Thursday, January 29, 2026

गुरु कन्हैया लाल नृत्य कला संगम द्वारा एक शानदार नृत्य संध्या का आयोजन

Thursday 29th January 2026 at 4:49 PM Regarding Dance Evening at Tagore Theater Chandigarh

इस विशेष नृत्य संध्या में 30 छात्रों ने भी भाग लिया


चंडीगढ़
: 29 जनवरी 2026: (संगीत स्क्रीन डेस्क)::

कन्हैया लाल नृत्य कला संगम   द्वारा  आज यहाँ एक विशेष नृत्य संध्या का आयोजन किया गया । इस विशेष संध्या की 17वी कड़ी को  कत्थक के जाने माने गुरु कन्हैया लाल जी की मधुर समृति  में आयोजित किया गया।  जिसमें प्राचीन कला केन्द्र के छात्रों एवं गुरू शिष्य परम्परा के अन्तर्गत सीख रहे छात्रों द्वारा  कत्थक नृत्य की खूबसूरत प्रस्तुतियां पेश की गई । इस कार्यक्रम के सफल आयोजन हेतु गुरु  योगेश शर्मा  के सधे हुए नेतृत्व में छात्रों ने खूबसूरत नृत्य प्रस्तुतियां पेश करके समां बांधा  । इस नृत्य संध्या का आयोजन टैगोर थिएटर में सायं 6:00  बजे से किया गया । जिसमें लगभग 30 छात्रों ने भाग लिया और अपनी नृत्य प्रतिभा से दर्शकों की खूब तालियां बटोरी ।  

सबसे पहले पारम्परिक द्वीप प्रज्वलन किया गया जिस में प्राचीन कला केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर तथा गुरु माँ कमला देवी जी द्वारा  कार्यक्रम से पहले द्वीप प्रज्वलन की रस्म निभाई गयी।  इसके पश्चात  गुरु कन्हैया लाल नृत्य कला संगम  के कलाकारों द्वारा  गणेश वंदना पेश की गयी और इसके उपरांत   कत्थक नृत्य के रंग से सजी शिव स्तुति पेश करके कलाकारों ने बखूबी समां बांधा ।  इसके उपरांत उन्नति शर्मा (जोकि गुरु कनहैया लाल की पौत्री हैं)  ,  द्वारा  बेहतरीन एकल कत्थक नृत्य विष्णु वंदना  पेश किया गया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।  इसके उपरांत  डॉ. समीरा कौसर द्वारा कथक नृत्य की प्रस्तुति पेश की गयी । दूरदर्शन की टॉप ग्रेड कलाकार समीरा को बचपन से ही नृत्य  में गहरी रूचि और  समझ थी। उन्होंने जयपुर घराने के प्रमुख गुरु कन्हैया लाल से इस शास्त्रीय नृत्य सीखने की शुरुआत की । कला के प्रति समीरा की अटूट निष्ठा और समर्पण को एक नया जीवन तब मिला जब कथक  गुरु डॉ शोभा कोसर ने उन्हें भरपूर सहयोग और मार्गदर्शन दिया। गुरु शोभा कोसर द्वारा दिए गए विशेष प्रशिक्षण ने समीरा को एक निपुण नर्तकी के रूप में ढाला। उन्हें जयपुर घराने के कथक की बारीकियों से परिचित कराया । उन्होंने गुरु बृज मोहन गंगानी से भी  नृत्य की बारीकियां सीखी और अपने कला कौशल को निखारा। समीरा कौसर  ने आध्यात्मिक प्रस्तुति गणेश स्तुति, के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की और उसके बाद पारंपरिक कथक नृत्य की प्रस्तुति दी और साथ ही विरही नायिका के  बेहतरीन भावों द्वारा  प्रस्तुत किया । नृत्य नाटिका काया स्वरूपा उनकी अगली प्रस्तुति थी, जिसमें उन्होंने कथक के अभिनय पहलू पर अपनी पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया । नृत्य में भावों को प्रस्तुत करने की अपनी अनोखी शैली से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस नृत्य नाटिका में समीरा ने अपने नृत्य के माध्यम से मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को चित्रित करने की कोशिश की, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा। गुरु बृजमोहन गंगानी ने पढंत  पर, महमूद खान ने तबले पर , सलीम कुमार ने सितार पर और रमेश परिहार ने गायन में बखूबी संगत करके कार्यक्रम को चार चाँद लगा दिए ।

इसके उपरांत कत्थक की पितामह कही जाने वाली वरिष्ठ कत्थक गुरु डॉ शोभा कौसर द्वारा भाव अंग पर आधारित एक खूबसूरत ठुमरी पर  कत्थक नृत्य  के बैठिकी भाव अंग की सुंदर  प्रस्तुति पेश करके दर्शकों की खूब तालियां बटोरी ।  गुरु शोभा कौसर कत्थक नृत्य के जयपुर घराने की प्रथम श्रेणी की गुरु मानी जाती हैं जिन्होंने कत्थक के जयपुर घराने को पंजाब जैसे क्षेत्र में  प्रफुल्लित करने का श्रेय भी प्राप्त है।  इन्होने भी गुरु कन्हैया लाल से  नृत्य की बारीकियां सीखी।  

कार्यक्रम का समापन एक विशेष नृत्य नाटिका कृष्ण चरितं से किया गया जिसमें लगभग 30  कलाकारों ने भाग लिया और भगवान कृष्ण के खूबसूरत लीलाओं का नृत्य के माध्यम से प्रदर्शन किया   इन सभी छात्रों के नृत्य में रियाज और गुरू द्वारा दी गई शिक्षा का बेहतरीन पक्ष देखने को मिला । कत्थक नृत्य का सुंदर प्रदर्शन करके इन सभी छात्रों ने दर्शकों का मन मोह लिया।  इनके साथ तबले पर अक्षय शर्मा  एवं भास्कर , गायन पर उन्नति शर्मा , पडंत पर गुरु योगेश शर्मा , सारंगी पर राजेश कुमार , बांसुरी पर मोहित एवं काश पर अंश ने बखूबी संगत की  

केंद्र के सचिव श्री सजल  कौसर ने सभी कलाकारों  का प्रशंसा भरे शब्दों से उत्साहवर्धन किया । कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को अंग वस्त्र  देकर सम्मानित किया गया

Monday, January 19, 2026

जैस्मीन अख्तर लुधियाना में अपने कॉलेज पहुंचीं

MTSM College  on Tuesday 19th January 2026 at 2:38 PM Regarding Jasmeen Akhtar:Visit

प्रिंसिपल और स्टाफ ने मशहूर सिंगर का गर्मजोशी से स्वागत किया


लुधियाना
: 19 जनवरी 2026: (मीडिया लिंक32//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

मशहूर सिंगर और कॉलेज की पुरानी स्टूडेंट जैस्मीन अख्तर ने लुधियाना के मास्टर तारा सिंह मेमोरियल कॉलेज फॉर विमेन में शानदार तरीके से शिरकत की। कई साल पहले इसी कॉलेज में पढ़ते हुए उन्होंने शायद सोचा भी नहीं होगा कि एक दिन वह अपने ही कॉलेज में स्पेशल गेस्ट बनकर आएंगी। यह वही सिंगर हैं जो अपने कई हिट गानों की वजह से शोहरत की ऊंचाइयों पर पहुंची हैं।

मशहूर सिंगर और कॉलेज की पुरानी स्टूडेंट जैस्मीन अख्तर ने लुधियाना के पुराने और मशहूर एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन मास्टर तारा सिंह मेमोरियल कॉलेज फॉर विमेन, लुधियाना में हुए ग्रैंड फंक्शन में शिरकत की। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. किरणदीप कौर और बाकी स्टाफ ने इस पुरानी स्टूडेंट और अभी की स्पेशल गेस्ट का फूलों का गुलदस्ता देकर गर्मजोशी से स्वागत किया।

जैस्मिन ने कॉलेज के आंगन में काफी देर तक अपने गानों से स्टूडेंट्स को मंत्रमुग्ध किया और खूब मस्ती की। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. किरणदीप कौर, कॉलेज प्रेसिडेंट एस. स्वर्ण सिंह, सेक्रेटरी एस. गुरबचन सिंह पाहवा और दूसरे सदस्यों ने जैस्मिन को उनकी इस कामयाबी पर बधाई दी और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।

Thursday, December 25, 2025

नृत्य की विशेष संध्या में अमेरिका से आयी प्राची दीक्षित एवं समूह

Emailed on 24th December 2025 at 6:56 PM Regarding Kathak Dance Event at PKK

प्राचीन कला केंद्र में कत्थक नृत्य से सजी एक और शाम बनी यादगारी 


चंडीगढ़:24 दिसंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह/ /संगीत स्क्रीन डेस्क )::

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा आयोजित किये जा रहे विशेष कार्यक्रम में  अमरीका से आयी प्राची दीक्षित एवं समूह ने  अपने कत्थक नृत्य से दर्शकों को खूब आनंदित किया । पंडित कन्हैया लाल जी के  सानिध्य में प्राची ने नृत्य की शिक्षा प्राप्त  की और कत्थक नृत्य की बारीकियां सीखी । प्राची  अमेरिका में नूपुर डांस अकादमी की संस्थापक भी है और केंद्र का  सम्बद्ध  सेंटर भी चला रही हैं ।  इन्होंने विभिन्न प्रस्तुतियों से दर्शकों के दिल में जगह बनाई है । प्राची विदेश में भारतीय कला को प्रफुल्लित करने का अद्भुत कार्य कर रही हैं

