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Monday, January 19, 2026

जैस्मीन अख्तर लुधियाना में अपने कॉलेज पहुंचीं

MTSM College  on Tuesday 19th January 2026 at 2:38 PM Regarding Jasmeen Akhtar:Visit

प्रिंसिपल और स्टाफ ने मशहूर सिंगर का गर्मजोशी से स्वागत किया


लुधियाना
: 19 जनवरी 2026: (मीडिया लिंक32//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

मशहूर सिंगर और कॉलेज की पुरानी स्टूडेंट जैस्मीन अख्तर ने लुधियाना के मास्टर तारा सिंह मेमोरियल कॉलेज फॉर विमेन में शानदार तरीके से शिरकत की। कई साल पहले इसी कॉलेज में पढ़ते हुए उन्होंने शायद सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन वह अपने ही कॉलेज में स्पेशल गेस्ट बनकर आएंगी। यह वही सिंगर हैं जो अपने कई हिट गानों की वजह से शोहरत की ऊंचाइयों पर पहुंची हैं।

मशहूर सिंगर और कॉलेज की पुरानी स्टूडेंट जैस्मीन अख्तर ने लुधियाना के पुराने और मशहूर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन मास्टर तारा सिंह मेमोरियल कॉलेज फॉर विमेन, लुधियाना में हुए ग्रैंड फंक्शन में शिरकत की। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. किरणदीप कौर और बाकी स्टाफ ने इस पुरानी स्टूडेंट और अभी की स्पेशल गेस्ट का फूलों का गुलदस्ता देकर गर्मजोशी से स्वागत किया।

जैस्मिन ने कॉलेज के आंगन में काफी देर तक अपने गानों से स्टूडेंट्स को मंत्रमुग्ध किया और खूब मस्ती की। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. किरणदीप कौर, कॉलेज प्रेसिडेंट एस. स्वर्ण सिंह, सेक्रेटरी एस. गुरबचन सिंह पाहवा और दूसरे सदस्यों ने जैस्मिन को उनकी इस कामयाबी पर बधाई दी और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

Thursday, December 25, 2025

नृत्य की विशेष संध्या में अमेरिका से आयी प्राची दीक्षित एवं समूह

Emailed on 24th December 2025 at 6:56 PM Regarding Kathak Dance Event at PKK

प्राचीन कला केंद्र में कत्थक नृत्य से सजी एक और शाम बनी यादगारी 


चंडीगढ़:24 दिसंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह/ /संगीत स्क्रीन डेस्क )::

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आयोजित किये जा रहे विशेष कार्यक्रम में  अमरीका से आयी प्राची दीक्षित एवं समूह ने  अपने कत्थक नृत्य से दर्शकों को खूब आनंदित किया । पंडित कन्हैया लाल जी के  सानिध्य में प्राची ने नृत्य की शिक्षा प्राप्त  की और कत्थक नृत्य की बारीकियां सीखी । प्राची  अमेरिका में नूपुर डांस अकादमी की संस्थापक भी है और केंद्र का  सम्बद्ध  सेंटर भी चला रही हैं ।  इन्होंने विभिन्न प्रस्तुतियों से दर्शकों के दिल में जगह बनाई है । प्राची विदेश में भारतीय कला को प्रफुल्लित करने का अद्भुत कार्य कर रही हैं

आज के कार्यक्रम की शुरुआत इन्होने  एक भक्तिमयी रचना शिव वंदना से की।  इसके उपरांत  कृष्ण कविताओं  पर आधारित एक भाव पक्ष की रचना पेश की गयी  जोकि इनके गुरु द्वारा रचित कविताओं पर आधारित थी।  इसके उपरांत इनके समूह द्वारा कत्थक नृत्य के तकनीकी पक्ष को प्रस्तुत किया । जिस में तीन ताल पर आधारित विलम्बित, मध्य एवं द्रुत लाया पर आधारित  परन,गत,उठान,चालें,आमद,त्रिपल्ली,प्रमिलू,तिहाई और चक्रदार परन प्रस्तुत करके तकनीकी पक्ष पर अपनी मजबूत पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया । इसके उपरांत इन्होने भाव पक्ष पर आधारित एक खूबसूरत रचना पेश की कृष्णा एवं काली  जिस में दो दिव्य शक्तियों - कृष्ण और काली - के बीच एक कालातीत संवाद पेश किया गया।  कृष्ण माया का प्रतिनिधित्व करते हैं - दुनिया की सुंदरता और भ्रम जो हमें खुशी, प्रेम और आनंद के माध्यम से अपनी ओर खींचता है। उनकी बांसुरी आत्मा को मंत्रमुग्ध कर देती है, हमें याद दिलाती है कि अस्तित्व सार्थक और आकर्षक क्यों लगता है। दूसरी तरफ काली, उग्र और अडिग, शक्ति का प्रतीक हैं - कच्ची शक्ति, समय और परिवर्तन। वह भ्रम को तोड़ देती हैं, जहाँ आराम नहीं रह सकता, वहाँ जागृति लाती हैं। हालांकि वे विपरीत दिखते हैं, लेकिन वे संघर्ष में नहीं हैं। वे दिव्य पूरक हैं।

