Wednesday, January 19, 2022

इस बार राग पहाड़ी पर आधारित फ़िल्मी गीत की चर्चा कर रही हैं अनीता शर्मा

17th January 2022 at 10:03 AM 

फिल्म "इक महल हो सपनों का" में शामिल था यह लोकप्रिय गीत

राग आधारित फ़िल्मी गीतों की चर्चा का मकसद है आम लोगों तक राग की अहमियत को सादगी से ले जाना। संगीत के इस मर्म को उन लोगों तक भी ले जाना है जिन्होंने कभी राग की तरफ ध्यान ही नहीं दिया लेकिन फिल्म के गीत उन्हें बहुत पसंद होते हैं। इस बार अनीता शर्मा की कलम से  हम प्रस्तुत कर रहे हैं राग पहाड़ी पर आधारित फ़िल्मी गीत "दिल में किसी के प्यार का जलता हुआ दिया।" बहुत से लोकप्रिय गीतों की तरह यह गीत भी राग पहाड़ी पर आधारित है।अनीता शर्मा ने किया है शानदार एनालसिस जिससे कई पहलू देखने को मिलेंगे। --कार्तिका सिंह 


लुधियाना
: 19 जनवरी 2022 (अनीता शर्मा//संगीत स्क्रीन)::

सन 1975 में आई थी फिल्म "इक महल हो सपनों का।" इस फिल्म के गीत बहुत ही लोकप्रिय हुए थे। इन्हीं में से एक गीत था: 

दिल में किसी के प्यार का जलता हुआ दिया; 

दुनिया की आंधियों से भला वह बुझेगा क्या! 

साहिर लुधियानवी साहिब का लिखा यह पूरा गीत भी इस रचना के अंत में दिया जा रहा है। यह गीत राग पहाड़ी पर आधारित है और ताल है कहरवा (धिंड तक तक/धिंड ता ता) Congo Bongo तालवाहा 

संगीतकार रवि की उत्कृठ कृतियों में इस गीत को विशेष स्थान प्राप्त है। स्वयं संगीतकार रवि ने विविध भारती से प्रसारित एक साक्ष्ताकार में इस गीत की रेकार्डिंग से पहले का एक रोचक किस्सा सुनाया और बताया कि जिस दिन मुम्बई में इस गीत की रेकार्डिंग होनी थी उस दिन बंबई में संगीतकारों की हड़ताल थी लेकिन इस गीत के फिल्मांकन की शूटिंग शेडयूल तय होने के कारण संगीतकार रवि ने अकेले रिदिम बॉक्स और हारमोनियम ले कर स्टूडियो में अपनी आवाज़ में गीत की रेकार्डिंग कर के फिल्म के डॉयरेक्टर को दे दी। इस तरह उस नाज़ुक हालात में भी फिल्मांकन पूरा हो गया। बाद में जब संगीतकारों की हड़ताल खत्म हुई तो लता मंगेशकर जी से डेट ले कर पुनः इस गीत की रेकर्डिंग की गई। राग पहाड़ी के बहुत ही खूबसूरत प्रयोग हैं इस गीत में। 

राग पहाड़ी में निबद्ध इस गीत की स्थायी 1963 में आई फिल्म "भरोसा" के एक गीत पर ही बनाई गई थी। यह गीत बहुत ही लोकप्रिय हुआ था और इसके बोल थे "वो दिल कहां से लाऊं तेरी याद जो भुला दे...!" इक महल हो सपनों का के इस लोकप्रिय गीत "दिल में किसी के प्यार का जलता हुआ दिया" की स्थाई बनाई गई थी भरोस फिल्म के गीत--तेरी याद जो भुला दे की धुन के आधार पर ही। इस तरह के खूबसूरत प्रयोग बहुत से अन्य लोकप्रिय गीतों में भी हुए हैं जिनकी चर्चा हम लोग भविष्य में भी करते रहेंगे।  जब इस गीत अर्थात दिल में किसी के प्यार का जलता हुआ धुन की धुन तैयार हो रही थी तो इसके संगीतकार रवि स्वयं पूरी तरह इसी पर केंद्रित थे। कालजयी गीत और कालजयी धुनें इसी तरह की साधना से बनते हैं और युगों युगों तक लोगों के दिल दिमाग पर छाए रहते हैं। इस गीत को तालबद्ध करने के लिए Congo Bongo पर कहरवा ताल के ठेके का भिन्न रूप (धिंड तक तक//धिंड ता ता) बहुत ही अनूठे ढंग से लिया गया। गीत के स्थायी की पहली पंक्ति ओके दोहराने पहले वायलिन पर छोटे से टुकड़े का सुंदर प्रयोग सुनने को मिलता है। 