आज के कार्यक्रम की शुरुआत इन्होने  एक भक्तिमयी रचना शिव वंदना से की।  इसके उपरांत  कृष्ण कविताओं  पर आधारित एक भाव पक्ष की रचना पेश की गयी  जोकि इनके गुरु द्वारा रचित कविताओं पर आधारित थी।  इसके उपरांत इनके समूह द्वारा कत्थक नृत्य के तकनीकी पक्ष को प्रस्तुत किया । जिस में तीन ताल पर आधारित विलम्बित, मध्य एवं द्रुत लाया पर आधारित  परन,गत,उठान,चालें,आमद,त्रिपल्ली,प्रमिलू,तिहाई और चक्रदार परन प्रस्तुत करके तकनीकी पक्ष पर अपनी मजबूत पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया । इसके उपरांत इन्होने भाव पक्ष पर आधारित एक खूबसूरत रचना पेश की कृष्णा एवं काली  जिस में दो दिव्य शक्तियों - कृष्ण और काली - के बीच एक कालातीत संवाद पेश किया गया।  कृष्ण माया का प्रतिनिधित्व करते हैं - दुनिया की सुंदरता और भ्रम जो हमें खुशी, प्रेम और आनंद के माध्यम से अपनी ओर खींचता है। उनकी बांसुरी आत्मा को मंत्रमुग्ध कर देती है, हमें याद दिलाती है कि अस्तित्व सार्थक और आकर्षक क्यों लगता है। दूसरी तरफ काली, उग्र और अडिग, शक्ति का प्रतीक हैं - कच्ची शक्ति, समय और परिवर्तन। वह भ्रम को तोड़ देती हैं, जहाँ आराम नहीं रह सकता, वहाँ जागृति लाती हैं। हालांकि वे विपरीत दिखते हैं, लेकिन वे संघर्ष में नहीं हैं। वे दिव्य पूरक हैं।

जहाँ कृष्ण आनंद जगाते हैं, वहीं काली जागृति लाती हैं। जहाँ कृष्ण भ्रम बनाए रखते हैं, वहीं काली सत्य को प्रकट करती हैं।

साथ मिलकर, वे आत्मा को भ्रम से मुक्ति की ओर, आनंद से उद्देश्य की ओर मार्गदर्शन करते हैं। यह प्रस्तुति डेविड आर. किंसले की किताब 'द स्वॉर्ड एंड द फ्लूट: काली एंड कृष्णा , हिंदू पौराणिक कथाओं से प्रेरित है

कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को पुष्प, उत्तरीया  एवं मोमेंटो  देकर सम्मानित किया गया ।

Wednesday, December 10, 2025

प्राचीन कलाकेंद्र की तरफ से एक और विशेष आयोजन गुरुवार 11 दिसंबर को

Emailed on Wednesday 10th December 2025 at 6:29 PM

प्राचीन कलाकेंद्र की तरफ से एक और विशेष आयोजन गुरुवार 11 दिसंबर को 

कथक आर्टिस्ट मुजफ्फर मुल्ला और विद्यागौरी अडकर का जादू 

चंडीगढ़:10 दिसंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

गीत संगीत और डांस के जादू की परंपरा को यह ऐतिहासिक स्थान निरंतरता से जारी रखे हुए है। जब मैं पहली बार यहां आया था तो अपने मामा के साथ आया था। ज्ञानी राजिंदर सिंह छाबड़ा के साथ। बस स्टैंड से उतर कर यहां पहुंचने तक मां ने रिक्शा कर लिया था। इसके बावजूद दो तीन बार जब भीड़ भरे किसी रस्ते को पार करना होता तो मुझे मां की ऊँगली पकड़ना ज़रूरी लगता था। वही प्राचीन कला केंद्र मुझे तब का याद है। उस समय भी अच्छा था यहाँ का माहौल। लोगों को विधिवत संगीत की शिक्षा दी जाती थी। बचपन गुज़रा कर पत्रकारिता में पांव रखा तो फिर यहाँ एक आयोजन में आना हुआ। मोहाली के उस समय के प्रसिद्ध पत्रकार राजेंद्र सेवक अग्रवाल के साथ। उन्होंने मुझे कौसर परिवार से मिलवाया। तब से इस स्नेह का सिलसिला बना हुआ है। 

इसी सिलसिले के अंतर्गत यहां प्राचीन कला केंद्र पेश करता है 314वीं मंथली बैठक जिसमें मशहूर कथक आर्टिस्ट मुजफ्फर मुल्ला और विद्यागौरी अडकर की कथक डुएट होगी।

आयोजन का विवरण इस प्रकार होगा। कल अर्थात 11 दिसंबर 2025 को शाम 6:00 बजे हो गई औपचारिक शुरुआत। इस आयोजन का स्थान होगा-प्राचीन कला केंद्र, सेक्टर 35-B, चंडीगढ़। इंडियन क्लासिकल म्यूज़िक की एक और शानदार शाम के लिए आप भी इस आयोजन के साथ जुड़ें।

इस मौके पर इंडियन क्लासिकल डांस, इंडियन क्लासिकल म्यूज़िक, चंडीगढ़ इवेंट्स, डांस लवर, डांस इत्यादि की तरंगें आपको भी अपना जादू सा असर दिखाएंगी। 

Monday, December 1, 2025

वैश्विक एकता का असली अहसास भी करवाता रहा PKK का इवेंट

Emailed By PKK on 1st Dec 1, 2025 at 6:54 PM Regarding an event

कवालियों ने भी खूब यादगारी समय बांधा 


चंडीगढ़
: पहली दिसंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

इस बार तो प्राचीन कला केंद्र ने एक बिलकुल ही अनूठा प्रयोग किया। सचमुच यह संगीत का एक अनूठा प्रयोग ही था। संगीत इस विश्व को एकात्मकता के सूत्र में पिरोता है। यह वैश्विक एकता का असली अहसास भी करवाता है। प्राचीन कला केंद्र ने यह सब साबित भी किया। यह एक बहुत ही यादगारी आयोजन था जिसका सन्देश भी बहुत अर्थपूर्ण रहा। 

प्राचीन कला केंद्र द्वारा आज यहाँ टैगोर थिएटर के मिनी ऑडिटोरियम में सायं 5 :50  से  एक विशेष कार्यक्रम वन  वर्ल्ड वन रिदम  आयोजित किया गया जिस में  केंद्र के मोहाली परिसर में "गुरु शिष्य परम्परा" के अंतर्गत  संगीत एवं नृत्य का गहन प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे देशी एवं विदेशी छात्रों द्वारा पेश किया गया।    इस कार्यक्रम में   इन विदेशी छात्रों द्वारा अपने अपने देश की नृत्य एवं संगीत कला का बखूबी प्रदर्शन किया गया।  अपने देश की पारम्परिक वेशभूषा में सजे इन छात्रों ने अपनी देश की कला और संगीत की सुन्दर झलकियां पेश की।  कज़ाकिस्तान , मिश्र , मैक्सिको , फिजी , स्पेन , ज़िम्बावे , उज्बेकिस्तान , तंज़ानिया , फ्रांस   और बांग्लादेश से आये इन छात्रों ने अपने देश की कला और संस्कृति का परिचय दिया ।  इस कार्यक्रम में तबला शिक्षक एवं जाने माने तबला वादक श्री आविर्भाव वर्मा के निर्देशन  में  इस संगीतमयी संध्या को विभिन्न देशों की खूबसूरत कलाओं से संजोया गया।  

सबसे पहले गोंग पेश किया गया और  गिलास और चम्मच के टकराने से उत्पन्न हुई ध्वनि से  कार्यक्रम की शुरुआत की गयी।  इसके उपरांत डेनियल, साहिल  और वैलेंटिना द्वारा गिटार वादन पेश किया गया जिस में उनका साथ  नुरू ने गाना गाकर दिया जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।   इसके बाद  उपरोक्त देशों के छात्रों द्वारा अपने अपने देश के गाने और नृत्य का बखूबी प्रदर्शन किया गया जिस में विभिन्न अद्वितीय प्रस्तुतियों से दर्शक मंत्र मुग्ध हो गए।  इसके उपरांत तबला वादन पेश  गया जिस में सब छात्रों ने  भाग लिया।   

कार्यक्रम के अगले भाग में कव्वाली पेश की गयी जिस में  सब विदेशी छात्रों ने सूफी संगीत पर नृत्य करके तालियां बटोरी।  इसके उपरांत नेपाल के संमुद्र ने आलाप पेश किया   तथा इजीपट से आयी रेवन ने पंजाबी संगीत पर पंजाब का दमदार भंगड़ा पेश किया जिस पर न केवल दर्शक झूम उठे बल्कि पूरा आनद भी उठाया।  

कार्यक्रम के अंत में  सभी देशी विदेशी  वाद्यों की अनूठी जुगलबंदी ोपेश की गयी जो दर्शकों के दिल को छू गयी।  इन वाद्यों में तबला , गोंग , कांगो , चिमटा, ढोल , ढोलक , डीजम्बे  , कहोंन , वुड शेकर, एग शेकर  , जेम्बे इत्यादि वाद्यों का प्रदर्शन  एक साथ किया गया।  ऐसी प्रस्तुतियों देशों की सीमाओं को तोड़ कर संगीत की  मिठास से हर सीमा को लांघते हुए  विभिन्न देशों को साथ जोड़ने का एक विनम्र प्रयत्न है।  

प्राचीन कला केंद्र द्वारा  देश की प्राचीन गुरु शिष्य परंपरा के अंतर्गत  भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य  का प्रचार, प्रसार एवं विस्तार किया जा रहा  है जो एक सराहनीय कदम है।

Monday, November 10, 2025

पं.आशिम चौधरी और उनके साथ तबले पर पं. तबले पर देबाशीष अधिकारी

Emailed By PKK on Monday 10 th November 2025 at  5:57 PM Regarding Sitar Vadan Event सितार वादन

प्राचीन कला केंद्र द्वारा 313वां मासिक बैठक कार्यक्रम 11 को

चंडीगढ़: 10 नवंबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

पंडित असीम चौधरी के नाम का उच्चारण अगर अंग्रेज़ी में करें तो उच्चारण होता है Pt. Ashim Choudhary वाले स्पेलिंग के साथ। इस लिए कई बार  लोग अशीम भी कहते हैं। वैसे भी जब पता करो तो इस नाम के कई व्यक्ति हो सकते हैं, लेकिन इस खोज ले दौरान जल्दी ही सपष्ट हो जाता कि सितार वादन की धुनों से संगीत लहरियां छेड़ देने वाला असीम चौधरी कौन है! सितार की तारों पर स्वर लहरियों का जादू उस समय खूब बोलता है जब असीस साहिब की उंगलियां सितार पर दौड़ रही हों। पं.आशिम चौधरी और उनके साथ तबले पर पं. तबले पर देबाशीष अधिकारी

