेडियो का माहौल ही ऐसा होता है। अपने केंद्र से घर घर तक पहुँचता हुआ कार्यक्र ,जीवंत भी हो तो भी। समाचार भी और गीत संगीत भी। 

उसी रेडियो में असीस साहिब आकाशवाणी अर्थात All India Radio के शीर्ष ग्रेड कलाकार हैं। वह भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) से भी जुड़े हुए हैं। यह संगठन कला की दुनिया का एक बहुत महान संगठन है। सस्ब्स्कृतिक केंद्र। 

गौरतलब है कि पंडित असीम चौधरी आचार्य पंडित बिमलेंदु मुखर्जी के शिष्य हैं और गांधार पंचम शैली में वादन करते हैं। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगीत समारोहों में प्रदर्शन किया है और कई वेबिनारों तथन अन्य आयोजनों में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया है। उनके सुनने वाले उनके सितार वादन पर मंत्र मुग्ध हो जाते हैं।हैं।  वह एक जादू सा बांध देते हैं। 

चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले कला प्रेमियों और संगीत प्रेमियों के लिए यह एक प्रसन्नता का सुअवसर है कि वह 11 नवंबर 2025 को चंडीगढ़ के प्राचीन कला केंद्र में होंगें। आयोजन के विवरण का विवरण इसी पोस्ट में दिए गए निमंत्रण पत्र में भी आप देख सकते हैं। वैसे यह यादगारी आयोजन शाम 06:30 बजे शुरू हो जाएगा। यह संगीत आयोजन चंडीगढ़ के सेक्टर-35/बी में स्थित प्राचीन कला केंद्र परिसर के एमएल कोसर ऑडिटोरियम में होगा। कलाकारों में सितार वादन पर होंगें पं.आशिम चौधरी और उनके साथ तबले पर पं. तबले पर देबाशीष अधिकारी संगत करेंगे। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम भी बहुत ही यादगारी रहेगा। 

सितार और तबले का जादू आमने सामने बैठ कर देखना न भूलें। 


Friday, October 10, 2025

प्राचीन कला केंद्र द्वारा द्वारा एक और जादुई आयोजन 11 को

Received From PKK on Friday 10th  Oct 2025 at 2:10 PM Regarding Swati Tiwari Srivastava

इस बार भी होगा केंद्र की 312वीं मासिक बैठक में यादगारी गायन

आप अपनी आंखों से देख सकेंगे स्वाति तिवारी के संगीत का जादू 


चंडीगढ़: 10 अक्टूबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह/ /संगीत स्क्रीन डेस्क)::

प्राचीन कला केंद्र दशकों से संगीत की शिक्षा और मिशन को लगातार फैलाता आ रहा है। इस केंद्र के नज़दीक रहने वालों की तो किस्मत ही बहुत अच्छी है लेकिन लोग दूर दराज से भी इसमें शामिल होने  के लिए आते हैं। इस बार प्राचीन कलाकेंद्र में शनिवार, 11 अक्टूबर 2025, शाम 6:30 बजे से होगा एक और ख़ास आयोजन जिसमें संगीत का जस्सड़ू बिखेरने पहुंचेंगे ख़ास कलाकार। 

इस बार का आयोजन एमएल कोसर ऑडिटोरियम, प्राचीन कला केंद्र परिसर, सेक्टर-35/बी, चंडीगढ़ में होगा। शाम साढ़े छह बजे से शुरू हो कर समापन तक चलेगा। 

इस बार के कलाकार होंगें स्वाति तिवारी श्रीवास्तव, हारमोनियम पर डॉ. देवेंद्र वर्मा और तबले पर श्री उजित डे कुमार के साथ।  इस तरह इस बार का आयोजन भी यादगारी रहेगा। 

गौरतलब है कि स्वाति तिवारी एक शास्त्रीय गायिका हैं जिन्हें उनके गायन और संगीत के लिए जाना जाता है। वह आकाशवाणी, दिल्ली से एक ग्रेडेड कलाकार हैं और संगीत कार्यक्रमों और कक्षाओं के लिए उपलब्ध हैं। मंच पर उनकी प्रस्तुति एक जादुई माहौल बना देती है। 

आप आएं और इस संगीत उत्स्व का आनंद उठाये। केंद्र के प्रबंधक और अन्य संगीत प्रेमी भी आपके बहुत आभारी रहेंगे

आपके लिए हार्दिक शुभकामनाएँ भी व्यक्त की गई हैं इसके साथ ही इस आयोजन में आप मिल सकेंगे गुरु मां डॉ. शोभा कोसर जी से भी जो स्वयं भी हमारे इस युग की महान कलाकार हैं। वह इसी केंद्र की रजिस्ट्रार भी हैं। 

निश्चय ही यह आयोजन भी आपके दिलों में एक विशेष जगह बना कर आपकी संगीतमय मधुर यादों के खज़ाने को और भी अमीर बना देगा। 

Saturday, August 30, 2025

पुराने क्लासिकल गीतों की धुनों ने बांधा जादूभरे संगीत का समय

 Received from PKK on Saturday 30th August 2025 at 6:26 PM Regarding Two Days Seminar

  प्राचीन कला केंद्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय  सेमिनार का  यादगारी समापन  


चंडीगढ़
: 30 अगस्त 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::
प्राचीन कला केंद्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमिनार  जोकि पंजाब कला भवन में आयोजित किया जा रहा है , का आज यहाँ भव्य समापन हो गया।  आज भी सेमिनार के दो सत्र पेश किये गए ।  दोनों सत्रों  में देश के विभिन्न शहरों से  प्रतिभागियों ने अपने शोध कार्य  को प्रस्तुत किया। 
इस सेमिनार का मुख्य विषय  संगीत नृत्य एवं ललित कलाओं की सामाजिक उत्थान में भूमिका  पर आधारित था।  इस अवसर पर प्रो   प्रेमीला गुरुमूर्ति, पूर्व कुलपति , तमिलनाडु डॉ जयललिता म्यूजिक एंड फाइन आर्ट्स यूनिवर्सिटी, चेन्नई  ने लेक्चर डेमोंस्ट्रेशन देकर अपने अमूल्य अनुभव को प्रतिभागियों के साथ साँझा किया। 

इस अवसर पर ललित नारयण  दरभंगा विश्वविद्यालय में संगीत विभाग प्रमुख प्रो लावण्या कीर्ति सिंह  काब्या , प्रो  पंकजमाला शर्मा के साथ साथ  केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ शोभा कौसर ने भी अपने अमूल्य आशीष वचनो से केंद्र की प्रशंसा करते हुए इस सेमिनार की सफलता के लिए बधाई दी।   इसके साथ ही सेमिनार के गेस्ट स्पीकर जाने माने तबला वादक पंडित सुशील जैन (चेयरपर्सन )  एवं डॉ अरुण मिश्रा (चेयरपर्सन ) ने  चेयरपर्सन  रूप में अपने विचार रखे और साथ ही गेस्ट स्पीकर के रूप में  जाने माने तबला वादक डॉ   जगमोहन शर्मा एवं  डॉ महेंद्र प्रसाद शर्मा  ,  श्री मंगलेश शर्मा , डॉ राहुल स्वर्णकार एवं डॉ  गौरव शुक्ला ने भी अपने विस्तृत ज्ञान को दर्शकों के साथ बांटा।  

इसी यादगारी सुअवसर पर शर्मा एम एस यू विश्वविद्यालय , बड़ोदा के संगीत विभाग प्रमुख डॉ राजेश केलकर  भी इस अवसर पर उपस्थित थे।  केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर एवं सेमिनार के सूत्रधार पंडित देवेंद्र वर्मा ने  सभी उपरोक्त माननीय  विभूतियों को उत्तरीया एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया।  

इसके उपरांत प्रतिभागियों ने  ऑफलाइन  एवं ऑनलाइन  माध्यम द्वारा  विभिन्न संगीत एवं कला से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध पत्र पेश किये गए। इस सेमिनार में संगीत एवं कला से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध पत्र पेश किये गए।  जिस में भारतीय संगीत में राग और ताल, रागों का समय सिद्धांत, वेद एवं पुराणों में संगीत, लाया लयकारी एवं ताल, जनजातीय लोक एवं आध्यात्मिक संगीत एवं विविध नृत्य प्रकार, संगीत एवं कला शिक्षा के विविध आयाम जैसे कई विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किये गए। इन शोध पत्रों में बहुत मेहनत से तैयार की गई अमूल्य जानकारी थी। 