गीत के अन्तरे से पहले के टुकड़े में तार शहनाई (वाद्य) का बहुत ही सुचारु रूप ढंग से प्रयोग किया गया है। अंतरे की पहली पंक्ति के बाद आने वाले संगीत में वायलिन और वायोला का मिश्रित प्रयोग बहुत ही खूबसूरत लगता है। 

दुसरे अंतरे से पहले आने वाला संगीत पहले वायलिन और मैडोलियन पर और फिर तार सप्तक में वायलिन, गिटार और तार शहनाई पर पर प्रयुक्त किया गया है। अंतरे की अंतिम पंक्ति के बाद, स्थायी से जोड़ते समय बांसुरी के छोटे से टुकड़े (प ध स रे ग) का समधुर प्रयोग किया गया है। गीत के अंत में मैडोलियन और गिटार के टुकड़े (Piece) से इसे समाप्त किया गया है। 

गायिका लता मंगेशकर जी द्वारा गाए इस गीत में कई जगह गले की हरकतों (मुर्कियों) का बहुत ही अच्छा उपयोग देखने को मिलता है। जैसे-दिल में किसी के प्यार का ( S S S स प म य ग रे स नी स्वर समुदाय) स्थान पर मुर्की प्रयोग हुआ है। ऐसा अनूठा प्रयोग करने  इस गीत की सुंदरता में चार चाँद लग गए। प्रेमभाव की अनुभूति और प्रभाव इत्यादि भाव इस गीत के प्राणभूत तत्त्व हैं। संक्षेप में प्रेमभाव का ऐसा सुंदर चित्रण विरले गीतों में ही देखने को मिलता है। 

पहाड़ी राग पर आधारित गीतों की संख्या बहुत है।  एक मोटा   कहा जाता है की  ब्लैक एंड व्हाइट फिल्मों के दौर की बात करें तो 50 फीसदी से अधिक फ़िल्मी गीत इसी पर आधारित रहे। 

फिल्म दोस्ती का गीत बहुत ही लोकप्रिय हुआ था---आवाज़ मैं  दूंगा---

फिल्म भाभी का गीत बहुत हिट हुआ था चल  पंछी---

फिल्म पाकीज़ा में दिल को छूने  वाला गीत था--चलो दिलदार चलो--चांद के पार चलो--

फिल्म चौहदवीं का चांद में गीत था--चौहदवीं का चांद हो या आफताब हो--

फिल्म मिलन में एक गीत हिट हुआ था--सावन का महीना पवन करे सोर--

फिल्म दुलारी में एक गीत हिट हुआ था--सुहानी रात चुकी--न जाने तुम  आओगे!

फिल्म ममता का गीत था--रहें न रहें हम--महका करेंगे--!

फिल्म ज़िद्दी का लोकप्रिय गीत था--रात  समां-झूमे चन्द्रमा--

फिल्म बारादरी में गीत आया था--तस्वीर हूं--तस्वीर नहीं बनती--

फिल्म राजरानी में भजन//गीत था--पायो जी मैंने रामरतन धन पायो 

फिल्म ताजमहल का गीत था--जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा-- 

फिल्म जेवल थीफ में गीत बहुत चला था-- रुला के गया सपना--

गैर फ़िल्मी गायन में एक ग़ज़ल गाई थी जनाब गुलाम अली साहिब ने--दिल में इक लहर सी उठी है अभी--!

फिल्म कश्मीर की कली का एक गीत है--इशारों इशारों में दिल लेने वाले--बता यह हुनर तुमने सीखा कहां से!

फिल्म आराधना के गीतों में एक गीत शामिल था--कोरा कागज़ था यह मन मेरा--लिख दिया नाम जिसपे तेरा!

फिल्म कभी कभी में गीत प्रसिद्ध हुआ था--कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है--

फिल्म आप की कसम का गीत था--करवटें बदलते रहे सारी रात हम!  आपकी कसम-!