जहाँ कृष्ण आनंद जगाते हैं, वहीं काली जागृति लाती हैं। जहाँ कृष्ण भ्रम बनाए रखते हैं, वहीं काली सत्य को प्रकट करती हैं।

साथ मिलकर, वे आत्मा को भ्रम से मुक्ति की ओर, आनंद से उद्देश्य की ओर मार्गदर्शन करते हैं। यह प्रस्तुति डेविड आर. किंसले की किताब 'द स्वॉर्ड एंड द फ्लूट: काली एंड कृष्णा , हिंदू पौराणिक कथाओं से प्रेरित है

कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को पुष्प, उत्तरीया  एवं मोमेंटो  देकर सम्मानित किया गया ।

Wednesday, December 10, 2025

प्राचीन कलाकेंद्र की तरफ से एक और विशेष आयोजन गुरुवार 11 दिसंबर को

Emailed on Wednesday 10th December 2025 at 6:29 PM

प्राचीन कलाकेंद्र की तरफ से एक और विशेष आयोजन गुरुवार 11 दिसंबर को 

कथक आर्टिस्ट मुजफ्फर मुल्ला और विद्यागौरी अडकर का जादू 

चंडीगढ़:10 दिसंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

गीत संगीत और डांस के जादू की परंपरा को यह ऐतिहासिक स्थान निरंतरता से जारी रखे हुए है। जब मैं पहली बार यहां आया था तो अपने मामा के साथ आया था। ज्ञानी राजिंदर सिंह छाबड़ा के साथ। बस स्टैंड से उतर कर यहां पहुंचने तक मां ने रिक्शा कर लिया था। इसके बावजूद दो तीन बार जब भीड़ भरे किसी रस्ते को पार करना होता तो मुझे मां की ऊँगली पकड़ना ज़रूरी लगता था। वही प्राचीन कला केंद्र मुझे तब का याद है। उस समय भी अच्छा था यहाँ का माहौल। लोगों को विधिवत संगीत की शिक्षा दी जाती थी। बचपन गुज़रा कर पत्रकारिता में पांव रखा तो फिर यहाँ एक आयोजन में आना हुआ। मोहाली के उस समय के प्रसिद्ध पत्रकार राजेंद्र सेवक अग्रवाल के साथ। उन्होंने मुझे कौसर परिवार से मिलवाया। तब से इस स्नेह का सिलसिला बना हुआ है। 

इसी सिलसिले के अंतर्गत यहां प्राचीन कला केंद्र पेश करता है 314वीं मंथली बैठक जिसमें मशहूर कथक आर्टिस्ट मुजफ्फर मुल्ला और विद्यागौरी अडकर की कथक डुएट होगी।

आयोजन का विवरण इस प्रकार होगा। कल अर्थात 11 दिसंबर 2025 को शाम 6:00 बजे हो गई औपचारिक शुरुआत। इस आयोजन का स्थान होगा-प्राचीन कला केंद्र, सेक्टर 35-B, चंडीगढ़। इंडियन क्लासिकल म्यूज़िक की एक और शानदार शाम के लिए आप भी इस आयोजन के साथ जुड़ें।

इस मौके पर इंडियन क्लासिकल डांस, इंडियन क्लासिकल म्यूज़िक, चंडीगढ़ इवेंट्स, डांस लवर, डांस इत्यादि की तरंगें आपको भी अपना जादू सा असर दिखाएंगी। 

Monday, December 1, 2025

वैश्विक एकता का असली अहसास भी करवाता रहा PKK का इवेंट

Emailed By PKK on 1st Dec 1, 2025 at 6:54 PM Regarding an event

कवालियों ने भी खूब यादगारी समय बांधा 


चंडीगढ़
: पहली दिसंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

इस बार तो प्राचीन कला केंद्र ने एक बिलकुल ही अनूठा प्रयोग किया। सचमुच यह संगीत का एक अनूठा प्रयोग ही था। संगीत इस विश्व को एकात्मकता के सूत्र में पिरोता है। यह वैश्विक एकता का असली अहसास भी करवाता है। प्राचीन कला केंद्र ने यह सब साबित भी किया। यह एक बहुत ही यादगारी आयोजन था जिसका सन्देश भी बहुत अर्थपूर्ण रहा। 