कुल मिला कर सेमिनार का दूसरा दिन शास्त्रीय कलाओं एवं भारतीय परम्पराओं एवं कलाओं के विभिन्न पहलुओं को समर्पित रहा। इसके अतिरिक्त विनीता गुप्ता एवं भैरवी भट्ट के मधुर सितार वादन ने सबका मन मोह लिया और साथ ही महेंद्र प्रसाद शर्मा के तबला वादन को भी सबने खूब सराहा। हाल में मौजूद सभी श्रोता और दर्शक मंत्रमुग्ध थे। 

इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य कलाओं के माध्यम से समाज के उत्थान के महत्व  के बारे में गहन चर्चा करना था। इस चर्चा में संगीत की बारीकियों का ज़िक्र बहुत ही सादगी के साथ किया गया था।इसके साथ ही कलाओं के प्रसार प्रचार  के महत्व एवं समाज में इनकी भूमिका पर भी चर्चा की गयी।

कुल मिला कर सेमिनार अपने उद्देश्य में सफल रहा और ऐसे कार्यक्रम के आयोजन के लिए आयोजक प्राचीन कला केंद्र प्रशंसा एवं बधाई का पात्र है।  प्राचीन कला केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर ने कार्यक्रम के अंत में सभी का सुंदर शब्दों में आभार व्यक्त किया

Friday, August 22, 2025

PKK संगीतमयी संध्या "संगीत उदय " में खूबसूरत प्रस्तुतियां

Received on Friday 22nd August 2025 at 6:37 PM Regarding Musical Event by PKK

  उदीयमान कलाकारों द्वारा PKK में एक विशेष आयोजन  


चंडीगढ़
: 22 अगस्त 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

अग्रणी सांस्कृतिक संस्था प्राचीन कला केन्द्र एवं संस्कार भर्ती के संयुक्त तत्वाधान में आज यहाँ मिनी टैगोर थिएटर  सेक्टर 18  में  एक विशेष संगीत संध्या संगीत उदय का आयोजन  सायं 6:00 बजे से किया गया । जिसमें देश भर के  युवा एवं प्रतिभाशाली कलाकारों ने शास्त्रीय गायन,वादन  की जोरदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। प्राचीन कला केंद्र द्वारा एक और जादुई संगीत संध्या 

इस कार्यक्रम में राजर्षि चटर्जी (सितार),  शिवांश सोनी (तबला), उपासना डे (गायन), अंशिका कटारिया (कत्थक), संजुक्ता सरकार (कत्थक), श्रेयस दत्तात्रेय  भोयर (तबला), कन्हैया पांडेय (सिंथेसाइज़र) एवं  पूजा बसक (गायन)   ने अपनी प्रस्तुतियों से  दर्शकों को सम्मोहित कर दिया।  

आज के कार्यक्रम में अखिल भारतीय  संस्कार भारती के वाईस प्रेजिडेंट डॉ रविंद्र भारती ने मुख्य अतिथि एवं  श्री लविश चावला , जनरल सेक्रेटरी , संस्कार भारती पंजाब प्रान्त ने विशेष अतिथि के रूप में पधार कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।  इस अवसर पर केंद्र के रजिस्ट्रार डॉ  शोभा कौसर एवं सचिव श्री सजल कौसर भी उपस्थित थे ।  साथ ही संस्कार भारती के सलाहकार प्रो सौभाग्य वर्धन भी उपस्थित थे।  मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ पारम्परिक द्वीप प्रज्वलन के पश्चात  केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ शोभा कौसर द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशेष अतिथि को शाल एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।  

यादगारी बने आज के इस कार्यक्रम में  उपासना डे (गायन ) ने राग मुल्तानी में मध्य  एवं द्रुत लय में बंदिशें पेश की एवं पूजा बसक (गायन) ने राग मधुवंती  में तीन ताल की बंदिश पेश की।  इसके उपरांत संजुक्ता सरकार गणेश वंदना पेश की तथा अंशिका कटारिया ने ताल शिखर में, आमद, तहत परं, तिहाई एवं लड़ी इत्यादि की खूबसूरत प्रस्तुति पेश की।  इसके उपरांत  शिवांश सोनी एवं श्रेयस दत्तात्रेय भोयर ने तीन ताल में पेशकार और इसके उपरांत  पारम्परिक उठान, रेले,कायदे,पलटे, गतें  बहुत खूबसूरती से पेश करके दर्शकों  की तालियां बटोरी। इसके उपरांत इटावा घराने के सितार वादक राजर्षि चटर्जी ने राग यमन में कुछ  गतें  बंदिशें  इत्यादि पेश करके खूब प्रशंसा लूटी।

कार्यक्रम में इनके साथ केंद्र के संगीत विभाग में कार्यरत श्री प्रवेश कुमार ने  हारमोनियम पर एवं अमनदीप गुप्ता ने तबले पर  बखूबी संगत की। 

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर, संस्कार भर्ती के सलाहकार प्रो सौभाग्य वर्धन, एवं मुख्य अतिथि तथा विशेष अतिथि   ने  कलाकारों को   मोमेंटो एवं सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। 

Thursday, July 31, 2025

प्राचीन कला केंद्र की तरफ से परंपरा का आयोजन शुक्रवार पहली अगस्त को

31st July 2025 at 7:04 PM Regarding Parampara by PKK

शाम को ठीक चार बजे हो जाएगी शरुआत 

मोहाली: 31 जुलाई 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह/ /संगीत स्क्रीन डेस्क)::

प्राचीन कला केंद्र उत्तर भारत के उन संगीत संस्थानों में है जो लगातार संगीत की परंपरा और सुगन्धि को फैलाते चले आ रहे हैं। इस बार भी इस संस्थान द्वारा शास्त्रीय एवं वाद्य संगीत परम्परा का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 

यह आयोजन शुक्रवार, 1 अगस्त  2025 को शाम 4:00 बजे से शुरू होगा और समापन तक चलेगा।  

इस बार भी यह आयोजन डा. शोभा कोसर इंडोर ऑडिटोरियम, प्राचीन कला केंद्र कॉम्प्लेक्स, सेक्टर- 71, मोहाली में होगा। अपनी शानदार विरासत को कायम रखते हुए। 

इस बार भी आयोजन के कलाकार  केंद्र के छात्र होंगें। 

दर्शकों और श्रोताओं के स्वागत में अत्यंत आभार और हार्दिक सम्मान के साथ सभी संगीत स्नेहियों की इंतज़ार करेंगे रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कोसर और अन्य पदाधिकारी व कलाकार। 


Wednesday, June 11, 2025

संत कबीर जी की पावन जयंती पर प्राचीन कलाकेंद्र का विशेष आयोजन

From Pracheen Kala Kendra on Wenesday 11th June 2025 at 5:28 PM Regarding Musical Event on Kabir Ji

विशेष संगीत संध्या में सुरों से सजे कबीर जी के दोहों ने जगाया जादू 


चंडीगढ़
/ /मोहाली: 11 जून 2025: (मीडिया लिंक रविंदर/ /संगीत स्क्रीन डेस्क)::

प्राचीन कला केंद्र द्वारा आज यहाँ  महान संत कबीर जी की जयंती के सुअवसर पर एक विशेष संगीत संध्या कबीर वाणी का आयोजन किया गया।  जिस में  दिल्ली से आये युवा एवं प्रतिभावान कलाकारों  द्वारा  संत कबीर के शाश्वत ज्ञान और पदों को संगीतमय श्रद्धांजलि दी गयी।  इस कार्यक्रम का आयोजन  प्राचीन कला केंद्र के एम एल कौसर सभागार में सायं 6 :30  बजे से किया गया।

इस कार्यक्रम में दिल्ली से आये श्री राजेश नेगी , डॉ रवि पाल, श्री गणेश कुमार, श्री योगेश पाल , श्री दिनेश कुमार , श्री विपिन कुमार एवं श्री गुरभेज सिंह ने प्रस्तुति पेश की। 

इस कार्यक्रम की शुरुआत श्री राजेश सिंह नेगी द्वारा पंडित कुमार गंधर्व द्वारा रचित  राग 'श्री कल्याण' में छोटा ख्याल *'देखो री उत फूलन लगी'। पेश की गयी।  इसके उपरांत  सभी कलाकरों द्वारा एक अन्य रचना नैहरवा हमका न भावे प्रस्तुत की गयी।  कार्यक्रम के अगले भाग में एक भजन राम निरंजन न्यारा रे पेश किया गया। 