आप अनुमान लगा सकते हैं की कितनी तरह के भाव--कितनी तरह की धुनें  राग पर आधारित हैं। गौरतलब है कि इस राग की उत्पत्ति बिलावल थाट से मानी गई है। इसमें म और नि स्वर अति अल्प प्रयोग हुए हैं। इसलिये इस राग की जाति में इन स्वरों का समावेश नहीं किया गया है और इसे औडव जाति का राग माना गया है। यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि किसी भी राग की जाति मुख्यत: तीन तरह की मानी जाती है।

1) औडव - जिस राग मॆं 5 स्वर लगें

2) षाडव- राग में 6 स्वरों का प्रयोग हो

3) संपूर्ण- राग में सभी सात स्वरों का प्रयोग होता हो प्रोफेसर 

इसे आगे और भी विभाजित किया जा सकता है। जैसे- औडव-संपूर्ण अर्थात किसी राग विशेष में अगर आरोह में 5 मगर अवरोह में सातों स्वर लगें तो उसे औडव-संपूर्ण कहा जायेगा। इसी तरह, औडव-षाडव, षाडव-षाडव, षाडव-संपूर्ण, संपूर्ण-षाडव आदि रागों की जातियाँ हो सकती हैं।इस तरह इसे आधार बना कर यादगारी धुन बनाई जा सकती है जो गीत को भी अमर कर देती है। 

इस राग में चंचलता/सुंदरता/प्रेमाभाव सभी को अभिव्यक्त करके विशेषता पूरी तरह से मौजूद है। इसकी चलन चंचल है और यह क्षुद्र प्रकृति का राग है । इसे गाते – बजाते समय राग–सौंदर्य बढ़ाने के लिये अन्य स्वरों का उपयोग विवादी की तरह से करते हैं। इसे भूपाली से बचाने के लिये अवरोह में शुद्ध म प्रयोग करते हैं। गाने–बजाने का समय रात्रि का प्रथम प्रहर है, किन्तु प्रचार में इसे किसी भी समय गा लिया जाता है । मन्द्र धैवत पर न्यास करने से पहाड़ी राग स्पष्ट होता है।  इस राग में दिलचस्पी रखने वाले व्यक्तिगत तौर पर भी अपनी गुजरिश भेज सकते हैं। जिन्हें इस राग में गाने की मुहरत है उनका भी स्वागत है। इस राग में 

वादी स्वर सा और सम्वादी प है। इसे गाने-बजाने का समय–रात्रि का प्रथम प्रहर ही गिना जाता है। 

आरोह- सा रे ग प ध सां।

अवरोह- सां ध प ग रे सा।


आज की चर्चा का विषय रहे गीत के बोल इस प्रकार रहे। पूरा गीत दिया जा रहा है। 

Movie/Album: इक महल हो सपनों का (1975)

Music By: रवि

Lyrics By: साहिर लुधियानवी

Performed By: लता मंगेशकर, किशोर कुमार

दिल में किसी के प्यार का

जलता हुआ दीया

दुनिया की आँधियों से भला

ये बुझेगा क्या

साँसों की आँच पा के भड़कता रहेगा ये

सीने में दिल के साथ धड़कता रहेगा ये

वो नक्श क्या हुआ, जो मिटाये से मिट गया

वो दर्द क्या हुआ, जो दबाये से दब गया

दिल में किसी के...

ये ज़िन्दगी भी क्या है, अमानत उन्हीं की है

ये शायरी भी क्या है, इनायत उन्हीं की है

अब वो करम करे, के सितम उनका फ़ैसला

हमने तो दिल में प्यार का शोला जगा लिया

दिल में किसी के...

आपको यह प्रस्तुति//यह अंदाज़/यह जानकारी सब कैसा लगा अवश्य बताएं। इस रचना पर अर्थपूर्ण और अच्छे कुमेंटस करने वालों को हम अपने आयोजनों में आने का सुअवसर भी देंगें। 

रचना: सुश्री अनीता शर्मा
असिस्टेंट प्रोफेसर:
लड़कियों का राजकीय कालेज 
लुधियाना

Wednesday, December 22, 2021

फिल्म ममता के गीत आज भी जादू जगाते हैं

आधुनिक युग के दर्द राग आधारित इन गीतों में आज भी झलकते हैं 


मोहाली//लुधियाना: 22 दिसंबर 2021: (रेक्टर कथूरिया//संगीत स्क्रीन डेस्क):

