Thursday 29th January 2026 at 4:49 PM Regarding Dance Evening at Tagore Theater Chandigarh
इस विशेष नृत्य संध्या में 30 छात्रों ने भी भाग लिया
चंडीगढ़: 29 जनवरी 2026: (संगीत स्क्रीन डेस्क)::
कन्हैया लाल नृत्य कला संगम द्वारा आज यहाँ एक विशेष नृत्य संध्या का आयोजन किया गया । इस विशेष संध्या की 17वी कड़ी को कत्थक के जाने माने गुरु कन्हैया लाल जी की मधुर समृति में आयोजित किया गया। जिसमें प्राचीन कला केन्द्र के छात्रों एवं गुरू शिष्य परम्परा के अन्तर्गत सीख रहे छात्रों द्वारा कत्थक नृत्य की खूबसूरत प्रस्तुतियां पेश की गई । इस कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु गुरु योगेश शर्मा के सधे हुए नेतृत्व में छात्रों ने खूबसूरत नृत्य प्रस्तुतियां पेश करके समां बांधा । इस नृत्य संध्या का आयोजन टैगोर थिएटर में सायं 6:00 बजे से किया गया । जिसमें लगभग 30 छात्रों ने भाग लिया और अपनी नृत्य प्रतिभा से दर्शकों की खूब तालियां बटोरी ।
सबसे पहले पारम्परिक द्वीप प्रज्वलन किया गया जिस में प्राचीन कला केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर तथा गुरु माँ कमला देवी जी द्वारा कार्यक्रम से पहले द्वीप प्रज्वलन की रस्म निभाई गयी। इसके पश्चात गुरु कन्हैया लाल नृत्य कला संगम के कलाकारों द्वारा गणेश वंदना पेश की गयी और इसके उपरांत कत्थक नृत्य के रंग से सजी शिव स्तुति पेश करके कलाकारों ने बखूबी समां बांधा । इसके उपरांत उन्नति शर्मा (जोकि गुरु कनहैया लाल की पौत्री हैं) , द्वारा बेहतरीन एकल कत्थक नृत्य विष्णु वंदना पेश किया गया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। इसके उपरांत डॉ. समीरा कौसर द्वारा कथक नृत्य की प्रस्तुति पेश की गयी । दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकार समीरा को बचपन से ही नृत्य में गहरी रूचि और समझ थी। उन्होंने जयपुर घराने के प्रमुख गुरु कन्हैया लाल से इस शास्त्रीय नृत्य सीखने की शुरुआत की । कला के प्रति समीरा की अटूट निष्ठा और समर्पण को एक नया जीवन तब मिला जब कथक गुरु डॉ शोभा कोसर ने उन्हें भरपूर सहयोग और मार्गदर्शन दिया। गुरु शोभा कोसर द्वारा दिए गए विशेष प्रशिक्षण ने समीरा को एक निपुण नर्तकी के रूप में ढाला। उन्हें जयपुर घराने के कथक की बारीकियों से परिचित कराया । उन्होंने गुरु बृज मोहन गंगानी से भी नृत्य की बारीकियां सीखी और अपने कला कौशल को निखारा। समीरा कौसर ने आध्यात्मिक प्रस्तुति गणेश स्तुति, के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की और उसके बाद पारंपरिक कथक नृत्य की प्रस्तुति दी और साथ ही विरही नायिका के बेहतरीन भावों द्वारा प्रस्तुत किया । नृत्य नाटिका काया स्वरूपा उनकी अगली प्रस्तुति थी, जिसमें उन्होंने कथक के अभिनय पहलू पर अपनी पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया । नृत्य में भावों को प्रस्तुत करने की अपनी अनोखी शैली से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य नाटिका में समीरा ने अपने नृत्य के माध्यम से मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को चित्रित करने की कोशिश की, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। गुरु बृजमोहन गंगानी ने पढंत पर, महमूद खान ने तबले पर , सलीम कुमार ने सितार पर और रमेश परिहार ने गायन में बखूबी संगत करके कार्यक्रम को चार चाँद लगा दिए ।
इसके उपरांत कत्थक की पितामह कही जाने वाली वरिष्ठ कत्थक गुरु डॉ शोभा कौसर द्वारा भाव अंग पर आधारित एक खूबसूरत ठुमरी पर कत्थक नृत्य के बैठिकी भाव अंग की सुंदर प्रस्तुति पेश करके दर्शकों की खूब तालियां बटोरी । गुरु शोभा कौसर कत्थक नृत्य के जयपुर घराने की प्रथम श्रेणी की गुरु मानी जाती हैं जिन्होंने कत्थक के जयपुर घराने को पंजाब जैसे क्षेत्र में प्रफुल्लित करने का श्रेय भी प्राप्त है। इन्होने भी गुरु कन्हैया लाल से नृत्य की बारीकियां सीखी।
कार्यक्रम का समापन एक विशेष नृत्य नाटिका कृष्ण चरितं से किया गया जिसमें लगभग 30 कलाकारों ने भाग लिया और भगवान कृष्ण के खूबसूरत लीलाओं का नृत्य के माध्यम से प्रदर्शन किया इन सभी छात्रों के नृत्य में रियाज और गुरू द्वारा दी गई शिक्षा का बेहतरीन पक्ष देखने को मिला । कत्थक नृत्य का सुंदर प्रदर्शन करके इन सभी छात्रों ने दर्शकों का मन मोह लिया। इनके साथ तबले पर अक्षय शर्मा एवं भास्कर , गायन पर उन्नति शर्मा , पडंत पर गुरु योगेश शर्मा , सारंगी पर राजेश कुमार , बांसुरी पर मोहित एवं काश पर अंश ने बखूबी संगत की
केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर ने सभी कलाकारों का प्रशंसा भरे शब्दों से उत्साहवर्धन किया । कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को अंग वस्त्र देकर सम्मानित किया गया