इस मौके पर साथ ही कबीर का अन्य भजन साधो देखो रे जग बौराना और  है  मन है इश्क मस्ताना, है  मन है होशियारी क्या प्रस्तुत किया गया।  इसके बाद कबीर जी की वाणी से एक खूबसूरत भजन बिन सतगुरु नर रहत भुलाना, खोजत फिरत राह नहीं जाना तथा उड़ जायेगा हँस अकेला, जग दर्शन का मेला पेश किये गए जिसको दर्शकों ने खूब सराहा।  इसके उपरांत अवधूता गगन घटा गहराई हो,  हिरना समझ बूझ वन चरना तथा भजो रे भैया राम गोविंद हरी प्रस्तुत किये गए।  भक्ति रास से भरे इन भजनो का दर्शकों ने खूब आनंद उठाया। और कार्यक्रम के समापन पर  कबीर जी के दोहे पेश किये गए। 

कार्यक्रम के अंत में केंद्र के सचिव  श्री सजल कौसर द्वारा कलाकारों  को उत्तरीया  एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर दिल्ली से विशेष रूप से संगीतज्ञ श्री देवेंद्र वर्मा तथा तबला वादक श्री देबाशीष अधिकारी भी पधारे।

Saturday, May 17, 2025

प्रियंका ठाकुर की प्रभावशाली एवं मधुर शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति

From Pracheen Kala Kendra on Saturday 17th May 2025 at 7:15 PM

307वीं मासिक बैठक में प्रस्तुति से फिर जगा गीत संगीत का जादू


चंडीगढ़: 17 मई 2025: (मीडिया लिंक//संगीत स्क्रीन डेस्क)::
चंडीगढ़ को लेकर अक्सर कहा जाता रहा कि यह तो पत्थरों का शहर है। इस धारणा को जो लोग लगातार गलत साबित करते आ रहे हैं उनमें प्राचीन कला केंद्र भी शामिल है। यह संस्थान इन्हीं पत्थरों में गीत संगीत के जादू का अहसास करवाता आ रहा है। हर बार नए पुराने कलाकारों से रूबरू करवाना और संगीत लहरियों से पूरे माहौल को संगीत मई बना देना इसी संस्थान की टीम का काम रहा।

प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित 307वीं मासिक बैठक कार्यक्रम का आयोजन शनिवार, 17 मई 2025 को एम. एल. कोसर इंडोर ऑडिटोरियम, सेक्टर 35-बी, चंडीगढ़ में किया गया। इस अवसर पर युवा एवं प्रतिभाशाली गायिका सुश्री प्रियंका ठाकुर ने शास्त्रीय गायन की एक मनोहारी प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम की शुरुआत राग मालकौंस  से हुई, जिसमें उन्होंने विलंबित ख्याल "पीर ना जाने बालम" प्रस्तुत किया। भावपूर्ण गायन शैली से उन्होंने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात, उन्होंने तीन ताल में द्रुत ख्याल "बालम नहीं आए" सुनाया, जिसने कार्यक्रम की गति और भी तीव्र कर दी। अपनी प्रस्तुति को और ऊर्जावान बनाते हुए, प्रियंका ठाकुर ने अति द्रुत में टप्प ख्याल "हर हर महादेव पति" प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

शास्त्रीय प्रस्तुति के उपरांत, उन्होंने हिमाचली लोकगीत "कुंजू चंचलो" की मधुर प्रस्तुति दी, जो श्रोताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय रही और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराही गई।

गायिका का साथ दिया श्री दिव्यांश ठाकुर (तबला) एवं श्री पियूष मिश्रा (हारमोनियम) ने, जिनकी संगति ने पूरी प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाया।

कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही, और सभी ने इस शाम को संगीत से सजी एक अविस्मरणीय अनुभूति बताया।

डॉ. शोभा कोसर (रजिस्ट्रार) व श्री सजल कोसर (सचिव) ने सभी संगीतप्रेमियों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए श्री विनोद चन्ना (शिमला) , श्री गुंजन चन्ना, पं. देवेंद्र वर्मा डॉ  जगमोहन शर्मा ,   डॉ. हरमोहन शर्मा, श्री सौरभ आदि विशेष रूप से मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को सम्मानित भी किया गया। कुल मिलाकर यह भी एक याधारी कार्यक्रम रहा। इस ने चंडीगढ़ के संगीत भरे माहौल को एयर भी अमीर बनाया। 

Tuesday, October 15, 2024

गुरू एम.एल.कौसर की स्मृति में 19वे अवार्ड का भव्य आयोजन

Tuesday 15th October 2024 at 7:51 PM Email and WhatsApp PKK Chandigarh

संगीत जगत के दो दिग्गज कलाकारों का को किया गया सम्मानित 

तबला वादक पंडित विनोद पाठक एवं प्रसिद्ध सितार वादक पंडित हरविंदर शर्मा को अवार्ड  


चंडीगढ़: 15 अक्टूबर 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

चंडीगढ़ को आम तौर पर लोग पत्थरों का शहर कहते हैं। इसकी बड़ी बड़ी इमारतें, भागदौड़ वाली ज़िन्दगी और जल्दबाज़ी में रुखसुखा सा जवाब देने वाले कुछेक लोग इस कथनी पर मोहर लगाते हुए भी महसूस  होते हैं। इसके बावजूद प्राचीन कला केंद्र, कला भवन और रोज़ गार्डन जैसे संस्थान और स्थान यह भी याद दिलाते हैं की इसी चंडीगढ़ में संवेदना भी है, शायरी भी है और संगीत भी है। हाल ही में गुरु एम एल कौसर की समृति में कराया गया 19वां अवार्ड समारोह तांडव जैसे महान नृत्य के संबंध में  यहां हुआ खोजपूर्ण काम भी बहुत कुछ बताता है। तांडव नृत्य की चर्चा हम एक अलग पोस्ट में कर रहे हैं यहां लौटते हैं प्राचीन कला केंद्र के इस विशेष आयोजन की चर्चा पर। 

गुरू एम.एल.कौसर पिछले 6 दशकों से कला के क्षेत्र में अपनी बहुमूल्य सेवाओं और योगदान द्वारा नए आयाम स्थापित करने वाले तांडव सम्राट गुरू एम.एल.कौसर को श्रेष्ठ कलाकार होने के साथ-साथ भारतीय शास्त्रीय कलाकारों के वाहक के रूप में भी जाना जाता है । इन्होंने अपने अथक प्रयासों एवं निस्वार्थ सेवाओं के बल पर संगीत जगत में विशेष स्थान बनाया । ऐसी महान शख्सियत के इसी सहयोग को मद्देनजर रखते हुए प्राचीन कला केन्द्र की कार्यकारिणी समिति द्वारा वर्ष 2004 में एक लाख रूपए के अवार्ड की घोषणा की गई । यह अवार्ड भारतीय शास्त्रीय संगीत में अहम योगदान देने वाले कलाकारों के प्रति एक सम्मान है जो एक कलाकार की नजर से दिया जाता है।

इस अवार्ड में अब तक कत्थक नृत्यांगना सितारा देवी,कत्थक सम्राट बिरजू महाराज, सितार वादक शाहिद परवेज़, पंडित शिव कुमार शर्मा,सुनयना हजारीलाल,पंडित राम नारायण,गुरू सोनलमान सिंह,पंडित विश्वमोहन भट्ट,पंडित भजन सोपोरी,गुरू शोवना नारायण,पंडित सुशील जैन तथा पंडित कालेराम जैसे दिग्गज कलाकार सम्मानित किए जा चुके है।

आज के अवार्ड समारोह का आयोजन टैगोर थियेटर में 19वें गुरू एम.एल.कौसर अवार्ड समारोह का भव्य आयोजन सायं 6:30 बजे से किया गया। 19वां गुरू एम.एल.कौसर अवार्ड समारोह संगीत जगत की दो विभूतियों जानेमाने तबला वादक पंडित विनोद पाठक एवं प्रसिद्ध सितार वादक पंडित हरविंदर शर्मा को प्रदान किया गया।

इस कार्यक्रम में अवार्ड प्रदान करने हेतु पद्मभूषण ग्रेमी अवार्ड विजेता पंडित विश्वमोहन भट्ट विशेष रूप से मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए । इनके साथ सात्विक वीणा रचयिता पंडित सलिल भट्ट भी उपस्थित थे। मंच पर चैयरमैन श्री एस.के.मोंगा,रजिस्ट्रार डॉ.शोभा कौसर एवं सचिव श्री सजल कौसर उपस्थित थे।

पारम्परिक द्वीप प्रज्वलन करने के पश्चात चैयरमैन एवं अन्य विभूतियों द्वारा मुख्य अतिथि को सम्मानित किया गया । इसके उपरांत अवार्ड समारोह की शुरूआत की गई। सबसे पहले पंडित विनोद पाठक को शाल,स्मृति चिन्ह,मोमेंटो और 50 हजार रूपए  भेंट किए गए । उपरांत पंडित हरविंदर शर्मा को शाल,स्मृति चिन्ह,मोमेंटो और 50 हजार रूपए  भेंट किए गए ।