जब फिल्म "ममता"आई थी सन 1966 में। उस वक्त मेरी उम्र थी शायद आठ वर्ष। उन दिनों फिल्म रिलीज़ होने से पहले ही गीत मार्कीट में आ जाया करते थे। सो इस फिल्म के गीत भी लोगों के दिलों में आ गए। रेडिओ का ज़माना था। गीत तो बहुत ही थोड़े से समय में ही घर घर पहुंच जाते थे। रेडियो श्रीलंका अर्थात रेडियो सीलोन का तो कोई जवाब ही नहीं था। फिल्म की जहनि आज के दौर भी प्रासंगिक है। किस तरह आर्थिक मजबूरियां प्रेम के महल को तबाह कर देती हैं। किस तरह साफ़ सुथरे लोगों को बुराई की तरफ आना पड़ता है। फिल्म की कहानी बहुत कुछ दिखाती है। बाणभट्ट अर्थात निहार रंजन गुप्ता की कहानी को चार चाँद लगा दिए असित सेन साहिब के निर्देशन ने। आज इन विचारों की फ़िल्में फिर से बननी ज़रूरी हो गई हैं। आम इंसान की जंग को बढ़ावा देती हैं इस तरह की कहानियां जिनमें ज़िंदगी की हकीकत भी होती हो। इस फिल्म ने शायद इसी लिए भारत और अन्य देशों के साथ साथ उस ज़माने में सोवियत संघ में भी ज़बरदस्त बिज़नेस किया था। आर्थिक शोषण, आर्थिक मजबूरियां और वर्ग संघर्ष सभी को उजागर करना फिर से आवश्यक हो गया है।  

आकाशवाणी से फ़िल्मी गीतों का प्रसारण विविध भारती से अक्टूबर 1957 से शुरू हुआ था जिसे लोकप्रिय होते होते भी समझ लगा। तब तक रेडियो सीलोन लोगों के दिलों की धड़कन बन चुका था। रेडियो सीलोन हर घर के सभी सदस्य सुना करते थे। 

रेडियो की दुनिया के उस क्रन्तिकारी दौर के ऐसे माहौल में रिलीज़ हुई फिल्म "ममता" जिसके सभी गीत लोकप्रियता की शिखरें छू गए। चूँकि "ममता" हिन्दी भाषा की फिल्म थी इसलिए हिंदी भाषी दर्शकों पर इसका जादू भी खूब चला। इसके मुख्य कलाकार थे सुचित्रा सेन अशोक कुमार और धर्मेन्द्र। गौरतलब है कि सुचित्रा सेन की यह तीसरी हिन्दी फ़िल्म थी। इस फ़िल्म का निर्देशन बंगाली फ़िल्मों के प्रसिद्ध निर्देशक असित सेन ने किया है। इसी फिल्म का एक हिट गीत था जो दिल को छूता  है और बहुत ही पसंद किया गया था--रहें न रहें हम--इस गीत को लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी साहिब ने और संगीत से सजाया था रौशन साहिब ने। यह गीत राग पहाड़ी पर आधारित है। आवाज़ दी थी-सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर ने। इसी गीत को दोबारा भी उपयोग किया गया है। दोगाने के रूप में भी इसे काफी पसंद किया गया। दोगाने में सुमन कल्याणपुर और मोहम्मद रफ़ी साहिब कीआवाज़ें काफी जची हैं। 

एक अन्य गीत है इसी फिल्म से-इन बहारों में अकेले न फिरो राह में काली घटा रोक न ले। 

इस गीत को आवाज़ें दी हैं-आशा भौंसले और मोहम्मद रफ़ि साहिब ने। मजरूह सुल्तानपुरी साहिब के लिखे इस गीत को भी संगीत दिया है रौशन साहिब ने। इसी तरह एक और गीत इसी फिल्म से है--

रहते थे कभी जिनके दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह। बैठे हैं उन्हीं के कूचे में आज हम तरह!

इस गीत में आवाज़ है लता मंगेशकर साहिबा की।  मजरूह साहिब के ख्यालों की बुलंदी को संगीत से चार चांद लगाए हैं-रौशन साहिब के संगीत ने। 

इसी फिल्म का एक गीत शुरू होता है बहुत ही गज़ब की शायरी के साथ। मुजरा आधारित गीतों में अक्सर ही बहुत तड़प भरी बातें होती हैं। यह गीत भी इसी तरह शुरू शुरू होता है-

हमने उनके सामने

पहले तो खंजर रख दिया!