प्राचीन कला केंद्र द्वारा आज यहाँ टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में सायं 5 :50  से  एक विशेष कार्यक्रम वन  वर्ल्ड वन रिदम  आयोजित किया गया जिस में  केंद्र के मोहाली परिसर में "गुरु शिष्य परम्परा" के अंतर्गत  संगीत एवं नृत्य का गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे देशी एवं विदेशी छात्रों द्वारा पेश किया गया।    इस कार्यक्रम में   इन विदेशी छात्रों द्वारा अपने अपने देश की नृत्य एवं संगीत कला का बखूबी प्रदर्शन किया गया।  अपने देश की पारम्परिक वेशभूषा में सजे इन छात्रों ने अपनी देश की कला और संगीत की सुन्दर झलकियां पेश की।  कज़ाकिस्तान , मिश्र , मैक्सिको , फिजी , स्पेन , ज़िम्बावे , उज्बेकिस्तान , तंज़ानिया , फ्रांस   और बांग्लादेश से आये इन छात्रों ने अपने देश की कला और संस्कृति का परिचय दिया ।  इस कार्यक्रम में तबला शिक्षक एवं जाने माने तबला वादक श्री आविर्भाव वर्मा के निर्देशन  में  इस संगीतमयी संध्या को विभिन्न देशों की खूबसूरत कलाओं से संजोया गया।  

सबसे पहले गोंग पेश किया गया और  गिलास और चम्मच के टकराने से उत्पन्न हुई ध्वनि से  कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।  इसके उपरांत डेनियल, साहिल  और वैलेंटिना द्वारा गिटार वादन पेश किया गया जिस में उनका साथ  नुरू ने गाना गाकर दिया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।   इसके बाद  उपरोक्त देशों के छात्रों द्वारा अपने अपने देश के गाने और नृत्य का बखूबी प्रदर्शन किया गया जिस में विभिन्न अद्वितीय प्रस्तुतियों से दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए।  इसके उपरांत तबला वादन पेश  गया जिस में सब छात्रों ने  भाग लिया।   

कार्यक्रम के अगले भाग में कव्वाली पेश की गयी जिस में  सब विदेशी छात्रों ने सूफी संगीत पर नृत्य करके तालियां बटोरी।  इसके उपरांत नेपाल के संमुद्र ने आलाप पेश किया   तथा इजीपट से आयी रेवन ने पंजाबी संगीत पर पंजाब का दमदार भंगड़ा पेश किया जिस पर न केवल दर्शक झूम उठे बल्कि पूरा आनद भी उठाया।  

कार्यक्रम के अंत में  सभी देशी विदेशी  वाद्यों की अनूठी जुगलबंदी ोपेश की गयी जो दर्शकों के दिल को छू गयी।  इन वाद्यों में तबला , गोंग , कांगो , चिमटा, ढोल , ढोलक , डीजम्बे  , कहोंन , वुड शेकर, एग शेकर  , जेम्बे इत्यादि वाद्यों का प्रदर्शन  एक साथ किया गया।  ऐसी प्रस्तुतियों देशों की सीमाओं को तोड़ कर संगीत की  मिठास से हर सीमा को लांघते हुए  विभिन्न देशों को साथ जोड़ने का एक विनम्र प्रयत्न है।  

प्राचीन कला केंद्र द्वारा  देश की प्राचीन गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत  भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य  का प्रचार, प्रसार एवं विस्तार किया जा रहा  है जो एक सराहनीय कदम है।

Monday, November 10, 2025

पं.आशिम चौधरी और उनके साथ तबले पर पं. तबले पर देबाशीष अधिकारी

Emailed By PKK on Monday 10 th November 2025 at  5:57 PM Regarding Sitar Vadan Event सितार वादन