सम्मान समारोह को यादगार बनाने के लिए अवार्डी कलाकारों द्वारा एवं विशेष संगीत संध्या का आयोजन किया गया । जिसमें सबसे पहले पंडित विनोद पाठक द्वारा तीन ताल में निबद्ध तबला वादन पेश किया गया जिस में  फारूखाबाद घराने की कुछ विशेष बंदिशें पेश की गई । और तबला में  कायदे  तोड़े , रेले, गत, टुकड़े , परं इत्यादि पेश किये गए।  पारम्परिक बंदिशों से निबद्ध इस प्रस्तुति का सबने आनंद उठाया।  

इनके साथ तबले पर इनके सुपुत्र विविश पाठक एवं हारमोनियम पर श्री दिनकर दिवेद्वी ने बखूबी संगत की।

इसके उपरांत पंडित हरविंदर शर्मा ने मंच संभाला और विलायत खान साहिब के शिष्य हरविंदर शर्मा ने सुन्दर स्वर लहरियों से सजा   सितार वादन पेश किया। इन्होंने राग मिश्र खमाज में आलाप से शुरुआत की और गायिकी अंग से सजी प्रस्तुति में  सुन्दर बंदिशें पेश करके दर्शकों का मन जीत लिया । खूबसूरत जोड़ झाला पेश करके हरविंदर शर्मा ने दर्शकों को जादू भरी शाम में खोने के लिए मजबूर कर दिया।  कार्यक्रम का समापन इन्होने भटियाली धुन से किया । इनके साथ प्रसिद्द तबला वादक पंडित राम कुमार मिश्रा ने संगत करके चार चाँद लगा दिए। 

कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को उत्तरीय एवं मोमेंटो से सम्मानित किया गया। कलाकारों द्वारा कलाकारों को समर्पित इस सम्मान समारोह ने दर्शकों को एक खूबसूरत शाम से यादगारी बना दिया। 

Wednesday, September 11, 2024

299 वीं मासिक बैठक में श्री बंदोपाध्याय के कत्थक नृत्य से सजी शाम

Wednesday 11th September 2024 at 5:53 PM

श्री बंदोपाध्याय श्री साधना स्कूल ऑफ कत्थक की संस्थापक भी है


चंडीगढ़
: 11 सितंबर 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

कड़कती धुप वाली झुलसा देने वाली गर्मी अब जा चुकी है और मीठी मीठी शीत का मौसम दस्तक देने लगा है। सुबह और शाम को इसका अहसास किया जा सकता है। फुहार से लेकर मुसलाधार बरसात का रंग भी लोगों ने एक बार फिर से देख लिया। ऐसे सुहाने मौसम में देश भर में गीत संगीत के आयोजनों का सिलसिला शुरू हो चुका है। इसी का अहसास कराते हुए प्राचीन कला केंद्र ने भी चंडीगढ़ में अपना विशेष आयोजन किया। 

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा हर माह आयोजित होने वाली मासिक बैठकों की श्रृंखला की 299वीं कड़ी में दिल्ली से आई श्री बंदोपाध्याय ने अपने कत्थक नृत्य से दर्शकों को खूब आनंदित किया । पंडित जयकिशन महाराज के सानिध्य में नृत्य की शिक्षा प्राप्त कर रही श्री ने गुरू संदीप मलिक से नृत्य की प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की । इसके उपरांत पंडित जयकिशन महाराज से नृत्य की बारीकियां सीखी । श्री ने प्राचीन कला केन्द्र से भास्कर का डिप्लोमा भी प्राप्त किया है । इसके अलावा खैरागढ़ विश्वविद्यालय से भी स्नातकोत्तर तक शिक्षा ग्रहण की है । दूरदर्शन की बी ग्रेड कलाकार श्री साधना स्कूल ऑफ कत्थक की संस्थापक भी है । इन्होंने विभिन्न प्रस्तुतियों से दर्शकों के दिल में जगह बनाई है।

आज के कार्यक्रम की शुरूआत एक खूबसूरत ध्रुपद रचना कंुजन में राचो रास जोकि चौताल पर आधारित थी,  से की । इसके उपरांत श्री ने कत्थक की तकनीकी पक्ष प्रस्तुत किया । अष्टमंगल 11 मात्रा में परन,गत, उठान, चालें, आमद, त्रिपल्ली,  प्रमिलू, तिहाई और चक्रदार परन प्रस्तुत करके तकनीकी पक्ष पर अपनी मजबूत पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया । इसके उपरांत तीन ताल पर आधारित ठुमरी जोकि राग मेघ मल्हार में निबद्ध थी,प्रस्तुत करके दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी । कार्यक्रम के अंत में श्री ने तीन ताल पर आधारित रचनाएं तथा वाद्य परन,बिजली परन पेश करते हुए खूबसूरत लयकारियों से कार्यक्रम का समापन किया । इनके साथ तबले पर जानेमाने तबलावादक उस्ताद शकील अहमद खान,गायन पर अतुल देवेश,सितार पर लावण्य अबांदे तथा बोल पढंत पर जय भट्ट ने बखूबी साथ देकर कार्यक्रम को चार चांद लगा दिए।

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र की रजिस्ट्रार डॉ.शोभा  कौसर,सचिव श्री सजल कौसर ने  कलाकारों को उतरिया  और मोमेंटो देकर सम्मानित किया।

Sunday, August 11, 2024

प्राचीन कला केन्द्र की 298वीं मासिक बैठक भी जगाती रही संगीत का जादू

Sunday 11th August 2024 at 4:41 PM

संगीत की स्वर लहरियों ने एक बार फिर दिखाए संगीत के कमाल 


चंडीगढ़
: 11 अगस्त 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में संगीत के जादू को बरकरार रखने वाली संस्थाओं में सबसे अग्रणी संस्था है प्राचीन कला केंद्र। इस संस्थान ने अब तक संगीत के अनगिनत साधकों को सफलता की उंचाईयों तक पहुंचाया है। संगीत और नृत्य साधना के क्षेत्र में यह संस्थान लगातार सक्रिय रहता है। 

इसी सिलसिले में इस अग्रणी सांस्कृतिक संस्था प्राचीन कला केन्द्र द्वारा 298वीं मासिक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें राजस्थान के प्रतिभाशाली तबला वादक गौतम पाल ने एकल तबला वादक की प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। गौतम पाल ने न केवल फरुखाबाद घराने के तबला वादन की शिक्षा प्राप्त की अपितु पंजाब घराने के पंडित सुशिल जैन के गंडा बांध शिष्यत्व में भी अपनी कला को निखारा। विभिन्न प्रस्तुतियों द्वारा अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके गौतम पाल ऑल इंडिया रेडियो के बी ग्रेड कलाकार है।

एक नया इतिहास रचने वाले आज के कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति शिमला के गुंजन चन्ना द्वारा पेश की गयी। गुंजन को हाल ही में  दूरदर्शन  के ऐ ग्रेड से सम्मानित किया गया है।  गुंजन चन्ना ने अल्पायु में माता पिता से सीखने के बाद पटियाला के डॉ  जगमोहन शर्मा के शिष्यत्व में संगीत की बारीकियां सीखी। गुंजन संगीत की दुनिया का उभरता कलाकार है।

संगीत के क्षेत्र में यादगारी अध्याय जोड़ने वाले आज के इस कार्यक्रम की शुरुआत श्री गौतम पाल  के तबला वादन से हुई जिस में उन्होंने ने  तीन ताल में पेशकार रेले,कायदे,पलटे,पारम्परिक उठान बहुत खूबसूरती से पेश किए। इसके उपरांत इन्होंने फरुखाबाद घराने की कुछ प्राचीन गतें,रेले इत्यादि पेश करके खूब तालियां बटोरी। इसके उपरांत फरमाइशी एवं कमाली चक्रदार , टुकड़े , रेल एवं तिहाई का सधा हुई प्रदर्शन किया।  इनके साथ युवा एवं प्रतिभावान हारमोनियम वादक गुरप्रीत सिंह मोगा ने खूबसूरत संगत करके खूब समां बांधा।  