हां फिर कलेजा रख दिया;

दिल रख दिया; सर रख दिया और कहा!

हो---चाहे तो मोरा जिया ले ले--सावरिया

चाहे तो मोरा जिया ले ले

इस गज़ब की शायरी के बाद शुरू होता है गीत-चाहे तो मेरा जिया ले ले--इसमें संगीत के जादू की इंतहा है। संगीत का यही जादू  शिखर तक जाता है इसी फिल्म के गीत विकल मोरा मनवा-----के गायन में। विकल मोरा मनवा राग पीलू पर आधारित है। 

लेकिन आज की इस पोस्ट में हम बात कर रहे हैं इसी फिल्म के एक खास गीत की। यूं तो इस फिल्म के सभी गीत खास हैं लेकिन जिस गीत की बात हम कर  रहे हैं  वह गीत प्यार को दिल में छुपाने की बात इस तरह करता है जैसे मंदिर में लौ दिए की। राग कल्याण पर आधारित इस गीत के शब्दों की ज़रा गहराई देखिए--ख्यालों की उड़ान  देखिए--इस में पवित्रता की अभिव्यक्ति देखिए--

छुपा लो यूं दिल में प्यार मेरा 

कि जैसे मंदिर में लौ दिये की

इसमें प्रेम की विनम्रता, प्रेम की पावनता और प्रेम का समर्पण  झलकते हैं। चरणों का फूल होने की बात--चरणों में रहने की कामना---फूल की तरह नाज़ुकता.. सिर झुका कर अहंकारहीनता की बात फिर मंदिर में दिए की लौ जैसी पावनता भी 

तुम अपने चरणों में रख लो मुझको

तुम्हारे चरणों का फूल हूँ मैं

मैं सर झुकाए खड़ी हूँ प्रियतम  - २

के जैसे मंदिर में लौ दिये की

इसके बाद आती है बेवफाई को स्वीकार करने की बात---बिना प्रेम के रहने का गुनाह की स्वीकृति--शब्द बहुत ज़ोरदार हैं--यह पाप मैंने किया है अब तक--और साथ ही आश्वासन भी कि तेरे बिना रह कर भी तुम्हारे बिना कुछ और नहीं सोचा--मगर है मन में छवि तुम्हारी---और यह छवि भी पूरी तरह पवित्र रही है--पूजा की तरह रही है--कि जैसे मंदिर में लौ दिए की। 

ये सच है जीना था पाप तुम बिन

ये पाप मैने किया है अब तक

मगर है मन में छवि तुम्हारी - २

के जैसे मंदिर में लौ दिये की

साथ ही चेतावनी भरा निवेदन भी है कि बस अब और दूरी नहीं--और सहना मुश्किल है अब--देखिए शब्दों की गहराई--

फिर आग बिरहा की मत लगाना

के जलके मैं राख हो चुकी हूँ

ये राख माथे पे मैने रख ली - २

के जैसे मंदिर में लौ दिये की

यह गीत राग कल्याण पर आधारित है। इस की धुन में उतराव चढ़ाव और ठहराव कमाल के हैं। इस तरह लगता है कि शब्दों के साथ स्वयं धुन भी बोल रही हो--

यह फिल्म बॉक्स आफिस पर भी पूरी तरह सफल रही थी। इस शानदार साफसुथरी फिल्म ने घरेलू भारतीय बॉक्स ऑफिस पर भी बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया। यह भारत में साल की 15 वीं सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्म साबित हुई यह बहुत बड़ी बात है। करीब  12.12 मिलियन ($ 1.9 मिलियन)। यह भारत में बेचे गए लगभग 7.2 मिलियन टिकटों के अनुमानित फुटफॉल के बराबर था।

फिल्म विदेशी ब्लॉकबस्टर में सोवियत संघ, 1969 में 52.1 मिलियन टिकटों की बिक्री हुई।  यह सोवियत संघ में छठी सबसे अधिक कमाई करने वाली भारतीय फिल्म रही। उस यमन की बहुत बड़ी उपलब्धि रही यह। यह कमाई भी अनुमानित 13 मिलियन रूबल या (14.4 मिलियन डालर , या 108 मिलियन रुपयों ) के बराबर था।