वास्तव में प्रख्यात सितार वादक पंडित असीम चौधरी एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात सितार वादक हैं। जिन्होंने उन्हें मंच पर देखा सुना वे इस बात से भलिभांत अवगत हैं कि वह सितार के जादूगर ही हैं। रेडियो से उनके राब्ते ने उनके इस जादू को और महान बनाया। उनकी कला में निखार का एक कारण रेडियो भी रहा। रेडियो कलाकारों को जितने भी सुअवसर देता है तो उनमें से हर सुअवसर कलाकार की कला को और भी निखारता चला जाता है।  है। शायद रेडियो का माहौल ही ऐसा होता है। अपने केंद्र से घर घर तक पहुँचता हुआ कार्यक्र ,जीवंत भी हो तो भी। समाचार भी और गीत संगीत भी। 

उसी रेडियो में असीस साहिब आकाशवाणी अर्थात All India Radio के शीर्ष ग्रेड कलाकार हैं। वह भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) से भी जुड़े हुए हैं। यह संगठन कला की दुनिया का एक बहुत महान संगठन है। सस्ब्स्कृतिक केंद्र। 

गौरतलब है कि पंडित असीम चौधरी आचार्य पंडित बिमलेंदु मुखर्जी के शिष्य हैं और गांधार पंचम शैली में वादन करते हैं। उन्होंने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगीत समारोहों में प्रदर्शन किया है और कई वेबिनारों तथन अन्य आयोजनों में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया है। उनके सुनने वाले उनके सितार वादन पर मंत्र मुग्ध हो जाते हैं।हैं।  वह एक जादू सा बांध देते हैं। 

चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले कला प्रेमियों और संगीत प्रेमियों के लिए यह एक प्रसन्नता का सुअवसर है कि वह 11 नवंबर 2025 को चंडीगढ़ के प्राचीन कला केंद्र में होंगें। आयोजन के विवरण का विवरण इसी पोस्ट में दिए गए निमंत्रण पत्र में भी आप देख सकते हैं। वैसे यह यादगारी आयोजन शाम 06:30 बजे शुरू हो जाएगा। यह संगीत आयोजन चंडीगढ़ के सेक्टर-35/बी में स्थित प्राचीन कला केंद्र परिसर के एमएल कोसर ऑडिटोरियम में होगा। कलाकारों में सितार वादन पर होंगें पं.आशिम चौधरी और उनके साथ तबले पर पं. तबले पर देबाशीष अधिकारी संगत करेंगे। कुल मिलाकर यह कार्यक्रम भी बहुत ही यादगारी रहेगा। 

सितार और तबले का जादू आमने सामने बैठ कर देखना न भूलें। 


Friday, October 10, 2025

प्राचीन कला केंद्र द्वारा द्वारा एक और जादुई आयोजन 11 को

Received From PKK on Friday 10th  Oct 2025 at 2:10 PM Regarding Swati Tiwari Srivastava

इस बार भी होगा केंद्र की 312वीं मासिक बैठक में यादगारी गायन

आप अपनी आंखों से देख सकेंगे स्वाति तिवारी के संगीत का जादू 


चंडीगढ़: 10 अक्टूबर 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह/ /संगीत स्क्रीन डेस्क)::

प्राचीन कला केंद्र दशकों से संगीत की शिक्षा और मिशन को लगातार फैलाता आ रहा है। इस केंद्र के नज़दीक रहने वालों की तो किस्मत ही बहुत अच्छी है लेकिन लोग दूर दराज से भी इसमें शामिल होने  के लिए आते हैं। इस बार प्राचीन कलाकेंद्र में शनिवार, 11 अक्टूबर 2025, शाम 6:30 बजे से होगा एक और ख़ास आयोजन जिसमें संगीत का जस्सड़ू बिखेरने पहुंचेंगे ख़ास कलाकार। 

इस बार का आयोजन एमएल कोसर ऑडिटोरियम, प्राचीन कला केंद्र परिसर, सेक्टर-35/बी, चंडीगढ़ में होगा। शाम साढ़े छह बजे से शुरू हो कर समापन तक चलेगा। 

इस बार के कलाकार होंगें स्वाति तिवारी श्रीवास्तव, हारमोनियम पर डॉ. देवेंद्र वर्मा और तबले पर श्री उजित डे कुमार के साथ।  इस तरह इस बार का आयोजन भी यादगारी रहेगा। 

गौरतलब है कि स्वाति तिवारी एक शास्त्रीय गायिका हैं जिन्हें उनके गायन और संगीत के लिए जाना जाता है। वह आकाशवाणी, दिल्ली से एक ग्रेडेड कलाकार हैं और संगीत कार्यक्रमों और कक्षाओं के लिए उपलब्ध हैं। मंच पर उनकी प्रस्तुति एक जादुई माहौल बना देती है। 

आप आएं और इस संगीत उत्स्व का आनंद उठाये। केंद्र के प्रबंधक और अन्य संगीत प्रेमी भी आपके बहुत आभारी रहेंगे

आपके लिए हार्दिक शुभकामनाएँ भी व्यक्त की गई हैं इसके साथ ही इस आयोजन में आप मिल सकेंगे गुरु मां डॉ. शोभा कोसर जी से भी जो स्वयं भी हमारे इस युग की महान कलाकार हैं। वह इसी केंद्र की रजिस्ट्रार भी हैं। 

निश्चय ही यह आयोजन भी आपके दिलों में एक विशेष जगह बना कर आपकी संगीतमय मधुर यादों के खज़ाने को और भी अमीर बना देगा। 

Saturday, August 30, 2025

पुराने क्लासिकल गीतों की धुनों ने बांधा जादूभरे संगीत का समय

 Received from PKK on Saturday 30th August 2025 at 6:26 PM Regarding Two Days Seminar

  प्राचीन कला केंद्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय  सेमिनार का  यादगारी समापन  


चंडीगढ़
: 30 अगस्त 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::
प्राचीन कला केंद्र द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमिनार  जोकि पंजाब कला भवन में आयोजित किया जा रहा है , का आज यहाँ भव्य समापन हो गया।  आज भी सेमिनार के दो सत्र पेश किये गए ।  दोनों सत्रों  में देश के विभिन्न शहरों से  प्रतिभागियों ने अपने शोध कार्य  को प्रस्तुत किया। 
इस सेमिनार का मुख्य विषय  संगीत नृत्य एवं ललित कलाओं की सामाजिक उत्थान में भूमिका  पर आधारित था।  इस अवसर पर प्रो   प्रेमीला गुरुमूर्ति, पूर्व कुलपति , तमिलनाडु डॉ जयललिता म्यूजिक एंड फाइन आर्ट्स यूनिवर्सिटी, चेन्नई  ने लेक्चर डेमोंस्ट्रेशन देकर अपने अमूल्य अनुभव को प्रतिभागियों के साथ साँझा किया। 

इस अवसर पर ललित नारयण  दरभंगा विश्वविद्यालय में संगीत विभाग प्रमुख प्रो लावण्या कीर्ति सिंह  काब्या , प्रो  पंकजमाला शर्मा के साथ साथ  केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ शोभा कौसर ने भी अपने अमूल्य आशीष वचनो से केंद्र की प्रशंसा करते हुए इस सेमिनार की सफलता के लिए बधाई दी।   इसके साथ ही सेमिनार के गेस्ट स्पीकर जाने माने तबला वादक पंडित सुशील जैन (चेयरपर्सन )  एवं डॉ अरुण मिश्रा (चेयरपर्सन ) ने  चेयरपर्सन  रूप में अपने विचार रखे और साथ ही गेस्ट स्पीकर के रूप में  जाने माने तबला वादक डॉ   जगमोहन शर्मा एवं  डॉ महेंद्र प्रसाद शर्मा  ,  श्री मंगलेश शर्मा , डॉ राहुल स्वर्णकार एवं डॉ  गौरव शुक्ला ने भी अपने विस्तृत ज्ञान को दर्शकों के साथ बांटा।  

इसी यादगारी सुअवसर पर शर्मा एम एस यू विश्वविद्यालय , बड़ोदा के संगीत विभाग प्रमुख डॉ राजेश केलकर  भी इस अवसर पर उपस्थित थे।  केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर एवं सेमिनार के सूत्रधार पंडित देवेंद्र वर्मा ने  सभी उपरोक्त माननीय  विभूतियों को उत्तरीया एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया।  

इसके उपरांत प्रतिभागियों ने  ऑफलाइन  एवं ऑनलाइन  माध्यम द्वारा  विभिन्न संगीत एवं कला से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध पत्र पेश किये गए। इस सेमिनार में संगीत एवं कला से जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध पत्र पेश किये गए।  जिस में भारतीय संगीत में राग और ताल, रागों का समय सिद्धांत, वेद एवं पुराणों में संगीत, लाया लयकारी एवं ताल, जनजातीय लोक एवं आध्यात्मिक संगीत एवं विविध नृत्य प्रकार, संगीत एवं कला शिक्षा के विविध आयाम जैसे कई विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत किये गए। इन शोध पत्रों में बहुत मेहनत से तैयार की गई अमूल्य जानकारी थी। 

कुल मिला कर सेमिनार का दूसरा दिन शास्त्रीय कलाओं एवं भारतीय परम्पराओं एवं कलाओं के विभिन्न पहलुओं को समर्पित रहा। इसके अतिरिक्त विनीता गुप्ता एवं भैरवी भट्ट के मधुर सितार वादन ने सबका मन मोह लिया और साथ ही महेंद्र प्रसाद शर्मा के तबला वादन को भी सबने खूब सराहा। हाल में मौजूद सभी श्रोता और दर्शक मंत्रमुग्ध थे। 

