PKK on Sunday 11th October 2026 at 5:15 PM Regarding 324th Monthly baithak programe
श्री चेतन कुमार जवड़ा ने प्रस्तुत किया मनमोहक कथक नृत्य
चंडीगढ़: 11 अक्टूबर 2026:>>के के सिंह>>संगीत स्क्रीन डेस्क>>
प्राचीन कला केंद्र द्वारा आयोजित 324वीं मासिक बैठक में प्रख्यात कथक गुरु एवं नर्तक श्री चेतन कुमार जवड़ा ने जयपुर घराने की समृद्ध शास्त्रीय नृत्य परंपरा पर आधारित मनमोहक कथक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का आयोजन सेक्टर 35-बी, चंडीगढ़ स्थित गुरु एम.एल. कौसर ऑडिटोरियम में सायं 6:30 बजे किया गया।
पाँचवीं पीढ़ी के कथक कलाकार श्री चेतन कुमार जवड़ा प्रसिद्ध कथक गुरु पंडित राजकुमार जवड़ा के पुत्र एवं शिष्य तथा विख्यात नृत्याचार्य स्वर्गीय पंडित कन्हैयालाल जवड़ा के पौत्र-शिष्य हैं। उन्होंने 250 वर्षों से अधिक पुरानी अपनी समृद्ध पारिवारिक सांगीतिक परंपरा को अपनी प्रस्तुति के माध्यम से आगे बढ़ाया। वे वर्तमान में जयपुर कथक केंद्र में नृत्य गुरु के रूप में कार्यरत हैं।
प्रस्तुति का शुभारंभ भगवान शिव की स्तुति ‘हे अमरनाथ, हे विश्वनाथ’ से हुआ, जिसमें नटराज शिव की आराधना के माध्यम से मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात कलाकार ने राग बसंत पर आधारित नौ मात्राओं वाली ताल बसंत में शास्त्रीय कथक प्रस्तुति दी। इसमें जयपुर घराने की विशिष्ट लयकारी, सशक्त पद-संचालन और भावाभिव्यक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
कार्यक्रम का एक विशेष आकर्षण उनके दादागुरु पंडित कन्हैयालाल जवड़ा द्वारा रचित एवं स्वरबद्ध भावपूर्ण ठुमरी रही। इस प्रस्तुति के माध्यम से श्री चेतन कुमार जवड़ा ने अपनी पारिवारिक गुरु-परंपरा और सांगीतिक विरासत को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रस्तुति का समापन द्रुत तीनताल में हुआ, जिसमें तीव्र गति के तत्कार, जटिल परन, आकर्षक तिहाइयों और प्रभावशाली चक्करों के माध्यम से कलाकार ने जयपुर घराने की ऊर्जावान एवं तकनीकी रूप से समृद्ध नृत्य शैली का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर श्री साँवरमल कथक ने स्वर एवं हारमोनियम पर, श्री भवदीप जवड़ा ने पखावज एवं पढ़ंत पर, जनाब मुज्जफर रहमान ने तबले पर तथा श्री उत्कर्ष सोनी ने बाँसुरी पर संगत की। संगत कलाकारों ने अपनी उत्कृष्ट संगीत प्रस्तुति से नृत्य की लय, भाव और शास्त्रीय सौंदर्य को और अधिक प्रभावशाली बनाया।
प्राचीन कला केंद्र की मासिक बैठक श्रृंखला भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य की समृद्ध परंपराओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर मंच प्रदान करती रही है। 324वीं मासिक बैठक भी जयपुर घराने की विशिष्टता, लयकारी और भाव-सौंदर्य को प्रस्तुत करते हुए शास्त्रीय नृत्य की उत्कृष्ट परंपरा का स्मरणीय अवसर बनी।
इस अवसर पर बरेली से पधारीं प्रो. संध्या रानी ने प्राचीन कला केंद्र द्वारा आयोजित सेमिनार से संबंधित जर्नल का विमोचन किया। कार्यक्रम के समापन पर उन्होंने सभी कलाकारों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया तथा उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुतियों की सराहना की।
यह आयोजन भी बहुत यादगारी रहा। इस अवसर पर प्राचीन कला केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर, सचिव श्री सजल कौसर तथा केंद्र के दिल्ली क्षेत्रीय कार्यालय से डॉ. देवेंद्र वर्मा, उप-रजिस्ट्रार (शैक्षणिक) भी उपस्थित रहे। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा और महत्त्व को और बढ़ाया।