संयुक्त, फिल्म ने दुनिया भर में अनुमानित million 120 मिलियन रुपयों  (16.3 मिलियन डालर ) की कमाई की थी जो उस समय भी बहुत बड़ी कमाई थी। फुटफॉल के मामले में इस फिल्म ने दुनिया भर में अनुमानित 59.3 मिलियन टिकट बेचे। इसकी लोकप्रियता का अनुमान इन टिकटों की बिक्री से ही लग सकता है। 

सम्मान के मामले में भी इस फिल्म ने नाम कमाया। इसका नामांकन फिल्मफेयर के लिए नामांकन सर्वश्रेष्ठ फिल्म के तौर पर भी हुआ। फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के लिए नामांकन-असित सेन साहिब का भी रहा। फिल्मफेयर नामांकन सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के तौर पर सुचित्रा सेन का रहा। फिल्मफेयर नामांकन के लिए सर्वश्रेष्ठ कहानी के लिए निहार रंजन गुप्ता का नाम भी रहा। वही निहार रंजन जिन्हें ज़्यादातर लोग बाणभट्ट के नाम से जानते हैं। बंगाल की पृष्ठभूमि में जन्म भी, लालनपालन भी और कोलकाता ने इन्दगी के बहुत से रंग भी दिखाए। मेडिकल क्षेत्र से भी जुड़े रहे और सेना से भी इस तरह बहु आयामी व्यक्तित्त्व विकसित हुआ जिस में बहुत से रंग रहे। सफल कहानी लिख पाने का राज़ शायद यह भी है। उन्होंने बहुत से अच्छे नावल भी लिखे। विशेष प्रस्तुति -रेक्टर कथूरिया

कुछ संगीत विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर विशेष प्रस्तुति

निरंतर सामाजिक चेतना और जनहित ब्लॉग मीडिया में योगदान दें। हर दिन, हर हफ्ते, हर महीने या कभी-कभी इस शुभ कार्य के लिए आप जो भी राशि खर्च कर सकते हैं, उसे अवश्य ही खर्च करना चाहिए। आप इसे नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके आसानी से कर सकते हैं।

Tuesday, December 21, 2021

21 से 25 दिसंबर युवा कलाकार अंकिता गुप्ता द्वारा कलाकृतियों की सुन्दर प्रदर्शनी

 Tuesday 21st December 2021 at 5:04 PM

दो दिवसीय संगीतमयी संध्या हेमंतोत्सव 27 एवं 28 दिसंबर को 

प्राचीन कला केंद्र द्वारा प्रेस कांफ्रेंस में कीजै गया विशेष आयोजनों का एलान 


चंडीगढ़
: 21 दिसंबर 2021: (गुरजीत सिंह बिल्ला//कार्तिका सिंह//संगीत स्क्रीन)::

अगर जालंधर में हरवलभ संगीत सम्मेलन ने उत्तर भारत का नाम रौशनकिया है तो उसी भावना को चंडीगढ़ में विकसित कर रहा है प्राचीन कलाकेंद्र। चंडीगढ़ जिसे पत्थरों का शहर कहा जाता है इसमें कला और भावनाएं जगाने वालों में प्राचीन कलाकेंद्र बहुत ही सक्रिय रहा है। पंजाब स्क्रीन के विशेष सहयोगी संस्थान संगीत स्क्रीन के बहुत से शुभचिंतक और इस परिवार के सदस्य ऐसे रहे हैं जिनका प्राचीन कलाकेंद्र के साथ नज़दीक का राब्ता रहा है। चंडीगढ़ से दूर दराज पड़ते क्षेत्रों में भी प्राचीन कलाकेंद्र का नाम है। इस संस्थान की शिक्षा पा कर बहुत से कलाकारों ने दो न सिर्फ संगीत के जादू को फैलाया बल्कि खुद की रोज़ी रोटी भी इसी साधना से अर्जित की। इस बार भी दो दिवसीय संगीतमयी संध्या हेमंतोत्सव प्राचीन कला केंद्र द्वारा एक यादगारी कार्यक्रम रहेगा। 