प्राचीन कला केंद्र द्वारा 313वां मासिक बैठक कार्यक्रम 11 को

चंडीगढ़: 10 नवंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

पंडित असीम चौधरी के नाम का उच्चारण अगर अंग्रेज़ी में करें तो उच्चारण होता है Pt. Ashim Choudhary वाले स्पेलिंग के साथ। इस लिए कई बार  लोग अशीम भी कहते हैं। वैसे भी जब पता करो तो इस नाम के कई व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन इस खोज ले दौरान जल्दी ही सपष्ट हो जाता कि सितार वादन की धुनों से संगीत लहरियां छेड़ देने वाला असीम चौधरी कौन है! सितार की तारों पर स्वर लहरियों का जादू उस समय खूब बोलता है जब असीस साहिब की उंगलियां सितार पर दौड़ रही हों। पं.आशिम चौधरी और उनके साथ तबले पर पं. तबले पर देबाशीष अधिकारी

वास्तव में प्रख्यात सितार वादक पंडित असीम चौधरी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात सितार वादक हैं। जिन्होंने उन्हें मंच पर देखा सुना वे इस बात से भलिभांत अवगत हैं कि वह सितार के जादूगर ही हैं। रेडियो से उनके राब्ते ने उनके इस जादू को और महान बनाया। उनकी कला में निखार का एक कारण रेडियो भी रहा। रेडियो कलाकारों को जितने भी सुअवसर देता है तो उनमें से हर सुअवसर कलाकार की कला को और भी निखारता चला जाता है।  है। शायद रेडियो का माहौल ही ऐसा होता है। अपने केंद्र से घर घर तक पहुँचता हुआ कार्यक्र ,जीवंत भी हो तो भी। समाचार भी और गीत संगीत भी। 

उसी रेडियो में असीस साहिब आकाशवाणी अर्थात All India Radio के शीर्ष ग्रेड कलाकार हैं। वह भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) से भी जुड़े हुए हैं। यह संगठन कला की दुनिया का एक बहुत महान संगठन है। सस्ब्स्कृतिक केंद्र। 

गौरतलब है कि पंडित असीम चौधरी आचार्य पंडित बिमलेंदु मुखर्जी के शिष्य हैं और गांधार पंचम शैली में वादन करते हैं। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगीत समारोहों में प्रदर्शन किया है और कई वेबिनारों तथन अन्य आयोजनों में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया है। उनके सुनने वाले उनके सितार वादन पर मंत्र मुग्ध हो जाते हैं।हैं।  वह एक जादू सा बांध देते हैं। 

चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले कला प्रेमियों और संगीत प्रेमियों के लिए यह एक प्रसन्नता का सुअवसर है कि वह 11 नवंबर 2025 को चंडीगढ़ के प्राचीन कला केंद्र में होंगें। आयोजन के विवरण का विवरण इसी पोस्ट में दिए गए निमंत्रण पत्र में भी आप देख सकते हैं। वैसे यह यादगारी आयोजन शाम 06:30 बजे शुरू हो जाएगा। यह संगीत आयोजन चंडीगढ़ के सेक्टर-35/बी में स्थित प्राचीन कला केंद्र परिसर के एमएल कोसर ऑडिटोरियम में होगा। कलाकारों में सितार वादन पर होंगें पं.आशिम चौधरी और उनके साथ तबले पर पं. तबले पर देबाशीष अधिकारी संगत करेंगे। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम भी बहुत ही यादगारी रहेगा। 

सितार और तबले का जादू आमने सामने बैठ कर देखना न भूलें। 


Friday, May 23, 2025

संगीतक आयोजन: जिसमें में 5 से 60 वर्ष तक के छात्रों ने भाग लिया

From Pracheen Kala Kendra on Friday 23rd May 2025 at 4:52 PM

प्राचीन कला केन्द्र के छात्रों द्वारा शास्त्रीय संगीत की मधुर प्रस्तुतियां


चंडीगढ़
: 23 मई 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह/ /मीडिया लिंक32/ /संगीत स्क्रीन डेस्क)::

जो जो संगठन चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में गीत संगीत के क्षेत्रों की नींव मज़बूत बना रहे हैं उनमें प्राचीन कलाकेंद्र भी एक है। इस प्राचीन कलाकेंद्र में दशकों से इस शिक्षा को बहुत ही अदब के साथ नई  पीढ़ी तक पहुँचाया जा रहा है। हर वर्ग से जुड़े संगीत प्रेमियों को गीत संगीत और डांस में जहां सिखलाई दी जाती है। इसका सबूत एक बार फिर आज मिला जब आज के आयोजन में पांच वर्ष की उम्र से लेकर ६० वर्ष तक की उम्र के संगीत साधक मंच पर आए। 