कार्यक्रम के दूसरे भाग में युवा एवं प्रतिभाशाली गुंजन चन्ना ने मंच संभाला और राग बिहाग से कार्यक्रम की शुरुआत की। आलाप के पश्चात विलम्बित ख्याल  में एक रचना "कैसे सुख सोये " पेश की  इसके उपरांत मध्य लाया  तीन ताल  में  दो रचनाएँ बालम रे  एवं बजे रे मोरी पायल प्रस्तुत करके खूब तालिया बटोरी। द्रुत ख्याल की बंदिश बनी बनी ठनी ठनी  भी दर्शकों का मन मोह गयी।  कार्यक्रम के अंत में गुंजन ने हिमाचली फोक माये नई मेरिये  प्रस्तुत करके रंग जमाया।  इनके साथ तबले पर श्री राजेश ब्रह्मभट्ट और हारमोनियम पर श्री मदन कश्यप ने बखूबी  संगत की। 

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र की रजिस्ट्रार डॉ.शोभा  कौसर,सचिव श्री सजल कौसर और तबला गुरू पंडित सुशील जैन  तथा डॉ जगमोहन शर्मा ने  कलाकारों को उतरिया  और मोमेंटो देकर सम्मानित किया।

Saturday, July 20, 2024

संतूर की मधुर स्वर लहरियों से सजी केन्द्र की 297वीं मासिक बैठक

 Saturday 20th July 2024 at 6:25 PM

संतूर वादक डॉ बिपुल कुमार रॉय  ने जगाया जादू 


चंडीगढ़: 20 जुलाई 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क):: 

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा हर माह आयोजित होने वाली मासिक बैठकों की श्रृंखला में आज यहां इसी की 297वीं कड़ी में मधुर एवं सधे हुए  संतूर वादन की प्रस्तुति पेश की गई । दिल्ली से आए युवा एवं प्रतिभाशाली संतूर वादक डॉ बिपुल कुमार रॉय  ने अपने प्रभावशाली  संतूर  वादन से दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की ।इनके साथ तबले पर जाने माने तबला वादक उस्ताद अकरम खान ने बखूबी साथ दिया।

इस कार्यक्रम का आयोजन हमेशा की भांति केन्द्र के एम.एल.कौसर सभागार में साय 6 :30 बजे से किया गया । इस अवसर पर चण्डीगढ़़ के कुछ जानेमाने कलाकारों ने अपनी उपस्थिति से चार चांद लगा दिए ।  बिपुल एक ऐसे युवा संतूर वादक हैं जिन्होंने  बहुत काम समय में  संगीत की दुनिय में अपना स्थान बनाया है।

इन्होने संतूर वादन की शिक्षा सूफियाना घराने के प्रसिद्द संतूर वादक पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी से प्राप्त की है।  इन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय से गायन में एमफिल  तथा पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।  बिपुल आकाशवाणी के ऐ ग्रेड कलाकार हैं और भारतीय संस्कृति मंत्रालय में उत्कृष्ट श्रेणी के कलाकार हैं।  रागों की शुद्धता , छंदों का मधुर प्रयोग और आकर्षक लयकारी इनके तंत्र वादन की विशेषता है।  इनको संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए बहुत से पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।  

कार्यक्रम की शुरुआत के लिए बिपुल  ने राग रागेश्री में आलाप से की।  तंत्रकारी अंग में सजी  विलम्बित ताल में आलाप के उपरांत झप ताल  मध्य लय में जोड़ पेश किया तथा द्रुत तीन ताल से सजा झाला पेश करके खूब तालिया बटोरी।   तंत्रकारी अंग में महारथ रखने वाले बिपुल  ने  लयकारियों से दर्शकों वाहवाही बटोरी। 

कार्यक्रम का समापन इन्होंने एक मधुर पहाड़ी धुन से किया जिसका दर्शकों के खूब आनंद उठाया । तबले पर उस्ताद अकरम खान के हमेशा की तरह  बखूबी रंग जमाया। एक ऐसा रंग जो सभी को याद रहने वाला  है। लोग समापन के बाद भी झूमते नज़र आए। 

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर ने कलाकारों को उतरीया एव मोमेंटो देकर सम्मानित किया । इस अवसर पर केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ शोभा कौसर भी उपस्थित थे जिनकी मौजूदगी हर बार नए कलाकारों को एक नाज़ा उत्साह देती है।  

Friday, June 9, 2023

प्राचीन कला केन्द्र की 285वीं मासिक बैठक

  Friday 9th June 2023 at 19:43 PM

 तबला वादन और कत्थक नृत्य की खूबसूरत प्रस्तुतियां 


चंडीगढ़
: 9 जून 2023: (कार्तिका सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

उत्तर भारत में संगीत और कला की साधना को निरतर जीवंत रखने वालों में प्राचीन कला केंद्र भी एक है। इस क्षेत्र से जुड़े युवाओं और उम्र के लम्बा हिस्सा बिता चुके साधकों के लिए कुछ न कुछ करते रहना इसी संस्थान के हिस्से आया है। इस संतान की मासिक बैठक साधना की इस धरा को जीवंत रखने में बहियत सहयक होती है। हर महीने किसी नई किस जानेमाने कलाकार को इस बैठक में बुला कर सभी के रूबरू कराना इसी संस्थान के बस है। हर महीने कला प्रेमियों को संगीत और कला की दिव्य अनुभूतियों से परिचित करवाना एक कठिन लेकिन यादगारी कार्य है। 

इस बार भी आज अलौकिक से अनुभव हुए। प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आज यहां एम.एल.कौसर सभागार में 285वीं मासिक बैठक का आयोजन किया गया । जिसमें जालंधर से आए सुरजीत सिंह द्वारा तबला  वादन और दिल्ली से आए रोहित पवार द्वारा कत्थक नृत्य की प्रस्तुति पेश की गई।

आज के कलाकार सुरजीत सिंह ने तबला वादन की शिक्षा अपने गुरू कुलविंदर सिंह से प्राप्त की। अल्पायु से ही संगीत में रूचि रखने वाले सुरजीत सिंह ने बहुत से कार्यक्रमों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करके प्रशंसा हासिल की है । विदेशों में भी सुरजीत अपनी प्रतिभा का तोड़ मनवा चुके है।

दूसरी ओर रोहित पवार ने गुरू वासवती मिश्रा के शिष्यत्व में अपनी कला को निखारा है । इसके अलावा इन्होंने अल्पायु से ही कत्थक की प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का प्यार प्राप्त किया है । आजकल रोहित कत्थक केन्द्र दिल्ली में बतौर कत्थक कलाकार अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं । देश ही नहीं विदेशों में भी रोहित अपने कत्थक नृत्य की एकल प्रस्तुतियां पेश कर चुके हैं।

आज के कार्यक्रम की शुरूआत सुरजीत सिंह के तबला वादन से हुई जिसमें इन्होंने तीन ताल से कार्यक्रम की शुरूआत की और सबसे पहले पेशकार प्रस्तुत किया । इसके बाद रेले,कायदे,पल्टे पेश किए । साथ ही पंजाब घराने की कुछ खास बंदिशें भी पेश की । सुरजीत के सधे हुए तबला वादन में उनकी विशिष्ट शैली की झलक मिलती है । इन्होंने और भी कई पुरातन बंदिशें  पेश करके दर्शकों की तालियां बटोरी । इसके साथ हारमोनियम पर ईश्वर सिंह ने बखूबी संगत करके रंग जमाया।

दूसरी प्रस्तुति में दिल्ली से आए युवा कत्थक नर्तक रोहित पवार ने मंच संभाला । सबसे पहले भगवान शिव की स्तुति की । असाधारण गुणों के स्वामी शिव की स्तुति पेश की और इस प्रस्तुति द्वारा रोहित ने भगवान शिव को अपनी श्रद्धा के सुमन अर्पित किए । इसके उपरांत शुद्ध कत्थक नृत्य की प्रस्तुति तीन ताल में पेश की गई । जिसमें उपज,थाट,उठान,लड़ी इत्यादि पेश की गई । विलम्बित मध्य और द्रुत लय से सजी प्रस्तुतियों में रोहित ने कत्थक के विभिन्न रंग पेश करके खूब प्रशंसा बटोरी। 

कार्यक्रम के अंतिम भाग में रोहित ने भावपक्ष पर आधारित रचना केसरीया बालम पधारो हमारो देस जो कि राजस्थानी मांड पर आधारित थी पेश करके दर्शकों की खूब तालियां बटोरी । इनके साथ तबले पर जहीन खां,गायन पर सुहैब हसन,पखावज पर महावीर गंगानी और सारंगी पर गुलाम वारिस ने बखूबी संगत की।

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र की रजिस्ट्रार डॉ.शोभा कौसर,सचिव श्री सजल कौसर ने कलाकारों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया।

Wednesday, April 26, 2023

प्राचीन कला केंद्र कलाकारों की आर्थिक मज़बूती के लिए भी गंभीर

डांस और कला के  क्षेत्र  में कैरियर के रास्ते भी बहुत अच्छे हैं 


चंडीगढ़
: 26 अप्रैल 2023: (कार्तिका सिंह//रेक्टर कथूरिया//संगीत स्क्रीन)::