इस सेमिनार का मुख्य उद्देश्य कलाओं के माध्यम से समाज के उत्थान के महत्व  के बारे में गहन चर्चा करना था। इस चर्चा में संगीत की बारीकियों का ज़िक्र बहुत ही सादगी के साथ किया गया था।इसके साथ ही कलाओं के प्रसार प्रचार  के महत्व एवं समाज में इनकी भूमिका पर भी चर्चा की गयी।

कुल मिला कर सेमिनार अपने उद्देश्य में सफल रहा और ऐसे कार्यक्रम के आयोजन के लिए आयोजक प्राचीन कला केंद्र प्रशंसा एवं बधाई का पात्र है।  प्राचीन कला केंद्र के सचिव श्री सजल कौसर ने कार्यक्रम के अंत में सभी का सुंदर शब्दों में आभार व्यक्त किया

Friday, August 22, 2025

PKK संगीतमयी संध्या "संगीत उदय " में खूबसूरत प्रस्तुतियां

Received on Friday 22nd August 2025 at 6:37 PM Regarding Musical Event by PKK

  उदीयमान कलाकारों द्वारा PKK में एक विशेष आयोजन  


चंडीगढ़
: 22 अगस्त 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

अग्रणी सांस्कृतिक संस्था प्राचीन कला केन्द्र एवं संस्कार भर्ती के संयुक्त तत्वाधान में आज यहाँ मिनी टैगोर थिएटर  सेक्टर 18  में  एक विशेष संगीत संध्या संगीत उदय का आयोजन  सायं 6:00 बजे से किया गया । जिसमें देश भर के  युवा एवं प्रतिभाशाली कलाकारों ने शास्त्रीय गायन,वादन  की जोरदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का दिल जीत लिया। प्राचीन कला केंद्र द्वारा एक और जादुई संगीत संध्या 

इस कार्यक्रम में राजर्षि चटर्जी (सितार),  शिवांश सोनी (तबला), उपासना डे (गायन), अंशिका कटारिया (कत्थक), संजुक्ता सरकार (कत्थक), श्रेयस दत्तात्रेय  भोयर (तबला), कन्हैया पांडेय (सिंथेसाइज़र) एवं  पूजा बसक (गायन)   ने अपनी प्रस्तुतियों से  दर्शकों को सम्मोहित कर दिया।  

आज के कार्यक्रम में अखिल भारतीय  संस्कार भारती के वाईस प्रेजिडेंट डॉ रविंद्र भारती ने मुख्य अतिथि एवं  श्री लविश चावला , जनरल सेक्रेटरी , संस्कार भारती पंजाब प्रान्त ने विशेष अतिथि के रूप में पधार कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।  इस अवसर पर केंद्र के रजिस्ट्रार डॉ  शोभा कौसर एवं सचिव श्री सजल कौसर भी उपस्थित थे ।  साथ ही संस्कार भारती के सलाहकार प्रो सौभाग्य वर्धन भी उपस्थित थे।  मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के साथ पारम्परिक द्वीप प्रज्वलन के पश्चात  केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ शोभा कौसर द्वारा मुख्य अतिथि एवं विशेष अतिथि को शाल एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया।  

यादगारी बने आज के इस कार्यक्रम में  उपासना डे (गायन ) ने राग मुल्तानी में मध्य  एवं द्रुत लय में बंदिशें पेश की एवं पूजा बसक (गायन) ने राग मधुवंती  में तीन ताल की बंदिश पेश की।  इसके उपरांत संजुक्ता सरकार गणेश वंदना पेश की तथा अंशिका कटारिया ने ताल शिखर में, आमद, तहत परं, तिहाई एवं लड़ी इत्यादि की खूबसूरत प्रस्तुति पेश की।  इसके उपरांत  शिवांश सोनी एवं श्रेयस दत्तात्रेय भोयर ने तीन ताल में पेशकार और इसके उपरांत  पारम्परिक उठान, रेले,कायदे,पलटे, गतें  बहुत खूबसूरती से पेश करके दर्शकों  की तालियां बटोरी। इसके उपरांत इटावा घराने के सितार वादक राजर्षि चटर्जी ने राग यमन में कुछ  गतें  बंदिशें  इत्यादि पेश करके खूब प्रशंसा लूटी।

कार्यक्रम में इनके साथ केंद्र के संगीत विभाग में कार्यरत श्री प्रवेश कुमार ने  हारमोनियम पर एवं अमनदीप गुप्ता ने तबले पर  बखूबी संगत की। 

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर, संस्कार भर्ती के सलाहकार प्रो सौभाग्य वर्धन, एवं मुख्य अतिथि तथा विशेष अतिथि   ने  कलाकारों को   मोमेंटो एवं सर्टिफिकेट देकर सम्मानित किया। 

Thursday, July 31, 2025

प्राचीन कला केंद्र की तरफ से परंपरा का आयोजन शुक्रवार पहली अगस्त को

31st July 2025 at 7:04 PM Regarding Parampara by PKK

शाम को ठीक चार बजे हो जाएगी शरुआत 

मोहाली: 31 जुलाई 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह/ /संगीत स्क्रीन डेस्क)::

प्राचीन कला केंद्र उत्तर भारत के उन संगीत संस्थानों में है जो लगातार संगीत की परंपरा और सुगन्धि को फैलाते चले आ रहे हैं। इस बार भी इस संस्थान द्वारा शास्त्रीय एवं वाद्य संगीत परम्परा का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। 

यह आयोजन शुक्रवार, 1 अगस्त  2025 को शाम 4:00 बजे से शुरू होगा और समापन तक चलेगा।  

इस बार भी यह आयोजन डा. शोभा कोसर इंडोर ऑडिटोरियम, प्राचीन कला केंद्र कॉम्प्लेक्स, सेक्टर- 71, मोहाली में होगा। अपनी शानदार विरासत को कायम रखते हुए। 

इस बार भी आयोजन के कलाकार  केंद्र के छात्र होंगें। 

दर्शकों और श्रोताओं के स्वागत में अत्यंत आभार और हार्दिक सम्मान के साथ सभी संगीत स्नेहियों की इंतज़ार करेंगे रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कोसर और अन्य पदाधिकारी व कलाकार। 


Wednesday, June 11, 2025

संत कबीर जी की पावन जयंती पर प्राचीन कलाकेंद्र का विशेष आयोजन

From Pracheen Kala Kendra on Wenesday 11th June 2025 at 5:28 PM Regarding Musical Event on Kabir Ji

विशेष संगीत संध्या में सुरों से सजे कबीर जी के दोहों ने जगाया जादू 


चंडीगढ़
/ /मोहाली: 11 जून 2025: (मीडिया लिंक रविंदर/ /संगीत स्क्रीन डेस्क)::

प्राचीन कला केंद्र द्वारा आज यहाँ  महान संत कबीर जी की जयंती के सुअवसर पर एक विशेष संगीत संध्या कबीर वाणी का आयोजन किया गया।  जिस में  दिल्ली से आये युवा एवं प्रतिभावान कलाकारों  द्वारा  संत कबीर के शाश्वत ज्ञान और पदों को संगीतमय श्रद्धांजलि दी गयी।  इस कार्यक्रम का आयोजन  प्राचीन कला केंद्र के एम एल कौसर सभागार में सायं 6 :30  बजे से किया गया।

इस कार्यक्रम में दिल्ली से आये श्री राजेश नेगी , डॉ रवि पाल, श्री गणेश कुमार, श्री योगेश पाल , श्री दिनेश कुमार , श्री विपिन कुमार एवं श्री गुरभेज सिंह ने प्रस्तुति पेश की। 

इस कार्यक्रम की शुरुआत श्री राजेश सिंह नेगी द्वारा पंडित कुमार गंधर्व द्वारा रचित  राग 'श्री कल्याण' में छोटा ख्याल *'देखो री उत फूलन लगी'। पेश की गयी।  इसके उपरांत  सभी कलाकरों द्वारा एक अन्य रचना नैहरवा हमका न भावे प्रस्तुत की गयी।  कार्यक्रम के अगले भाग में एक भजन राम निरंजन न्यारा रे पेश किया गया। 

इस मौके पर साथ ही कबीर का अन्य भजन साधो देखो रे जग बौराना और  है  मन है इश्क मस्ताना, है  मन है होशियारी क्या प्रस्तुत किया गया।  इसके बाद कबीर जी की वाणी से एक खूबसूरत भजन बिन सतगुरु नर रहत भुलाना, खोजत फिरत राह नहीं जाना तथा उड़ जायेगा हँस अकेला, जग दर्शन का मेला पेश किये गए जिसको दर्शकों ने खूब सराहा।  इसके उपरांत अवधूता गगन घटा गहराई हो,  हिरना समझ बूझ वन चरना तथा भजो रे भैया राम गोविंद हरी प्रस्तुत किये गए।  भक्ति रास से भरे इन भजनो का दर्शकों ने खूब आनंद उठाया। और कार्यक्रम के समापन पर  कबीर जी के दोहे पेश किये गए। 

कार्यक्रम के अंत में केंद्र के सचिव  श्री सजल कौसर द्वारा कलाकारों  को उत्तरीया  एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर दिल्ली से विशेष रूप से संगीतज्ञ श्री देवेंद्र वर्मा तथा तबला वादक श्री देबाशीष अधिकारी भी पधारे।

Friday, May 23, 2025

संगीतक आयोजन: जिसमें में 5 से 60 वर्ष तक के छात्रों ने भाग लिया

From Pracheen Kala Kendra on Friday 23rd May 2025 at 4:52 PM

प्राचीन कला केन्द्र के छात्रों द्वारा शास्त्रीय संगीत की मधुर प्रस्तुतियां


चंडीगढ़
: 23 मई 2025: (कार्तिका कल्याणी सिंह/ /मीडिया लिंक32/ /संगीत स्क्रीन डेस्क)::