प्राचीन कला केन्द्र की विशेष संगीतक संध्या में परंपरा श्रृंखला के तहत सैक्टर 35 स्थित एम.एल.कौसर सभागार में केंद्र के छात्रों द्वारा शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां पेश की गई । केंद्र में कार्यरत सधी हुई संगीत शिक्षिक श्री  सुरजीत कुमार एवं अमनदीप गुप्ता   के निर्देशन में छात्रों ने अपनी कला का बखूबी प्रदर्शन करके खूब तालियां बटोरी। इसमें 5 से 60 वर्ष तक के छात्रों ने भाग लिया। विभिन्न  प्रस्तुतियों से सजे इस कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से की गई ।उपरांत  कलाकारों द्वारा जपुजी साहिब पर आधारित एक रचना "ऐ मेरे मन" पेश की गयी तथा राग खमाज तथा बिहग पर आधारित सुन्दर बंदिशें प्रस्तुत की गयीं।  इसके बाद कलाकारों ने सरगम गीत तथा गीतमाला पेश की जिसे दर्शकों ने खूब सराहा । इसके बाद  किशोरावस्था के बच्चों द्वारा  लोकप्रिय  भजन वैषणव जान , अच्युतम केशवम , , प्रभु आपकी कृपा से मेरा सब काम हो रहा है , शिव कैलाशों के वासी , औ पालनहारे तथा राम स्तुति पेश की गयी जिस से दर्शक भक्ति रंग में रंग  गए।  

इसके उपरांत एकल तबला वादन पेश किया गया जोकि तीन ताल पर आधारित था।   कार्यक्रम के अंतिम भाग में ग़ज़लें पेश की गयीं।  खूबसूरत ग़ज़लों के रंग में रंगी शाम से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। डाॅ.समीरा  कौसर ने छात्रों एवं गुरू की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये युवा कलाकार देश की संस्कृति की धरोहर को प्रफुल्लित करने का काम बखूबी कर रहे हैं। प्राचीन कला केंद्र द्वारा उभरती प्रतिभाओं को मंच देने के साथ साथ युवा छात्रों को संगीतक  अभ्यास और रियाज़ में  सधे  हुए गुरुओं के सानिध्य में  प्रफुल्लित करके कला एवं संगीत की अमूल्य सेवा कर रहा है। इससे संगीत की दुनिया और अधिक विशाल एवं सुंदर होती जा रही है। 

कुल मिलाकर आज का यह आयोजन भी बहुत यादगारी रहा। इस अवसर पर श , िल हुए श्रोताओं और दर्शकों ने इस से जुडी यादों को अपने दिल दिमाग में संजोया। 

Saturday, May 17, 2025

प्रियंका ठाकुर की प्रभावशाली एवं मधुर शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति

From Pracheen Kala Kendra on Saturday 17th May 2025 at 7:15 PM

307वीं मासिक बैठक में प्रस्तुति से फिर जगा गीत संगीत का जादू


चंडीगढ़: 17 मई 2025: (मीडिया लिंक//संगीत स्क्रीन डेस्क)::
चंडीगढ़ को लेकर अक्सर कहा जाता रहा कि यह तो पत्थरों का शहर है। इस धारणा को जो लोग लगातार गलत साबित करते आ रहे हैं उनमें प्राचीन कला केंद्र भी शामिल है। यह संस्थान इन्हीं पत्थरों में गीत संगीत के जादू का अहसास करवाता आ रहा है। हर बार नए पुराने कलाकारों से रूबरू करवाना और संगीत लहरियों से पूरे माहौल को संगीत मई बना देना इसी संस्थान की टीम का काम रहा।

प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित 307वीं मासिक बैठक कार्यक्रम का आयोजन शनिवार, 17 मई 2025 को एम. एल. कोसर इंडोर ऑडिटोरियम, सेक्टर 35-बी, चंडीगढ़ में किया गया। इस अवसर पर युवा एवं प्रतिभाशाली गायिका सुश्री प्रियंका ठाकुर ने शास्त्रीय गायन की एक मनोहारी प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम की शुरुआत राग मालकौंस  से हुई, जिसमें उन्होंने विलंबित ख्याल "पीर ना जाने बालम" प्रस्तुत किया। भावपूर्ण गायन शैली से उन्होंने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात, उन्होंने तीन ताल में द्रुत ख्याल "बालम नहीं आए" सुनाया, जिसने कार्यक्रम की गति और भी तीव्र कर दी। अपनी प्रस्तुति को और ऊर्जावान बनाते हुए, प्रियंका ठाकुर ने अति द्रुत में टप्प ख्याल "हर हर महादेव पति" प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