इस गौरवपूर्ण संस्थान प्राचीन कला केंद्र द्वारा आज यहाँ प्राचीन कला केंद्र के 35 स्थित काम्प्लेक्स में  एक प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया गया।इस कांफ्रेंस का प्रयोजन केंद्र द्वारा आयोजित किये जा रहे दो कार्यक्रमों के बारे में  विस्तृत जानकारी देना था।इस  अवसर पर  केंद्र की रजिस्ट्रार एवं कत्थक गुरु डॉ शोभा कौसर,  प्रोजेक्ट प्लानिंग विभाग के निदेशक श्री आशुतोश   महाजन, युवा कलाकार अंकिता गुप्ता , प्रख्यात कलाकार श्री सिद्धार्थ भी उपस्थित थे। इस अवसर पर  केंद्र  के नए सदस्य  और  कौसर परिवार की तीसरी पीढी पार्थ  कौसर भी उपस्थित थे 

प्राचीन कला केंद्र इस वर्ष की विदाई न केवल  दृश्य कला के खूबसूरत नमूने के साथ साथ  संगीतमई संध्या से करना चाहता है  और साथ ही नव वर्ष के आगमन से पहले कला एवं संगीत प्रेमियों को संगीत से सजी शाम की मधुर यादों से सराबोर करना चाहता है।  इसी सुरमई सोच से उपरोक्त दोनों कार्यक्रमों का आयोजन किया जा  रहा है।  

21 से 25  दिसंबर तक शहर की युवा कलाकार अंकिता गुप्ता द्वारा रचित  खूबसूरत कलाकृतियों  की सुन्दर प्रदर्शनी के आयोजन का एलान भी इसी प्रेस कांफ्रेंस में किया गया। 

कला और संस्कृति को समर्पित प्राचीन कला केंद्र संगठन शहर की एक युवा और बहुत ही प्रतिभाशाली कलाकार अंकिता गुप्ता द्वारा नवीन कला कृतियों को प्रदर्शित करते हुए एक अनूठी कला कृतियों का आयोजन करने जा रहा है।

प्रख्यात कलाकार श्री सिद्धार्थ इस प्रदर्शनी में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत करेंगे और 21 दिसंबर को शाम 5:00 बजे  इसका उद्घाटन करेंगे। श्री मदन लाल, मानद सचिव, पंजाब ललित कला अकादमी भी इस अवसर पर शिरकत करेंगे। यह प्रदर्शनी 22 से 25 दिसंबर तक रोजाना सुबह 10:00 बजे से रात 8:00 बजे तक देखी जा सकेगी। प्रदर्शनी केंद्र के 35 सेक्टर परिसर में पीकेके आर्ट गैलरी में आयोजित की जाएगी।

अंकिता गुप्ता श्री राज कुमार, एस. सिद्धार्थ और उनके पिता आर.के. गुप्ता जो स्वयं शहर के जाने माने कलाकार हैं, जैसे कलाकारों के संरक्षण में पली-बढ़ी। । एक कलाकार के घर जन्मी और खुद रचनात्मकता में निपुण अंकिता गुप्ता सिक्किम मणिपाल विश्वविद्यालय से विज़ुअलाइज़ेशन में स्नातकोत्तर हैं। उन्होंने  सृष्टि आर्ट कॉलेज से विज़ुअलाइज़ेशन में पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरा किया।

मास्टरपीस बनाने के लिए अपने पिता के साथ साझेदारी करने से पहले, उन्होंने 7 साल तक डिजिटल चित्रकार  के रूप में काम किया। अपने पिता की कार्यशाला के आस-पास पड़ी खूबसूरत कला के साथ  और नई चीजें सीखने की उनकी बच्चों जैसी जिज्ञासा ने उन्हें गोंड, वारली, आदिवासी और अफ्रीकी जनजातीय कला जैसे विभिन्न कला रूपों की समझने का अवसर दिया ।उनके विचार में “कला का कोई उद्देश्य नहीं होता। यह बस प्रवाहित होती रहती है और फिर भी पीढ़ियों को प्रेरित करने के लिए जीवंत रूप में उपस्थित रहती है । इसकी सुंदरता इसकी अनिश्चितता में है।"

आध्या का जन्म अनिश्चितताओं से हुआ था।आध्या का लक्ष्य विलुप्त कला रूपों के लिए कला प्रेमियों को उत्साहित करना  को फिर से प्रज्वलित करना और दुनिया के सभी कोनों में उनकी विशिष्टता को जीवित रखना है।

अंकिता जैसे शिक्षार्थी के लिए सांस्कृतिक कलात्मकता की विभिन्न बारीकियों पर काम करना  स्वाभाविक है, जो आध्या द्वारा बनाये गए कला के खूबसूरत रचनाओं  को काफी अद्वितीय और विशिष्ट बनाता है।