जो जो संगठन चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में गीत संगीत के क्षेत्रों की नींव मज़बूत बना रहे हैं उनमें प्राचीन कलाकेंद्र भी एक है। इस प्राचीन कलाकेंद्र में दशकों से इस शिक्षा को बहुत ही अदब के साथ नई  पीढ़ी तक पहुँचाया जा रहा है। हर वर्ग से जुड़े संगीत प्रेमियों को गीत संगीत और डांस में जहां सिखलाई दी जाती है। इसका सबूत एक बार फिर आज मिला जब आज के आयोजन में पांच वर्ष की उम्र से लेकर ६० वर्ष तक की उम्र के संगीत साधक मंच पर आए। 

प्राचीन कला केन्द्र की विशेष संगीतक संध्या में परंपरा श्रृंखला के तहत सैक्टर 35 स्थित एम.एल.कौसर सभागार में केंद्र के छात्रों द्वारा शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुतियां पेश की गई । केंद्र में कार्यरत सधी हुई संगीत शिक्षिक श्री  सुरजीत कुमार एवं अमनदीप गुप्ता   के निर्देशन में छात्रों ने अपनी कला का बखूबी प्रदर्शन करके खूब तालियां बटोरी। इसमें 5 से 60 वर्ष तक के छात्रों ने भाग लिया। विभिन्न  प्रस्तुतियों से सजे इस कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना से की गई ।उपरांत  कलाकारों द्वारा जपुजी साहिब पर आधारित एक रचना "ऐ मेरे मन" पेश की गयी तथा राग खमाज तथा बिहग पर आधारित सुन्दर बंदिशें प्रस्तुत की गयीं।  इसके बाद कलाकारों ने सरगम गीत तथा गीतमाला पेश की जिसे दर्शकों ने खूब सराहा । इसके बाद  किशोरावस्था के बच्चों द्वारा  लोकप्रिय  भजन वैषणव जान , अच्युतम केशवम , , प्रभु आपकी कृपा से मेरा सब काम हो रहा है , शिव कैलाशों के वासी , औ पालनहारे तथा राम स्तुति पेश की गयी जिस से दर्शक भक्ति रंग में रंग  गए।  

इसके उपरांत एकल तबला वादन पेश किया गया जोकि तीन ताल पर आधारित था।   कार्यक्रम के अंतिम भाग में ग़ज़लें पेश की गयीं।  खूबसूरत ग़ज़लों के रंग में रंगी शाम से दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। डाॅ.समीरा  कौसर ने छात्रों एवं गुरू की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये युवा कलाकार देश की संस्कृति की धरोहर को प्रफुल्लित करने का काम बखूबी कर रहे हैं। प्राचीन कला केंद्र द्वारा उभरती प्रतिभाओं को मंच देने के साथ साथ युवा छात्रों को संगीतक  अभ्यास और रियाज़ में  सधे  हुए गुरुओं के सानिध्य में  प्रफुल्लित करके कला एवं संगीत की अमूल्य सेवा कर रहा है। इससे संगीत की दुनिया और अधिक विशाल एवं सुंदर होती जा रही है। 

कुल मिलाकर आज का यह आयोजन भी बहुत यादगारी रहा। इस अवसर पर श , िल हुए श्रोताओं और दर्शकों ने इस से जुडी यादों को अपने दिल दिमाग में संजोया। 

Saturday, May 17, 2025

प्रियंका ठाकुर की प्रभावशाली एवं मधुर शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति

From Pracheen Kala Kendra on Saturday 17th May 2025 at 7:15 PM

307वीं मासिक बैठक में प्रस्तुति से फिर जगा गीत संगीत का जादू


चंडीगढ़: 17 मई 2025: (मीडिया लिंक//संगीत स्क्रीन डेस्क)::
चंडीगढ़ को लेकर अक्सर कहा जाता रहा कि यह तो पत्थरों का शहर है। इस धारणा को जो लोग लगातार गलत साबित करते आ रहे हैं उनमें प्राचीन कला केंद्र भी शामिल है। यह संस्थान इन्हीं पत्थरों में गीत संगीत के जादू का अहसास करवाता आ रहा है। हर बार नए पुराने कलाकारों से रूबरू करवाना और संगीत लहरियों से पूरे माहौल को संगीत मई बना देना इसी संस्थान की टीम का काम रहा।

प्राचीन कला केंद्र, चंडीगढ़ द्वारा आयोजित 307वीं मासिक बैठक कार्यक्रम का आयोजन शनिवार, 17 मई 2025 को एम. एल. कोसर इंडोर ऑडिटोरियम, सेक्टर 35-बी, चंडीगढ़ में किया गया। इस अवसर पर युवा एवं प्रतिभाशाली गायिका सुश्री प्रियंका ठाकुर ने शास्त्रीय गायन की एक मनोहारी प्रस्तुति दी।

कार्यक्रम की शुरुआत राग मालकौंस  से हुई, जिसमें उन्होंने विलंबित ख्याल "पीर ना जाने बालम" प्रस्तुत किया। भावपूर्ण गायन शैली से उन्होंने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके पश्चात, उन्होंने तीन ताल में द्रुत ख्याल "बालम नहीं आए" सुनाया, जिसने कार्यक्रम की गति और भी तीव्र कर दी। अपनी प्रस्तुति को और ऊर्जावान बनाते हुए, प्रियंका ठाकुर ने अति द्रुत में टप्प ख्याल "हर हर महादेव पति" प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।

शास्त्रीय प्रस्तुति के उपरांत, उन्होंने हिमाचली लोकगीत "कुंजू चंचलो" की मधुर प्रस्तुति दी, जो श्रोताओं के बीच अत्यंत लोकप्रिय रही और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराही गई।

गायिका का साथ दिया श्री दिव्यांश ठाकुर (तबला) एवं श्री पियूष मिश्रा (हारमोनियम) ने, जिनकी संगति ने पूरी प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बनाया।

कार्यक्रम में संगीत प्रेमियों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही, और सभी ने इस शाम को संगीत से सजी एक अविस्मरणीय अनुभूति बताया।

डॉ. शोभा कोसर (रजिस्ट्रार) व श्री सजल कोसर (सचिव) ने सभी संगीतप्रेमियों को कार्यक्रम में भाग लेने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया।

कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने के लिए श्री विनोद चन्ना (शिमला) , श्री गुंजन चन्ना, पं. देवेंद्र वर्मा डॉ  जगमोहन शर्मा ,   डॉ. हरमोहन शर्मा, श्री सौरभ आदि विशेष रूप से मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को सम्मानित भी किया गया। कुल मिलाकर यह भी एक याधारी कार्यक्रम रहा। इस ने चंडीगढ़ के संगीत भरे माहौल को एयर भी अमीर बनाया। 

Tuesday, October 15, 2024

गुरू एम.एल.कौसर की स्मृति में 19वे अवार्ड का भव्य आयोजन

Tuesday 15th October 2024 at 7:51 PM Email and WhatsApp PKK Chandigarh

संगीत जगत के दो दिग्गज कलाकारों का को किया गया सम्मानित 

तबला वादक पंडित विनोद पाठक एवं प्रसिद्ध सितार वादक पंडित हरविंदर शर्मा को अवार्ड  


चंडीगढ़: 15 अक्टूबर 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

चंडीगढ़ को आम तौर पर लोग पत्थरों का शहर कहते हैं। इसकी बड़ी बड़ी इमारतें, भागदौड़ वाली ज़िन्दगी और जल्दबाज़ी में रुखसुखा सा जवाब देने वाले कुछेक लोग इस कथनी पर मोहर लगाते हुए भी महसूस  होते हैं। इसके बावजूद प्राचीन कला केंद्र, कला भवन और रोज़ गार्डन जैसे संस्थान और स्थान यह भी याद दिलाते हैं की इसी चंडीगढ़ में संवेदना भी है, शायरी भी है और संगीत भी है। हाल ही में गुरु एम एल कौसर की समृति में कराया गया 19वां अवार्ड समारोह तांडव जैसे महान नृत्य के संबंध में  यहां हुआ खोजपूर्ण काम भी बहुत कुछ बताता है। तांडव नृत्य की चर्चा हम एक अलग पोस्ट में कर रहे हैं यहां लौटते हैं प्राचीन कला केंद्र के इस विशेष आयोजन की चर्चा पर। 

गुरू एम.एल.कौसर पिछले 6 दशकों से कला के क्षेत्र में अपनी बहुमूल्य सेवाओं और योगदान द्वारा नए आयाम स्थापित करने वाले तांडव सम्राट गुरू एम.एल.कौसर को श्रेष्ठ कलाकार होने के साथ-साथ भारतीय शास्त्रीय कलाकारों के वाहक के रूप में भी जाना जाता है । इन्होंने अपने अथक प्रयासों एवं निस्वार्थ सेवाओं के बल पर संगीत जगत में विशेष स्थान बनाया । ऐसी महान शख्सियत के इसी सहयोग को मद्देनजर रखते हुए प्राचीन कला केन्द्र की कार्यकारिणी समिति द्वारा वर्ष 2004 में एक लाख रूपए के अवार्ड की घोषणा की गई । यह अवार्ड भारतीय शास्त्रीय संगीत में अहम योगदान देने वाले कलाकारों के प्रति एक सम्मान है जो एक कलाकार की नजर से दिया जाता है।

इस अवार्ड में अब तक कत्थक नृत्यांगना सितारा देवी,कत्थक सम्राट बिरजू महाराज, सितार वादक शाहिद परवेज़, पंडित शिव कुमार शर्मा,सुनयना हजारीलाल,पंडित राम नारायण,गुरू सोनलमान सिंह,पंडित विश्वमोहन भट्ट,पंडित भजन सोपोरी,गुरू शोवना नारायण,पंडित सुशील जैन तथा पंडित कालेराम जैसे दिग्गज कलाकार सम्मानित किए जा चुके है।

आज के अवार्ड समारोह का आयोजन टैगोर थियेटर में 19वें गुरू एम.एल.कौसर अवार्ड समारोह का भव्य आयोजन सायं 6:30 बजे से किया गया। 19वां गुरू एम.एल.कौसर अवार्ड समारोह संगीत जगत की दो विभूतियों जानेमाने तबला वादक पंडित विनोद पाठक एवं प्रसिद्ध सितार वादक पंडित हरविंदर शर्मा को प्रदान किया गया।