शास्त्रीय प्रस्तुति के उपरांत, उन्होंने हिमाचली लोकगीत "कुंजू चंचलो" की मधुर प्रस्तुति दी, जो श्रोताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय रही और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराही गई।

गायिका का साथ दिया श्री दिव्यांश ठाकुर (तबला) एवं श्री पियूष मिश्रा (हारमोनियम) ने, जिनकी संगति ने पूरी प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाया।

कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही, और सभी ने इस शाम को संगीत से सजी एक अविस्मरणीय अनुभूति बताया।

डॉ. शोभा कोसर (रजिस्ट्रार) व श्री सजल कोसर (सचिव) ने सभी संगीतप्रेमियों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए श्री विनोद चन्ना (शिमला) , श्री गुंजन चन्ना, पं. देवेंद्र वर्मा डॉ  जगमोहन शर्मा ,   डॉ. हरमोहन शर्मा, श्री सौरभ आदि विशेष रूप से मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को सम्मानित भी किया गया। कुल मिलाकर यह भी एक याधारी कार्यक्रम रहा। इस ने चंडीगढ़ के संगीत भरे माहौल को एयर भी अमीर बनाया। 

Sunday, August 11, 2024

प्राचीन कला केन्द्र की 298वीं मासिक बैठक भी जगाती रही संगीत का जादू

Sunday 11th August 2024 at 4:41 PM

संगीत की स्वर लहरियों ने एक बार फिर दिखाए संगीत के कमाल 


चंडीगढ़
: 11 अगस्त 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में संगीत के जादू को बरकरार रखने वाली संस्थाओं में सबसे अग्रणी संस्था है प्राचीन कला केंद्र। इस संस्थान ने अब तक संगीत के अनगिनत साधकों को सफलता की उंचाईयों तक पहुंचाया है। संगीत और नृत्य साधना के क्षेत्र में यह संस्थान लगातार सक्रिय रहता है। 

इसी सिलसिले में इस अग्रणी सांस्कृतिक संस्था प्राचीन कला केन्द्र द्वारा 298वीं मासिक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें राजस्थान के प्रतिभाशाली तबला वादक गौतम पाल ने एकल तबला वादक की प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। गौतम पाल ने न केवल फरुखाबाद घराने के तबला वादन की शिक्षा प्राप्त की अपितु पंजाब घराने के पंडित सुशिल जैन के गंडा बांध शिष्यत्व में भी अपनी कला को निखारा। विभिन्न प्रस्तुतियों द्वारा अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके गौतम पाल ऑल इंडिया रेडियो के बी ग्रेड कलाकार है।

एक नया इतिहास रचने वाले आज के कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति शिमला के गुंजन चन्ना द्वारा पेश की गयी। गुंजन को हाल ही में  दूरदर्शन  के ऐ ग्रेड से सम्मानित किया गया है।  गुंजन चन्ना ने अल्पायु में माता पिता से सीखने के बाद पटियाला के डॉ  जगमोहन शर्मा के शिष्यत्व में संगीत की बारीकियां सीखी। गुंजन संगीत की दुनिया का उभरता कलाकार है।

संगीत के क्षेत्र में यादगारी अध्याय जोड़ने वाले आज के इस कार्यक्रम की शुरुआत श्री गौतम पाल  के तबला वादन से हुई जिस में उन्होंने ने  तीन ताल में पेशकार रेले,कायदे,पलटे,पारम्परिक उठान बहुत खूबसूरती से पेश किए। इसके उपरांत इन्होंने फरुखाबाद घराने की कुछ प्राचीन गतें,रेले इत्यादि पेश करके खूब तालियां बटोरी। इसके उपरांत फरमाइशी एवं कमाली चक्रदार , टुकड़े , रेल एवं तिहाई का सधा हुई प्रदर्शन किया।  इनके साथ युवा एवं प्रतिभावान हारमोनियम वादक गुरप्रीत सिंह मोगा ने खूबसूरत संगत करके खूब समां बांधा।  

कार्यक्रम के दूसरे भाग में युवा एवं प्रतिभाशाली गुंजन चन्ना ने मंच संभाला और राग बिहाग से कार्यक्रम की शुरुआत की। आलाप के पश्चात विलम्बित ख्याल  में एक रचना "कैसे सुख सोये " पेश की  इसके उपरांत मध्य लाया  तीन ताल  में  दो रचनाएँ बालम रे  एवं बजे रे मोरी पायल प्रस्तुत करके खूब तालिया बटोरी। द्रुत ख्याल की बंदिश बनी बनी ठनी ठनी  भी दर्शकों का मन मोह गयी।  कार्यक्रम के अंत में गुंजन ने हिमाचली फोक माये नई मेरिये  प्रस्तुत करके रंग जमाया।  इनके साथ तबले पर श्री राजेश ब्रह्मभट्ट और हारमोनियम पर श्री मदन कश्यप ने बखूबी  संगत की। 