कला के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग समाज और संसार उत्कृष्ट स्थिति को दर्शाने वालों में शामिल होते हैं। समाज के विकास और खिलावट का पता कला क्षेत्र से जुड़े लोग ही बताते हैं। पूरी पूरी उम्र तक चलनेवाली साधना जब कई बार विरासत में मिलती है तो अहसास होता है की यह साधना केवल एक उम्र की नहीं बल्कि जन्मों जन्मों की साधना है। इसके बावजूद जब कभी कभी समाज के विभिन्न अवसरों पर उनका आमना सामना ज़िंदगी के कड़े इम्तिहानों से होता है तो उनसे अक्सर पूछा जाता है कि कला तो हुई, डांस भी हुआ, संगीत भी हुआ लेकिन करते क्या हो? इस सवाल को पूछने का मतलब होता है पैसा कहां से कमाते हो? रोज़ी रोटी कहां से चलती है? आसमान को छूती महंगाई का ज़माना है इसलिए आजकल दाल रोटी चलना भी सहज नहीं रहा। कला के क्षेत्र में तो स्थिति और भी संवेदनशील है। कला के  कुछ अलग किस्म के अपने खर्चे भी होते हैं। वस्त्रों से ले कर साज़ों तक। 

प्राचीन कला केंद्र ने इस स्थिति को एक चुनौती की तरह लिया है और कला के क्षेत्र में जुड़े लोगों को ऐसे सवालों का सामना करते समय यह कहने के सक्षम बनाया है कि और कुछ का क्या मतलब? हम और कुछ क्यूं करें? हमें अपनी कला की साधना सम्मानजनक जीवन जीने के लिए बहुत अच्छी आमदनी भी देती है। हमें जीवनयापन के लिए कुछ और करने की ज़रूरत ही नहीं। 

आज 26 अप्रैल 2023 की दोपहर को जब प्राचीन कला केंद्र के चंडीगढ़ कार्यालय में पत्रकार वार्ता चल रही थी तो इस संस्थान की संचालन और प्रबंधन समिति से जुडी हुई डाक्टर  समीरा कौसर ने स्वयं ही इस मुद्दे को उठाया। गौरतलब है कि इस मुद्दे पर बात करने से अक्सर कलाकार लोग घबरा जाते हैं या शरमा जाते हैं क्यूंकि शराब की पार्टियों और दिखावे पर बेशुमार खर्चे करने वाले हमारे समाज में अभी भी कला और कलाकारों के लिए खुले दिल से खर्च करने का ट्रेंड नहीं बन सका। उन्हें अपनी टीम के सदस्यों को कुछ शुल्क देने और आनेजाने का खर्चा निकलने के लिए विशेष प्रयास करने पड़ते हैं। आर्थिक तंगियों तुर्शियों को दूर करके की पहल करते हुए अब प्राचीन कला केंद्र इस दिशा में विशेष योजनाएं ले कर अग्रसर है। 

दिलचस्प बात यह है कि प्रचीन कला केंद्र केवल चंडीगढ़ में ही नहीं बल्कि देश और दुनिया के बहुत से हिस्सों में सक्रिय है। इसके सर्टिफिकेट देश और दुनिया भर में मान्यता प्राप्त हैं। शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की विद्या के साथ ही एक शुरुआत, उस अर्जित विद्या से रोज़गार की।  कला के क्षेत्र में रोज़गार के नए अवसर पैदा करके कला केंद्र एक नई पहल की है।  भारतीय शास्त्रीय कला तथा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए केंद्र द्वारा एक नए कदम का आगाज़ किया है, जिसमें राजधानी चंडीगढ़ तथा आसपास के प्रतिष्ठित स्कूलों के साथ एक संयुक्त उधम यानि कि कोलैब्रेशन की जाएगी। जिस में स्कूली बच्चों को अपने ऐकेडेमिक कोर्स के साथ शास्त्रीय संगीत, नृत्य एवं कोमल कला के कोर्सेज करवाए जायेंगे। कथक, हिंदुस्तानी संगीत और पेंटिंग की क्लासेज स्कूल ख़त्म होने के बाद स्कूल परिसर में ही इच्छुक छात्रों के लिए करवाई जाएंगी। जिनसे छात्रों को सर्वश्रेठ शिक्षकों से सीखने के साथ ही उनके कौशल व ज्ञान को विकसित करने, तथा उनके समग्र शैक्षिक अनुभव को समृद्ध करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करेगी। हमारी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार के लिए युवा पीड़ी को कलात्मिक गतिविधियों से जोड़ना अपने आप में एक सराहनीय कदम है।  

कला में पारंगत करने वाली शिक्षा देने के साथ कैरियर और रोज़गार के अवसर भी आवश्यक हैं। इस बात को भी गंभीतरता से पहचाना है प्राचीन कला केंद्र ने। इस के साथ शास्त्रीय कलाओं में मास्टर्स एवं पी.एच.डी  तक की डिग्री प्राप्त कर चुके टीचर्स के लिए भी ये एक अहम अवसर साबित होगा। इन कलाओं में विद्या प्राप्ति के बाद रोज़गार के अवसर बहुत कम होते हैं, ऐसे में कला केंद्र की तरफ़ से ऐसी पहल एक नया आयाम साबित करेगी।  जिस को पूर्ण करने के लिए चंडीगढ़ के बनयान ट्री स्कूल के डायरेक्टर कर्नल जी. एस. चड्डा तथा कुरुक्षेत्र के विजडम वर्ल्ड स्कूल के डायरेक्टर श्री विनोद रावल एवं श्रीमती अनीता रावल आगे आये हैं।  इन दोनों स्कूलों से इस कदम की शुरुआत होगी। इस पूरे प्रोजेक्ट के मैनेजर श्री पार्थ कौसर होंगे।  ग्रेड 1 से लेकर 12 कक्षा तक कोई भी विद्यार्थी इसमें भाग ले सकता है।  बनयान ट्री स्कूल द्वारा ये कोर्स पूरी तरह से फ्री होगा, अर्थात छात्रों को संगीत व नृत्य की शिक्षा के लिए कोई भी एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना होगा।  वहीँ विजडम वर्ल्ड स्कूल द्वारा छात्रों के माता-पिता को इन् कोर्सेज में अपने बच्चों के साथ भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जायेगा। 

हर सवाल का पूरी बारीकी से जवाब देने के साथ ही डॉ समीरा कौसर ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि, इंटरनेट अथवा यूट्यूब जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्म से नृत्य एवं संगीत सीखने वाले छात्रों को भी एहसास होगा कि, पूर्ण तौर पर प्रतिष्ठित गुरु से सीखने का अनुभव कैसा होता है? गुरु माँ  डॉ शोभा कौसर के आशीर्वाद सहित उनके अधीन शिक्षा ग्रहण कर चुके केंद्र के छात्रों एक गुरु के रूप में पढ़ाने का अवसर भी मिलेगा।  इसके साथ ही ये सभी कोर्स शासकीय निकायों द्वारा मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्रों द्वारा समर्थित है।  ये सर्टिफिकेट उनके आगामी जीवन में भी एक मूल्यवान प्रमाण पत्र की तरह एक अतिरिक्त निवेश की भांति  होगा जिस से छात्र कला के क्षेत्र में  कुछ नया सीख पाने में सक्षम होंगे।

अंत में एक बात और भी यहाँ ज़रूरी लगती है। जुर्म को कंट्रोल करने और जुर्म को मिटाने के लिए जितने खर्चे सरकारें करती हैं और जितने झंझट समाज के विभिन्न वर्ग करते हैं उन सभी प्रयासों को खर्चों का दो चार परसेंट भी युवा वर्ग को जुर्म की दुनिया का आकर्षण से हटा कर कला के ज़रिए नवनिर्माण की तरफ मोड़ सकता है। इससे पहले कि कोई समाज दुश्मन हमारे युवाओं के हाथों में बंदूक पकड़ा जाए उससे पहले ही इन युवाओं के सामने कला के क्षेत्र में अच्छी आमदनी वाले रास्ते बनाना बहुत ही फायदेमंद रहेगा। प्राचीन कला केंद्र युवा वर्ग को सपने दिखाने के साथ साथ इन सपनों को साकार करने के लिए भी बहुत कुछ करता है। अगर समाज और सत्ता भी इन प्रयसों में इस संस्थान का साथ दें तो सफलता हैरानकुन होगी। 