इस कार्यक्रम में अवार्ड प्रदान करने हेतु पद्मभूषण ग्रेमी अवार्ड विजेता पंडित विश्वमोहन भट्ट विशेष रूप से मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए । इनके साथ सात्विक वीणा रचयिता पंडित सलिल भट्ट भी उपस्थित थे। मंच पर चैयरमैन श्री एस.के.मोंगा,रजिस्ट्रार डॉ.शोभा कौसर एवं सचिव श्री सजल कौसर उपस्थित थे।

पारम्परिक द्वीप प्रज्वलन करने के पश्चात चैयरमैन एवं अन्य विभूतियों द्वारा मुख्य अतिथि को सम्मानित किया गया । इसके उपरांत अवार्ड समारोह की शुरूआत की गई। सबसे पहले पंडित विनोद पाठक को शाल,स्मृति चिन्ह,मोमेंटो और 50 हजार रूपए  भेंट किए गए । उपरांत पंडित हरविंदर शर्मा को शाल,स्मृति चिन्ह,मोमेंटो और 50 हजार रूपए  भेंट किए गए ।

सम्मान समारोह को यादगार बनाने के लिए अवार्डी कलाकारों द्वारा एवं विशेष संगीत संध्या का आयोजन किया गया । जिसमें सबसे पहले पंडित विनोद पाठक द्वारा तीन ताल में निबद्ध तबला वादन पेश किया गया जिस में  फारूखाबाद घराने की कुछ विशेष बंदिशें पेश की गई । और तबला में  कायदे  तोड़े , रेले, गत, टुकड़े , परं इत्यादि पेश किये गए।  पारम्परिक बंदिशों से निबद्ध इस प्रस्तुति का सबने आनंद उठाया।  

इनके साथ तबले पर इनके सुपुत्र विविश पाठक एवं हारमोनियम पर श्री दिनकर दिवेद्वी ने बखूबी संगत की।

इसके उपरांत पंडित हरविंदर शर्मा ने मंच संभाला और विलायत खान साहिब के शिष्य हरविंदर शर्मा ने सुन्दर स्वर लहरियों से सजा   सितार वादन पेश किया। इन्होंने राग मिश्र खमाज में आलाप से शुरुआत की और गायिकी अंग से सजी प्रस्तुति में  सुन्दर बंदिशें पेश करके दर्शकों का मन जीत लिया । खूबसूरत जोड़ झाला पेश करके हरविंदर शर्मा ने दर्शकों को जादू भरी शाम में खोने के लिए मजबूर कर दिया।  कार्यक्रम का समापन इन्होने भटियाली धुन से किया । इनके साथ प्रसिद्द तबला वादक पंडित राम कुमार मिश्रा ने संगत करके चार चाँद लगा दिए। 

कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को उत्तरीय एवं मोमेंटो से सम्मानित किया गया। कलाकारों द्वारा कलाकारों को समर्पित इस सम्मान समारोह ने दर्शकों को एक खूबसूरत शाम से यादगारी बना दिया। 

Wednesday, September 11, 2024

299 वीं मासिक बैठक में श्री बंदोपाध्याय के कत्थक नृत्य से सजी शाम

Wednesday 11th September 2024 at 5:53 PM

श्री बंदोपाध्याय श्री साधना स्कूल ऑफ कत्थक की संस्थापक भी है


चंडीगढ़
: 11 सितंबर 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

कड़कती धुप वाली झुलसा देने वाली गर्मी अब जा चुकी है और मीठी मीठी शीत का मौसम दस्तक देने लगा है। सुबह और शाम को इसका अहसास किया जा सकता है। फुहार से लेकर मुसलाधार बरसात का रंग भी लोगों ने एक बार फिर से देख लिया। ऐसे सुहाने मौसम में देश भर में गीत संगीत के आयोजनों का सिलसिला शुरू हो चुका है। इसी का अहसास कराते हुए प्राचीन कला केंद्र ने भी चंडीगढ़ में अपना विशेष आयोजन किया। 

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा हर माह आयोजित होने वाली मासिक बैठकों की श्रृंखला की 299वीं कड़ी में दिल्ली से आई श्री बंदोपाध्याय ने अपने कत्थक नृत्य से दर्शकों को खूब आनंदित किया । पंडित जयकिशन महाराज के सानिध्य में नृत्य की शिक्षा प्राप्त कर रही श्री ने गुरू संदीप मलिक से नृत्य की प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण की । इसके उपरांत पंडित जयकिशन महाराज से नृत्य की बारीकियां सीखी । श्री ने प्राचीन कला केन्द्र से भास्कर का डिप्लोमा भी प्राप्त किया है । इसके अलावा खैरागढ़ विश्वविद्यालय से भी स्नातकोत्तर तक शिक्षा ग्रहण की है । दूरदर्शन की बी ग्रेड कलाकार श्री साधना स्कूल ऑफ कत्थक की संस्थापक भी है । इन्होंने विभिन्न प्रस्तुतियों से दर्शकों के दिल में जगह बनाई है।

आज के कार्यक्रम की शुरूआत एक खूबसूरत ध्रुपद रचना कंुजन में राचो रास जोकि चौताल पर आधारित थी,  से की । इसके उपरांत श्री ने कत्थक की तकनीकी पक्ष प्रस्तुत किया । अष्टमंगल 11 मात्रा में परन,गत, उठान, चालें, आमद, त्रिपल्ली,  प्रमिलू, तिहाई और चक्रदार परन प्रस्तुत करके तकनीकी पक्ष पर अपनी मजबूत पकड़ का बखूबी प्रदर्शन किया । इसके उपरांत तीन ताल पर आधारित ठुमरी जोकि राग मेघ मल्हार में निबद्ध थी,प्रस्तुत करके दर्शकों की खूब वाहवाही लूटी । कार्यक्रम के अंत में श्री ने तीन ताल पर आधारित रचनाएं तथा वाद्य परन,बिजली परन पेश करते हुए खूबसूरत लयकारियों से कार्यक्रम का समापन किया । इनके साथ तबले पर जानेमाने तबलावादक उस्ताद शकील अहमद खान,गायन पर अतुल देवेश,सितार पर लावण्य अबांदे तथा बोल पढंत पर जय भट्ट ने बखूबी साथ देकर कार्यक्रम को चार चांद लगा दिए।

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र की रजिस्ट्रार डॉ.शोभा  कौसर,सचिव श्री सजल कौसर ने  कलाकारों को उतरिया  और मोमेंटो देकर सम्मानित किया।

Sunday, August 11, 2024

प्राचीन कला केन्द्र की 298वीं मासिक बैठक भी जगाती रही संगीत का जादू

Sunday 11th August 2024 at 4:41 PM

संगीत की स्वर लहरियों ने एक बार फिर दिखाए संगीत के कमाल 


चंडीगढ़
: 11 अगस्त 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

चंडीगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में संगीत के जादू को बरकरार रखने वाली संस्थाओं में सबसे अग्रणी संस्था है प्राचीन कला केंद्र। इस संस्थान ने अब तक संगीत के अनगिनत साधकों को सफलता की उंचाईयों तक पहुंचाया है। संगीत और नृत्य साधना के क्षेत्र में यह संस्थान लगातार सक्रिय रहता है। 

इसी सिलसिले में इस अग्रणी सांस्कृतिक संस्था प्राचीन कला केन्द्र द्वारा 298वीं मासिक बैठक का आयोजन किया गया। जिसमें राजस्थान के प्रतिभाशाली तबला वादक गौतम पाल ने एकल तबला वादक की प्रस्तुति से दर्शकों का दिल जीत लिया। गौतम पाल ने न केवल फरुखाबाद घराने के तबला वादन की शिक्षा प्राप्त की अपितु पंजाब घराने के पंडित सुशिल जैन के गंडा बांध शिष्यत्व में भी अपनी कला को निखारा। विभिन्न प्रस्तुतियों द्वारा अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा चुके गौतम पाल ऑल इंडिया रेडियो के बी ग्रेड कलाकार है।

एक नया इतिहास रचने वाले आज के कार्यक्रम की दूसरी प्रस्तुति शिमला के गुंजन चन्ना द्वारा पेश की गयी। गुंजन को हाल ही में  दूरदर्शन  के ऐ ग्रेड से सम्मानित किया गया है।  गुंजन चन्ना ने अल्पायु में माता पिता से सीखने के बाद पटियाला के डॉ  जगमोहन शर्मा के शिष्यत्व में संगीत की बारीकियां सीखी। गुंजन संगीत की दुनिया का उभरता कलाकार है।

संगीत के क्षेत्र में यादगारी अध्याय जोड़ने वाले आज के इस कार्यक्रम की शुरुआत श्री गौतम पाल  के तबला वादन से हुई जिस में उन्होंने ने  तीन ताल में पेशकार रेले,कायदे,पलटे,पारम्परिक उठान बहुत खूबसूरती से पेश किए। इसके उपरांत इन्होंने फरुखाबाद घराने की कुछ प्राचीन गतें,रेले इत्यादि पेश करके खूब तालियां बटोरी। इसके उपरांत फरमाइशी एवं कमाली चक्रदार , टुकड़े , रेल एवं तिहाई का सधा हुई प्रदर्शन किया।  इनके साथ युवा एवं प्रतिभावान हारमोनियम वादक गुरप्रीत सिंह मोगा ने खूबसूरत संगत करके खूब समां बांधा।  

कार्यक्रम के दूसरे भाग में युवा एवं प्रतिभाशाली गुंजन चन्ना ने मंच संभाला और राग बिहाग से कार्यक्रम की शुरुआत की। आलाप के पश्चात विलम्बित ख्याल  में एक रचना "कैसे सुख सोये " पेश की  इसके उपरांत मध्य लाया  तीन ताल  में  दो रचनाएँ बालम रे  एवं बजे रे मोरी पायल प्रस्तुत करके खूब तालिया बटोरी। द्रुत ख्याल की बंदिश बनी बनी ठनी ठनी  भी दर्शकों का मन मोह गयी।  कार्यक्रम के अंत में गुंजन ने हिमाचली फोक माये नई मेरिये  प्रस्तुत करके रंग जमाया।  इनके साथ तबले पर श्री राजेश ब्रह्मभट्ट और हारमोनियम पर श्री मदन कश्यप ने बखूबी  संगत की। 