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र की रजिस्ट्रार डॉ.शोभा  कौसर,सचिव श्री सजल कौसर और तबला गुरू पंडित सुशील जैन  तथा डॉ जगमोहन शर्मा ने  कलाकारों को उतरिया  और मोमेंटो देकर सम्मानित किया।

Saturday, July 20, 2024

संतूर की मधुर स्वर लहरियों से सजी केन्द्र की 297वीं मासिक बैठक

 Saturday 20th July 2024 at 6:25 PM

संतूर वादक डॉ बिपुल कुमार रॉय  ने जगाया जादू 


चंडीगढ़: 20 जुलाई 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क):: 

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा हर माह आयोजित होने वाली मासिक बैठकों की श्रृंखला में आज यहां इसी की 297वीं कड़ी में मधुर एवं सधे हुए  संतूर वादन की प्रस्तुति पेश की गई । दिल्ली से आए युवा एवं प्रतिभाशाली संतूर वादक डॉ बिपुल कुमार रॉय  ने अपने प्रभावशाली  संतूर  वादन से दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की ।इनके साथ तबले पर जाने माने तबला वादक उस्ताद अकरम खान ने बखूबी साथ दिया।

इस कार्यक्रम का आयोजन हमेशा की भांति केन्द्र के एम.एल.कौसर सभागार में साय 6 :30 बजे से किया गया । इस अवसर पर चण्डीगढ़़ के कुछ जानेमाने कलाकारों ने अपनी उपस्थिति से चार चांद लगा दिए ।  बिपुल एक ऐसे युवा संतूर वादक हैं जिन्होंने  बहुत काम समय में  संगीत की दुनिय में अपना स्थान बनाया है।

इन्होने संतूर वादन की शिक्षा सूफियाना घराने के प्रसिद्द संतूर वादक पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी से प्राप्त की है।  इन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय से गायन में एमफिल  तथा पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।  बिपुल आकाशवाणी के ऐ ग्रेड कलाकार हैं और भारतीय संस्कृति मंत्रालय में उत्कृष्ट श्रेणी के कलाकार हैं।  रागों की शुद्धता , छंदों का मधुर प्रयोग और आकर्षक लयकारी इनके तंत्र वादन की विशेषता है।  इनको संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए बहुत से पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।  

कार्यक्रम की शुरुआत के लिए बिपुल  ने राग रागेश्री में आलाप से की।  तंत्रकारी अंग में सजी  विलम्बित ताल में आलाप के उपरांत झप ताल  मध्य लय में जोड़ पेश किया तथा द्रुत तीन ताल से सजा झाला पेश करके खूब तालिया बटोरी।   तंत्रकारी अंग में महारथ रखने वाले बिपुल  ने  लयकारियों से दर्शकों वाहवाही बटोरी। 

कार्यक्रम का समापन इन्होंने एक मधुर पहाड़ी धुन से किया जिसका दर्शकों के खूब आनंद उठाया । तबले पर उस्ताद अकरम खान के हमेशा की तरह  बखूबी रंग जमाया। एक ऐसा रंग जो सभी को याद रहने वाला  है। लोग समापन के बाद भी झूमते नज़र आए। 

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर ने कलाकारों को उतरीया एव मोमेंटो देकर सम्मानित किया । इस अवसर पर केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ शोभा कौसर भी उपस्थित थे जिनकी मौजूदगी हर बार नए कलाकारों को एक नाज़ा उत्साह देती है।  

Sunday, February 4, 2024

फिल्म "आदमी" के गीत आज भी जादू भरा असर रखते हैं

फ़िल्में,ब्रह्मण्ड, हकीकतें और ज़िन्दगी 

फिल्मों की दुनिया: 04 फरवरी 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह-मीडिया लिंक//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

असली ज़िन्दगी में फिल्मों का सच भी अक्सर बहुत बड़ा ही रहा बेशक उसे किसी ने स्वीकार किया हो या न किया हो। कहने को जो भी कह लिया जाए लेकिन फिल्मों की हर कहानी का आधार किसी न किसी ज़िन्दगी की कोई न कोई असली घटना ही बनती रही। बस नाम और पात्र बदल जाते थे। जगहों और स्थानों के नाम बदल दिए जाते थे लेकिन दर्द वही रहता था। संवेदना वही रहती थी। गीत-संगीत और कला की तकनीक से उसकी धार को तीखा ज़रूर कर दिया जाता था। इस तरह बहुत सी गहरी बातें आम लोगों के दिल में भी उतरने लगतीं। उनकी उलझी हुई बातें भी लोगों की समझ में आने लगतीं। 