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Saturday, March 11, 2023

मोनिका शाह के शास्त्रीय गायन से सजी शाम

 Saturday 11th March 2023 at 7:08 PM

मंच से बिखरा राग जैजावंती का जादू 


चंडीगढ़
: 11 मार्च 2023: (कार्तिका सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

प्राचीन कलाकेंद्र एक ऐसा संस्थान है जिस ने आज के युग में भी संगीत की शुद्धता और नियमों को ध्यान में रख कर न केवळ स्वयं साधना की है बल्कि लाखों अन्य साधकों को भी।  आज भी यहां विशेष आयोजन था। आज जानीमानी शास्त्रीय गायिका मोनिका शाह।  

गीत तो और भी बहुत से होंगें लेकिन इस समय बात करते है इतिहास और फिल्मों की। सन 1960 में आई एक ऐसी ही जानीमानी फिल्म मुगले आज़म की याद लोगों के ज़ेहन मेंअभी तक ताज़ा है। उसकी फोटोग्राफी भी बेहद महंगी थी और उसके सभी गीत भी लोकप्रिय हुए थे। इन गीतों ने कई नए रेकार्ड बनाए और एक इतिहास रचा। लोगों को फिल्म का नाम भी याद रहता है और गीतों के मुखड़े भी लेकिन इन गीतों की धुनों को किस राग के आधार पर तैयार किया गया था इसका ख्याल मन में काम ही उठता है। इस आधार की इस राग की चर्चा होती है पाचन कलाकेंद्र के आयोजनों में। 

आज भी राग का विचार शिद्द्त से उभरा प्राचीन कला केंद्र का आज का आयोजन देख कर। आज प्राचीन कला केंद्र के प्रांगण में राग जैजावंती की खूबसूरती बुलंदी के साथ एक बार फिर  सामने आई। शायद बहुत कम लोग जानते होंगें कि मुगलेआज़म फिल्म की यह प्रसिद्ध क़वाली इसी राग पर आधारित थी।  इसके बोल और अंदाज़ एक नया इतिहास रच गए। बहुत सी फिल्मों के जादूभरे गीतों का आधार रहा राग जैजावंती। जिस क़्वाली  की हम यहां चर्चा कर रहे हैं उसके बोल थे: 

यह दिल की लगी कम क्या होगी!

यह इश्क़ भला कम क्या होगा!

जब रात है ऐसी मतवाली! 

फिर सुबह का आलम क्या होगा!

गीत लिखा था शकील बदायुनी साहिब ने और इसे संगीत से सजाया था जनाब नौशाद साहिब ने। राग जैजावंती पर आधारित इस गीत की धुन ने बह श्रोताओं  में एक विशेष स्थान बनाया। ताल था दादरा। 

इस गीत को अपनी आवाज़ दे कर अमरता प्रदान की सुर सम्राज्ञी लता मंगेशकर जी ने। 

आज इस राग पर विशेष कार्यक्रम सुन पाना सचमुच किसी उपलब्धि से कम नहीं था। प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आयोजित की जाने वाली मासिक बैठकों की श्रृंखला में आज केन्द्र की 282 वीं मासिक बैठक का आयोजन केन्द्र के एम.एल.कौसर सभागार में किया गया जिसमें अहमदाबाद से आई शास्त्रीय गायिका डा. मोनिका शाह द्वारा एक मधुर शास्त्रीय गायन की प्रस्तुति पेश की गई। मोनिका शाह पद्म विभूषण ठुमरी क्वीन के नाम से विख्यात गिरिजा देवी जी की शिष्या हैं । इन्होंनें 1500 से ज्यादा कार्यक्रमों में अपनी खूबसूरत प्रस्तुतियों से संगीत प्रेमियों का दिल जीता है । इन्होंनें देश ही नहीं विदेशों में अपनी कला का बखूबी प्रदर्शन किया है। इन्होंनें आराधना संगीत अकादमी की स्थापना की जिसमें लगभग 200 विद्यार्थी संगीत की शिक्षा ले रहे हैं ।

 आज के कार्यक्रम की शुरूआत राग जैजैवंती से की गई जिसमें पारम्परिक आलाप के बाद इन्होंनें बड़े ख्याल की रचना ‘‘लड़ा में सजनी’’ जो कि विलम्बित एक ताल में निबद्ध थी पेश की । इसके उपरांत मोनिका ने मध्य लय तीन ताल में निबद्ध रचना ‘‘विनती की करीए बात जो’’ पेश की। इसके उपरांत राग मिश्र खमाज ताल में निबद्ध ठुमरी  जिसके बोल थे ‘‘जग पड़ी मैं तो पिया के जगाए’’ प्रस्तुत करके खूब तालियां बटोरी ।

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर ने कलाकारों को सम्मानित किया ।हुत से लोग जो केवल गीत सुनते हैं उनके लिए तो आज भी यह गीत विशेष हैं। जो लोग संगीत की गहरी समझ रखते हुए इसके राग आधारित पहलुओं को भी जानना चाहते हैं। इस दिशा में हमरे विशेषज्ञों ने जो बताया उसका सारांश इस प्रकार है:

यहाँ इस बात की चर्चा करते हुए उल्लेखनीय है कि आरोह में पंचम के साथ शुद्ध और धैवत के साथ कोमल नि प्रयोग किया जाता है, जैसे म प नि सां, ध नि रे। किन्तु अवरोह में कोमल निषाद प्रयोग किया जाता है। इस राग की प्रकृति गंभीर है तथा चलन तीनो सप्तकों में समान रूप से होती है एवं इसमें छोटा ख्याल, बडा ख्याल, ध्रुपद, धमार सभी शोभा देते है।

गौरतलब है कि इस राग में राग अल्हैया, राग छाया व राग देस का अंग दूध-पानी कि भांति मिला हुआ है। यथा - राग अल्हैया का अंग- ग प ध नि१ ; ग नि१ ; नि१ ध प ध ग म ग रे ; रे ग१ रे सा; राग छाया का अंग- रे रे ग रे; रे ग म प ; म ग ; म ग रे; ,प रे रे ग१ रे सा, राग देस का अंग- रे रे; म प नि; नि सा'; नि सा' रे' नि१ ध; प ध म ग ; म ग रे; ,नि सा ,ध ,नि१ रे।

बहुत से गुणी कलाकार इस मामले पूरी तरह से पारंगत हैं। इस तरह के गायन की कमांड  रखने वाले इस राग को राग बागेश्री के आरोह के द्वारा भी गाते हैं परंतु देस अंग का आरोह यथा रे म प नि सा' वाला रूप ही प्रचार में अधिक है। इस राग का स्वर विस्तार तीनों सप्तकों में किया जाता है।

इस तरह कुछ और गीत भी इसी राग पर आधारित रहे। इन्हीं में से एक गीत था;

ज़िंदगी आज मेरे नाम से शर्माती है: यह गीत फिल्म "सन ऑफ इंडिया" का था जो सन 1962 में आई थी। ताल दादरा रहा। इस गीत को आवाज़ दी थी मोहम्मद रफ़ी साहिब ने और  से सजाया था जनाब नौशाद साहिब ने। 

निकट भविष्य में भी हम आपके रूबरू इसी तरह की जानकारी लाते रहेंगे। आप भी संगीत स्क्रीन से जुड़िए। विवरण यहां क्लिक कर के देख सकते हैं। 

Wednesday, January 4, 2023

शीत लहर के बावजूद आईसीसीआर और प्राचीन कला केंद्र की एक नई पहल

Wednesday 4th January 2023 at  08:01 PM

पंजाबी लोक गीतों और लोक नृत्यों की एक रंगीन शाम का आयोजन

आईसीसीआर की हॉरिजोन  सीरीज के तहत इस संगीत संध्या का आयोजन किया


चंडीगढ़
//मोहाली: 4 जनवरी 2022: (कार्तिका सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

कलियुग के इस दौर में जब शीत लहर के मुकाबले का बहाना बना कर नशे के दौर चलते हैं और इस तरह के बहुत से दुसरे आयोजन भी होते हैं उस समय भारतीय संगीत कला को समर्पित दो प्रतिष्ठित संस्कृतिक संस्थाएं अभी भी स्वस्थ मनोरंजन और सच्ची कला की साधना के पथ पर अग्रसर हैं। आईसीसीआर और प्राचीन  कला केंद्र के संयुक्त तत्वाधान में  आज इसी बात को साबित करता एक और आयोजन हुआ। यह आयोजन पंजाबी लोकगीतों और लोक नृत्य पर आधारित था। इस रंगारंग संध्या का आयोजन प्राचीन कला केंद्र के डॉ शोभा कौसर सभागार, सेक्टर-71, मोहाली में शाम पांच बजे से किया गया। देखते ही देखते माहौल पूरी तरह से कला के रंग में रंग गया। पंजाब के गीत और पंजाबी भगंडा के बार फिर छाए रहे। 