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र की रजिस्ट्रार डॉ.शोभा  कौसर,सचिव श्री सजल कौसर और तबला गुरू पंडित सुशील जैन  तथा डॉ जगमोहन शर्मा ने  कलाकारों को उतरिया  और मोमेंटो देकर सम्मानित किया।

Monday, July 29, 2024

पंजाब की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की फिर से कोशिशें

Monday 29th July 2024 at 5:03 PM

सभी पंजाबियों को संयुक्त प्रयास करने होंगे-राखी गुप्ता भंडारी


लुधियाना: 29 जुलाई 2024: (संगीत स्क्रीन ब्यूरो डेस्क):: 

पंजाब सरकार में खाद्य प्रसंस्करण विभाग की प्रमुख सचिव, वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्रीमती राखी गुप्ता भंडारी ने कल शाम इश्मित सिंह संगीत संस्थान लुधियाना में सिरमौर सांस्कृतिक संस्थान लुधियाना द्वारा आयोजित संगीत कार्यक्रम "आफरीन" की अध्यक्षता की और कहा कि पंजाब विश्व के इतिहास की पुस्तकें इसे विश्व सभ्यता का उद्गम स्थल कहा जाता है क्योंकि पृथ्वी की पहली पुस्तक "ऋग्वेद" भी पंजाब में ही लिखी गई थी। पंजाब रामायण और महाभारत की जन्मस्थली और रचना भूमि बन गया और मानवता की भलाई का संदेश देने वाले और शबद गुरु के रूप में स्थापित श्री गुरु ग्रंथ साहिब की रचना भी यहीं हुई। पंजाब ने लंबे समय से संगीत, चित्रकला और ललित कला के विभिन्न क्षेत्रों में अपना वर्चस्व कायम रखा है।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से पंजाबियों ने अपनी सर्वश्रेष्ठ स्थिति को नरम किया है, जिसे संयुक्त प्रयासों से फिर से शीर्ष पर लाने की जरूरत है। श्रीमती राखी गुप्ता भंडारी ने अपनी मधुर आवाज में जगजीत सिंह जी की गाई हुई ग़ज़ल सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पंजाब के वरिष्ठ नौकरशाह और पंजाब सरकार में प्रधान सचिव के पद पर कार्यरत श्री राहुल भंडारी ने भी "आफ़रीन" द्वारा आयोजित संगीत कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने कहा कि लुधियाना पंजाब की आर्थिक राजधानी है और इसे संयुक्त प्रयासों से सांस्कृतिक राजधानी भी बनाया जा सकता है। अरुण शर्मा के नेतृत्व में सदस्यों ने मुख्य अतिथि राखी गुप्ता भंडारी, श्री राहुल भंडारी और विशिष्ट अतिथि प्रो. गुरभजन सिंह गिल को गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत करने को कहा गया. प्रो गुरभजन सिंह गिल की संपूर्ण ग़ज़ल पुस्तक "आखर आखर" की प्रतियां भेंट की गईं।

पंजाबी लोक विरासत अकादमी के अध्यक्ष प्रो. गुरभजन सिंह गिल ने कहा कि लुधियाना कभी संस्कृति की दृष्टि से बहुत समृद्ध शहर था। यहां भाई साहब भाई जोध सिंह, डाॅ. एम एस रंधावा, प्रो. मोहन सिंह, कुलवंत सिंह विर्क, सोहन सिंह सीतल, अजायब चित्रकार, प्रो. एस नरूला और सुरजीत पातर जैसे लेखक वहां रहते थे. लाल चंद यमला जट्ट, नरेंद्र बीबा, जगमोहन कौर, चांदी राम और सुरिंदर शिंदा जैसे गायक और जसवंत भंवरा जैसे संगीत उस्ताद मार्तंड में रहते थे, लेकिन आज लुधियाना "फेसलेस" हो गया है।

इसमें सभी क्षेत्रों के शाह स्वार शामिल हैं। नये कलाकारों को संरक्षण देकर उस खोये हुए गौरव को पुनः प्राप्त किया जा सकता है। इस अवसर पर आफरीन के सभी कलाकार सदस्यों ने बहुत ही मधुर अंदाज में अपनी संगीत प्रस्तुति दी. मुख्य अतिथि श्रीमती राखी गुप्ता भंडारी को आयोजकों द्वारा सम्मानित किया गया। इश्मित संगीत संस्थान के निदेशक डाॅ. धन्यवाद के शब्द चरण कंवल सिंह ने कहे।

शौकीन शौकिया गायकों के एक समूह आफरीन ने 28 जुलाई को इश्मीत म्यूजिक इंस्टीट्यूट लुधियाना में 76वां संगीत समारोह मनाया। यह कार्यक्रम तीन महान गायक मोहम्मद रफ़ी की स्मृति को समर्पित था और सदस्यों ने लाइव संगीत पर गीत प्रस्तुत किए। प्रसिद्ध पंजाबी कवि, लेखक और दार्शनिक प्रोफेसर गुरभजन गिल ने संगठन और प्रतिभागियों को आशीर्वाद देने के लिए अपनी सौम्य उपस्थिति दर्ज की। श्रीमती राखी गुप्ता भंडारी आईएएस, प्रधान सचिव, पंजाब सरकार, जो स्वयं एक प्रतिभाशाली गायिका हैं, अपने पति श्री राहुल भंडारी और परिवार के सदस्यों के साथ मुख्य अतिथि थीं। दर्शकों में डॉ. राजिंदर बंसल, एडवोकेट हरप्रीत संधू, डॉ. संजीव उप्पल, डॉ. नितिन, पुरषोतम सिंगला और डॉ. चरण कंवल सिंह जैसी कई मशहूर हस्तियां शामिल थीं।

प्रोफेसर गुरभजन गिल ने भंडारी दंपति का स्वागत किया जो अपने करियर की शुरुआत से ही उनके संपर्क में थे। प्रोफेसर गिल ने आफरीन के प्रयासों की सराहना की और उपस्थित सभी लोगों को अपना आशीर्वाद दिया। राहुल भंडारी ने कहा, उनके जादुई शब्द वास्तव में हमारे लिए स्फूर्तिदायक और प्रेरणादायक थे। सभी ने पूरे समारोह के दौरान उपस्थित रहने के लिए प्रोफेसर गिल का आभार व्यक्त किया।

समारोह का आयोजन करण लांबा द्वारा बहुत अच्छे ढंग से और शालीनता से किया गया। कल मिलकर यह प्रस्तुति शानदार और जानदार रही। इस सफल आयोजन के बावजूद यह सवाल फिर भी कायम है कि उन कलाकारों तक सर्कार और समाज कैसे पहुंचेगा जिनके लिए इस तरह के आयोजन आज लाहौर के ऊंचे बुर्ज जैसे ही हैं जहां आमा गरीब इंसान की पहुंच अपने जीवन में कभी नहीं होती। 

Saturday, July 20, 2024

संतूर की मधुर स्वर लहरियों से सजी केन्द्र की 297वीं मासिक बैठक

 Saturday 20th July 2024 at 6:25 PM

संतूर वादक डॉ बिपुल कुमार रॉय  ने जगाया जादू 


चंडीगढ़: 20 जुलाई 2024: (कार्तिका कल्याणी सिंह//संगीत स्क्रीन डेस्क):: 

प्राचीन कला केन्द्र द्वारा हर माह आयोजित होने वाली मासिक बैठकों की श्रृंखला में आज यहां इसी की 297वीं कड़ी में मधुर एवं सधे हुए  संतूर वादन की प्रस्तुति पेश की गई । दिल्ली से आए युवा एवं प्रतिभाशाली संतूर वादक डॉ बिपुल कुमार रॉय  ने अपने प्रभावशाली  संतूर  वादन से दर्शकों की खूब सराहना प्राप्त की ।इनके साथ तबले पर जाने माने तबला वादक उस्ताद अकरम खान ने बखूबी साथ दिया।

इस कार्यक्रम का आयोजन हमेशा की भांति केन्द्र के एम.एल.कौसर सभागार में साय 6 :30 बजे से किया गया । इस अवसर पर चण्डीगढ़़ के कुछ जानेमाने कलाकारों ने अपनी उपस्थिति से चार चांद लगा दिए ।  बिपुल एक ऐसे युवा संतूर वादक हैं जिन्होंने  बहुत काम समय में  संगीत की दुनिय में अपना स्थान बनाया है।

इन्होने संतूर वादन की शिक्षा सूफियाना घराने के प्रसिद्द संतूर वादक पद्मश्री पंडित भजन सोपोरी से प्राप्त की है।  इन्होने दिल्ली विश्वविद्यालय से गायन में एमफिल  तथा पीएचडी की डिग्री प्राप्त की है।  बिपुल आकाशवाणी के ऐ ग्रेड कलाकार हैं और भारतीय संस्कृति मंत्रालय में उत्कृष्ट श्रेणी के कलाकार हैं।  रागों की शुद्धता , छंदों का मधुर प्रयोग और आकर्षक लयकारी इनके तंत्र वादन की विशेषता है।  इनको संगीत के क्षेत्र में योगदान के लिए बहुत से पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।  

कार्यक्रम की शुरुआत के लिए बिपुल  ने राग रागेश्री में आलाप से की।  तंत्रकारी अंग में सजी  विलम्बित ताल में आलाप के उपरांत झप ताल  मध्य लय में जोड़ पेश किया तथा द्रुत तीन ताल से सजा झाला पेश करके खूब तालिया बटोरी।   तंत्रकारी अंग में महारथ रखने वाले बिपुल  ने  लयकारियों से दर्शकों वाहवाही बटोरी। 