वर्ष  1968 में एक फिल्म आई थी आदमी। इसका निर्देशन ए॰ भीमसिंह ने किया है और इसमें दिलीप कुमार, वहीदा रहमान, मनोज कुमार, सिमी गरेवाल और प्राण हैं। यह फ़िल्म 1962 की एक तमिल फ़िल्म की रीमेक है। तमिल फिल्म का नाम था- आलयमानि (Aalayamani)  

इस फिल्म के लेखक थे अख्तर उल ईमान, कौशल भारती, रामा राव, और शमन्ना।  निर्माता थे पी एस  वीरप्पा। फिल्म ज़िंदगी और दुनिज़ा की उसी पुरानी कहानी पर आधारित थी जिसमें गरीबी भी होती है, संघर्ष भी होता है, इश्क और प्रेम का दौर भी आता है और हादसे भी होते हैं। इनके साथ ही एक बार ऐसा वक़्त भी आता है जब लगता है सब कुछ तबाह हो गया। इस तबाही के साथ ही बड़ा झटका तब लगता है जब अपना प्रेम भी साथ छोड़ जाता है। जिनको इंसान अपनी दुनिया समझता वही धोखा दे जाते हैं। बेवफाई की एक नई कहानी सामने आती है। इसके गीत लिखे थे जनाब शकील बदायुनी साहिब ने और जादूभरा संगीत था जनाब नौशाद साहिब का। 

इस फिल्म के दिल को छूते हुए सभी गीत बहुत हिट भी हुए थे। इस फिल्म में छह गीत थे और सभी एक से बढ़ कर कर एक थे। एक गीत था-कल के सपने आज भी आना इसे सुरों की मलिका लता मंगेशकर ने गाया था। करीब पौने चार मिनट (3:41) का गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था। एक और गीत था--आज पुरानी राहों से--इसे आवाज़ दी थी मोहम्मद रफ़ी साहिब ने। यह गीत पांच मिंट से भी बड़ा था-(5:10) अवधि का गीत लेकिन यह श्रोता को भी और दर्शक को भी बांधे रखता है। इसी तरह (4:38) अवधि का एक और गीत तरह था इसी फिल्म में जिसके बोल थे-मैं टूटी हुई एक नैया हूँ इसे भी मोहम्म्द रफ़ी  साहिब ने ही यादगारी आवाज़ दी थी। फिल्म के केंद्रीय बिंदु इंसान के साथ होने वाले धोखे और फरेब की बात थी। धोखे और फरेब की बात करता हुआ एक और बहुत ही लोकप्रिय गीत था--ना आदमी का कोई भरोसा रफ़ी साहिब की आवाज़ में ही था और इसकी अवधि थी-(3:52) उन दिनों जब यह फिल्म रिलीज़ हुई तो इसके गीत गली गली और घर घर में सुने जाते थे। यह गीत भी उन दिनों बहुत हिट हुआ। एक गीत और था लता मंगेशकर-कारी बदरिया मारे लहरिया इसकी अवधि थी (4:25) इस गीत ने भी अपना जादू दिखाया था उस दौर में। 

इसी फिल्म का एक और गीत लोकप्रियता की बुलंदी को छू गया था उन दिनों। तीन आवाज़ों ने इस गीत में जादू जगाया और वह भी कमाल का। रफ़ी साहिब का अपना अंदाज़ रहा, महेंद्र कपुर साहिब का अपना और तलत महमूद साहिब का अपना अंदाज़ रहा। हर अंदाज़ कमाल का था। गीत के बोल हैं- 

कैसी हसीन आज बहारों की रात है-एक चाँद आसमां पे है एक मेरे साथ है..

मन की कल्पना में जब दो चांद उभरते हैं तो कमाल का दृश्य बनता है। एक चांद ज़मीन पर और दूसरा आसमान पर। ब्रह्मण्ड में यदि ऐसा हो जाए तो कैसा रहेगा भला? वैसे जब दो चांद नज़र आने की संभावना बनती है तो उसका ज्योतिषीय और खगोलीय अर्थ भी बनता है जिसकी चर्चा आप आराधना टाईम्ज़ में पढ़ सकते हैं।