इस कार्यक्रम में पंजाब के प्रसिद्ध कलाकार आत्मजीत सिंह की टीम ने उनके मार्गदर्शन में पंजाबी लोक संगीत के सभी रंग जैसे गिद्दा भांगड़ा, झूमर, गीत आदि प्रस्तुत किए। हर आइटम कमाल की रही। दर्शकों और श्रोताओं को लुभाते हुए, झूमने के मूड में लाती हुई हुए पाँव को थिरकन का अहसास दिलाते हुए यह सही आइटमें बहुत ही सफलता से मंच पर मंचित हुईं। 

एस ए एस नगर के डिप्टी कमिश्नर श्री अमित तलवार आईएएस ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और सीनियर सिटीजन एसोसिएशन चैप्टर 3 मोहाली के अध्यक्ष श्री प्रिंसिपल चौधरी विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस मौके पर केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर, सचिव सजल कौसर और आईसीसीआर के क्षेत्रीय सलाहकार प्रो. हरविंदर सिंह भी मौजूद थे। 


कार्यक्रम की शुरुआत एक भक्ति गीत 'शुकर दाता तेरा शुक्र दाता'
से हुई, इसके बाद एक लोक आर्केस्ट्रा का प्रदर्शन किया गया, जिसमें सभी लोक वाद्यों की भूमिका और जीवन से दर्शकों को परिचित कराया गया, इसके बाद लुड्डी  नामक एक पंजाबी लोक नृत्य का मंचन किया गया जिसका  दर्शकों ने खूब आनंद लिया। इसके उपरांत लोक गीत लम्बी धौन कसीदा कड़दी पेश किया गया।  इसके बाद 50 प्लस युवकों द्वारा  झूमर प्रस्तुत किया गया , जिसे दर्शकों की खूब वाहवाही भी मिली। यह शानदार आइटम सचमुच जानदार भी थी। दमदार ज़िंदगी जीने की प्रेरणा देती हुई आइटम पंजाब के जज़्बे और जोश को भी ब्यान करती थी। 

कार्यक्रम के अगले भाग में हमेशा से पंजाबियों का पसंदीदा लोकगीत मिर्ज़ा प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद इस कार्यक्रम में लड़कियों के गिद्धों ने अलग-अलग रंग बिखेरे जिस से दर्शक भी झूम उठे। 

इसके बाद लोकप्रिय पंजाबी गीत तूड़ी तंद  सौन हाड़ी  वेच वटके की प्रस्तुति दी गई और  इस गीत ने दर्शकों  को भी झूमने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का अंत भांगड़ा के बिना अधूरा है इसलिएज़ोरदार भांगड़ा के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। दर्शकों ने इस रंग बिरंगी शाम का खूब लुत्फ उठाया।

Saturday, October 1, 2022

प्राचीन कला केंद्र में हुआ नयी परंपरा का आगाज़

केंद्र में महसुस हो रहा था अंतर्राष्ट्रीय स्तर का आयोजन 

चंडीगढ़: 1 अक्टूबर 2022: (कार्तिका सिंह//संगीत स्क्रीन):: 
वो लोग जिन्होंने या तो हमेशां अपनी मातृभाषा बोली या फिर केवल अंग्रेज़ी। भारत की कोई भाषा उन्हें नहीं आती। न वे लोग समझ सकते हैं और न ही बोल सकते हैं। भाषा की इस कठिनाई के बावजूद चंडीगढ़ के प्राचीन कलाकेंद्र में ये विदेश कलाकार और भारत के कलाकार इस तरह एक दुसरे में घुलमिल गए थे जैसे जन्मों जन्मों से एक दुसरे को जानते हों। कला को और शिद्दत से सीखने की प्यास और कला के साथ अंतरंगता ने यह चमत्कार भी कर दिखाया था। माहौल अंतर्राष्ट्रीय सांस्कृतिक माहौल बना हुआ था। कोई धर्म नहीं, कोई सीमा नहीं, कोई जातिपाति नहीं, कोई धर्म नहीं....! केवल एक ही मज़हब था-कला का मज़हब। प्राचीन कला केंद्र का यह आज का रंग भी देखने वाला था। एक कलामय माहौल। गीत, संगीत और डांस के अनुभवों की ऊंचाई।  दूर दराज से आए कलाकारों से मिल कर और उनकी परफॉर्मेंस को देख कर यूं लगता था जैसे हम किसी अंतर्राष्ट्रीय आयोजन में मौजूद हों। 

प्राचीन कला केंद्र ने आज यहां अपने एम.एल. कौसर  इंडोर ऑडिटोरियम दोपहर 12:00 बजे  एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया।  केंद्र ने अपनी नयी उपलब्धि का विस्तृत परिचय देने हेतु  प्रेस से मुलाकात की।  इस नए कार्यक्रम के तहत केंद्र के मोहाली परिसर में "गुरु शिष्य परम्परा" के सानिध्य में विभिन्न शास्त्रीय शैलियों के श्रद्धेय गुरुओं के सक्षम मार्गदर्शन में "विधिवत तालीम"   देने के लिए तीन वर्षीय कोर्स की शुरुआत की गई है।   यहां उल्लेख करना प्रासंगिक है कि केंद्र में शास्त्रीय कला के क्षेत्र में तालीम प्राप्त करने वाले विदेशी और भारतीय छात्रों के लिए मेस सुविधाओं के साथ एक सुसज्जित छात्रावास है। विभिन्न देशों से ICCRऔर PKK छात्रवृत्ति के माध्यम से कुछ छात्र पहली अक्टूबर, 2022 से इस गहन शिक्षण कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। इसी कार्यक्रम के परिचय के दौरान  इन विदेशी छात्रों द्वारा अपने अपने देश की कला का बखूबी प्रदर्शन किया गया।  अपने देश की पारम्परिक वेश भूषा में सजे इन छात्रों ने अपनी देश की कला और संगीत की सुन्दर झलकियां पेश की।  कज़ाकिस्तान और बांग्लादेश से आये इन छात्रों ने अपने देश की कला और संस्कृति का परिचय दिया  

गुरु शिष्य परंपरा का महत्व
अखण्डमंडलकरम व्याप्तम येना चरचाराम |
तत्पदं दर्शीतं ये तस्माई श्रीगुरुवे नमः ||
(उस महान गुरु को नमन, जिसने उस अवस्था को साकार करना संभव बनाया जो पूरे ब्रह्मांड में, सभी जीवित और मृत में व्याप्त है।)
इतिहास और संस्कृति से समृद्ध देश, भारत ने आदिकाल से ही यह महसूस किया है कि युवा व्यक्तित्व  के विकास में एक गुरु का क्या महत्व है। भारतीय संस्कृति में गुरु की भूमिका किसी विषय को पढ़ाने वाले से परे होती है। अपने गुरु से सीखे गए पाठ कहीं अधिक जटिल होते हैं, क्योंकि वे दुनिया के लिए छात्र की आंखें खोलते हैं और अपने विचारों को सही दिशा देते हैं जिसमें उन्हें अपनी ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने और  समृद्ध होने और सफल होने के लिए करना चाहिए।

प्राचीन कला केंद्र के तत्वावधान में छात्र विभिन्न गुरुओं- गुरु शोभा कौसर  जी, गुरु सौभाग्य वर्धन, गुरु बृजमोहन गंगानी, डॉ समीरा कौसर , श्री परवेश और योगी आशु प्रताप से सीखेंगे। कार्यक्रम के लिए छात्रों का पहला बैच पहले ही देश के विभिन्न हिस्सों से और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे साथ जुड़ चुका है।  

ये छात्र जल्द ही अपनी कक्षाएं शुरू करेंगे और अपनी कला-रूपों की बारीकियों को सीखने के साथ-साथ अपने गुरुओं के अनुभवों जो अपने क्षेत्र में उस्ताद हैं और युवा कलाकारों के लिए ज्ञान की सोने की खान से सीखेंगे! 60 से अधिक वर्षों से, प्राचीन कला केंद्र ने कला और संस्कृति के बारे में ज्ञान को बढ़ाने और फैलाने का प्रयास किया है और यह कार्यक्रम उस दिशा में अगला कदम होगा!

कुल मिला कर आज का आयोजन एक नई भव्य शुरुआत का शुभारम्भ था--एक  उदघोषणा जैसा-- जैसा था। प्राचीन कला केंद्र के भव्य सभागार के शांत माहौल में संगीत और नृत्य की लहरियां निमंत्रण दे रही थीं कि आओ और  डुबकी लगाओ। कला के इस आसमान में उड़ान भरो। 

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