कार्यक्रम का समापन इन्होंने एक मधुर पहाड़ी धुन से किया जिसका दर्शकों के खूब आनंद उठाया । तबले पर उस्ताद अकरम खान के हमेशा की तरह  बखूबी रंग जमाया। एक ऐसा रंग जो सभी को याद रहने वाला  है। लोग समापन के बाद भी झूमते नज़र आए। 

कार्यक्रम के अंत में केन्द्र के सचिव श्री सजल कौसर ने कलाकारों को उतरीया एव मोमेंटो देकर सम्मानित किया । इस अवसर पर केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ शोभा कौसर भी उपस्थित थे जिनकी मौजूदगी हर बार नए कलाकारों को एक नाज़ा उत्साह देती है।  

Wednesday, March 13, 2024

सीमाओं के पार संगीतमय सामंजस्य

Wednesday 13th March 2024 at 12:21 AM

अमेरिकी सेना के बहादुर सैनिक रियाद, सऊदी अरब में संगीत लहरियां भी बिखेर रहे हैं 


संगीत की दुनिया
: 13 मार्च 2024: (मीडिया लिंक// फोटो-अमेरिकी रक्षा विभाग//संगीत स्क्रीन डेस्क)::

 बस इंसान में संवेदना और प्रेम हो तो जीवन में  संगीतमय झलक दिखाई देने लगती है। एक ऐस कल्पना साकार रूप लेने लगती है जो सबके नसीब में ही नहीं होती। अरब के रेगिस्तान के मध्य में, जहां रेत के टीले अंतहीन रूप से फैले हुए हैं और प्राचीन महल इतिहास के प्रमाण के रूप में खड़े हैं, वहां संगीतमय सद्भाव का हर  एक क्षण मौजूद है जो सीमाओं और संस्कृतियों से परे है। सऊदी अरब के रियाद शहर की हलचल के बीच, गिटार की हल्की-हल्की झनकार गूंजती है, जो ऐसी धुनें बुनती है जो सौहार्द और एकता की भावना को प्रतिध्वनित करती है। संगीत की यह लहरियां दुनिया को बता रही कि शांति और प्रेम का संदेश देने वाली शक्ति सचमुच बहुत से  जादू दिखा सकती है। 

रेत के सागर जैसे माहौल में यह अनोखा दृश्य तब सामने आता है जब अमेरिकी सेना के सदस्य, घर से दूर फिर भी संगीत की सार्वभौमिक भाषा से जुड़े हुए, गिटार के प्रति अपने जुनून को साझा करने के लिए इकट्ठा होते हैं। ऐसी सेटिंग में जो कुछ लोगों के लिए असंभव लग सकती है, इन सैनिकों को अपने वाद्ययंत्र बजाने के सरल कार्य में जहां सांत्वना और समुदायिक संतोष भी मिलता है।

जैसे ही सेना के जवानों की उंगलियां तारों पर नृत्य करती हैं, तो संगीतमय जादू हवा में तैरते हैं, जो अपने साथ दूर देशों से यात्रा करने वालों की कहानियों और अनुभवों को भी ले जाते हैं। बजाया गया प्रत्येक राग मानव आत्मा के लचीलेपन और अनुकूलन क्षमता का एक प्रमाण है, जो कमियों को पाटता है और उन जगहों पर संबंध बनाता है जहां कुछ भी संभव नहीं लगता है।

रियाद में तैनात इन संगीत प्रेमी सैनिकों के लिए, संगीत सिर्फ एक शगल से कहीं अधिक काम करता है - यह एक जीवन रेखा है जो कर्तव्य की कठोरता से राहत के क्षण प्रदान करता है और उन बंधनों की याद दिलाता है जो उन्हें अपने साथियों के साथ एकजुट करते हैं। साझा लय और सामंजस्य में, उन्हें आराम, सौहार्द और सांस्कृतिक विभाजन से परे अपनेपन की भावना मिलती है।

इसके साथ ही उनकी इन निजी किस्म की संगीत सभाओं का प्रभाव उनकी बैरक की सीमा से परे तक भी फैला हुआ है। जैसे ही उनके गीतों की धुन रियाद की सड़कों पर बहती है, वे राष्ट्रों के बीच मित्रता और सद्भावना के प्रतीक के रूप में काम करते हैं। अपने संगीत के माध्यम से, ये सैनिक शांति के दूत बन जाते हैं, अपने मेजबान देश और अपनी मातृभूमि के बीच समझ को बढ़ावा देते हैं और पुल बनाते हैं।

अक्सर विभाजन और कलह से चिह्नित दुनिया में, रियाद में यूएसए सेना के सदस्यों को गिटार बजाते हुए देखना संगीत की परिवर्तनकारी शक्ति की एक शक्तिशाली अनुस्मारक के रूप में कार्य करता है। उनके हाथों में, छह तार एकता के लिए एक माध्यम बन जाते हैं, लोगों को एक साथ लाते हैं और समुदाय की भावना को बढ़ावा देते हैं जिसकी कोई सीमा नहीं है।

इसलिए, सऊदी अरब की रेत के बीच, जहां संस्कृतियां टकराती हैं और परंपराएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं, अमेरिकी सेना के सदस्यों के गिटार बजाने के संगीत को आशा और सद्भाव की किरण बनने दें-यहां तक ​​कि सबसे अप्रत्याशित स्थानों में भी समान आधार खोजने की स्थायी मानवीय शक्ति का एक नया और अदभुत प्रमाण होगा। जंग और नफरत को प्रेम और मानवता में बदलने का जादू सिखाता हुआ संगीत आज के दौर की विशिष्ठ आशा के तौर पर भी सामने आया है। 

Saturday, February 17, 2024

गायका असीस कौर का पंजाबी सांस्कृतिक गीत रिलीज

Saturday 17th February 2024 at 21:42

यह गीत पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा द्वारा रिलीज़ किया गया 


मोहाली: 17 फरवरी 2024: (मीडिया लिंक//सुर स्क्रीन डेस्क)::

प्रसिद्ध पंजाबी गायक असीस कौर का पंजाबी सांस्कृतिक गीत 'लाहिंडा काद पंजाब' पंजाब के कैबिनेट मंत्री अमन अरोरा द्वारा जारी किया गया था। यह गीत असिस कौर द्वारा गाया गया है। गीत के लिए संगीत श्री डैप द्वारा रचा गया है और गीत के वीडियो निर्देशक बॉबी बाजवा हैं। इस गीत के निर्माता और प्रेरणा. सरजीत सिंह जी।  गीत का कैस्टियम डिजाइन प्रमुख डिजाइनर गुनित कौर द्वारा किया जाता है। इस गीत का निर्माण धैर्य राजपूत, कोरियोग्राफर मैंडीप मैंडी और राजा फिल्म के संपादन द्वारा किया गया है। यह गीत YouTube लिंक असिस रिकॉर्ड्स द्वारा जारी किया गया था।

इस अवसर पर बोलते हुए, पंजाब के कैबिनेट मंत्री, अमन अरोड़ा ने कहा कि आसिस कौर के इस गीत में, जलते और आरोही पंजाब को बहुत खूबसूरती से चित्रित किया गया है, हम सभी को अपनी कीमती संस्कृति पर गर्व होना चाहिए। 

इसी बीच, असीस कौर ने अपने संदेश में कहा कि आज वह जिस स्थान पर हैं, वह गुरुद्वारा सिंह के शहीद स्थान सोहाना के लिए धन्यवाद प्राप्त किया गया है, जो धन्य अमर शहीद जत्थेडर बाबा हनुमान सिंह जी का शहीद स्थान है। उसने कहा कि भविष्य में वह उसी तरह से पंजाबी सांस्कृतिक गीत का प्रदर्शन करके पंजाबी मातृभाषा की सेवा करती रहेगी।

याद रखें कि असीस कौर हिंदी पंजाबी दोनों के गायन में पूरी  मुहारत रखती हैं। वास्तव में, असीस पनिपत, हरियाणा से है। उसका जन्म 26 सितंबर, 1988 को हुआ, असीस ने पांच साल की छोटी उम्र में ही गाना शुरू  कर दिया था। उनके जीवन में कई बार कठिनाइयाँ भी आईं लेकिन उनकी उपलब्धियाँ भी महान थीं। यह असीस का धार्मिक स्वभाव का पिता था जिसने उसे गुरुबाणी गाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने गुरुबाणी को बहुत लगन से सीखा और जल्द ही इसमें पूरी तरह प्रवीण भी बन गई। दिलचस्प बात यह है कि उनके पहले प्रयास में ही उनकी प्रशंसा की गई।

जैसे ही वह बड़ी हुई, उसने पेशेवर रूप से गाने का फैसला किया। उन्होंने उस्ताद पुराण शाहकोटी के तहत जालंधर से प्रशिक्षण लिया। गुरबानी का उनका संस्करण भारत में जारी किया गया था और वह इसकी बहुत सराहना करते थे। उन्होंने विभिन्न कार्यक्रमों पर गुरबानी गाना शुरू किया। उनके भाई-बहन गुरबानी पाठ में सक्रिय रूप से शामिल थे। असिस ने एक पंजाबी रियलिटी शो, "वॉयस ऑफ पंजाब" में भाग लिया, जिसके बाद वह बंबई आए और कई संगीत संगीतकारों से मिले। 

असीस कौर ने इंडियन आइडल 6 में भी भाग लिया। उसने "स्पीक" गाया और अपने भावनात्मक गीतों के साथ गिमा 2016 फैनपार्क में अपने प्रशंसकों पर जीत हासिल की। तमंचे बॉलीवुड में उनकी पहली फिल्म है, जिसमें उन्होंने "दिलदार" गीत गाया था। कपूर और संज से (1921 से) उनका गीत "बोलना" एक हिट था और चार्ट सूची में सबसे ऊपर था। 

अपने गीत संगीत  के कैरियर में, उन्हें मुंबई के संगीत उद्योग के साथ-साथ पंजाब और हरियाणा के लोगों से भी बहुत प्यार मिला। उम्मीद है कि जल्द ही उनके और गीत भी दर्शकों के।  

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