 दो दिवसीय संगीतमयी संध्या हेमंतोत्सव

प्राचीन कला केंद्र  27  एवं 28 दिसंबर को संगीत , सुर और ताल से सजे हेमंतोत्सव का आयोजन करने जा रहा है।  जाते हुए वर्ष की विदाई और आने वाले वर्ष का स्वागत  करने हेतु इस दो दिवसीय संगीत संध्या का आयोजन किया जा रहा है।  इस कार्यक्रम में जानी मानी शास्त्रीय गायिका सान्या पाटनकर एवं प्रसिद्ध शास्त्रीय गायक एवं संगीत रचयता डॉ  गन्धर्व वर्मा अपनी  मधुर प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन करेंगे।  इस कार्यक्रम का आयोजन केंद्र के ऍम एल कौसर सभागार में सायं 6 बजे से किया जायेगा।

Monday, November 29, 2021

अरुण भाटिया के पहले ट्रैक 'प्यार होया' का लोकार्पण

  मोहाली प्रेस क्लब में जारी किया उत्साह और उम्मीदों के साथ 

अरुण भाटिया द्वारा: गायक अरुण भाटिया और बलदेव काकड़ी ट्रैक के बारे में जानकारी देते हुए

मोहाली
: 29 नवंबर 2021: (गुरजीत बिल्ला//संगीत स्क्रीन):: 
गीत संगीत और साहित्य के क्षेत्रों में एक बार फिर से तेज़ी आ गई है। नए नए गीत आ रहे हैं। नए नए मुद्दों पर नए नए नाटक भी लिखे जा रहे हैं। बहुत से नए चेहरे सामने आ रहे हैं। नयी खबर है मोहाली प्रेस क्लब से जहाँ एक नया गीत रिलीज़ हुआ। 

पंजाब और पंजाबी संस्कृति के अनमोल मोतियों की श्रृंखला में एक और नया मनका जोड़ते हुए, प्रख्यात संगीतकार और गायक अरुण भाटिया के संगीत नाटक बलदेव काकड़ी का पहला ट्रैक 'प्यार होया' मोहाली प्रेस क्लब में जारी किया गया।  इस अवसर पर पत्रकारों से बात करते हुए  काकडी ने कहा कि अरुण भाटिया संगीत की बारीकियों से रहित अपने शौक और समर्पण के साथ उनसे मिले थे।  उन्होंने समर्पण और कड़ी मेहनत के साथ संगीत का अध्ययन किया।  आज उन्होंने दर्शकों की गोद में अपना पहला ट्रैक 'प्यार होया' रिलीज किया है।  

गाने के बोल हैरी ने लिखे हैं और संगीत काकड़ी के छात्र यादि  ने तैयार किया है। मनाली की खूबसूरत घाटियों में मनजिंदर बुटर ने इस वीडियो को कैमरे में कैद किया।  

यहां पत्रकारों से बात करते हुए गायक अरुण भाटिया ने कहा कि वह कॉलेज में बी.टेक कर रहे हैं।  हालाँकि संगीत के मामले में उनकी पृष्ठभूमि काफी खाली है, लेकिन उन्हें संगीत का शौक था।  उनके एक दोस्त, बलदेव काकडी, एक गायक और संगीतज्ञ, जिन्होंने मेरे शौक और कड़ी मेहनत को देखकर मुझे संगीत सिखाया।  उनकी कड़ी मेहनत की बदौलत आज मैं पंजाबी संस्कृति की समृद्ध विरासत में अपना पहला ट्रैक जोड़ रहा हूं।  उन्हें उम्मीद है कि श्रोता उनके प्यार को स्वीकार करेंगे और उन्हें प्यार देंगे। उन्होंने कहा-मैं श्रोताओं को विश्वास दिलाता हूं कि मैं पंजाबी संस्कृति में ढिलाई से दूर रहूंगा। गीत संगीत और कला का यही माहौल विकसित होता रहे। 

Saturday, November 13, 2021

प्राचीन कला केंद्र और गुरमत संगीत सोसाइटी चंडीगढ़ का विशेष प्रयास

 Saturday 13th November 2021 at 7:05 PM

10वीं अखिल भारतीय शब्द गायन प्रतियोगिता का सफलआयोजन


चंडीगढ़: 13 नवंबर 2021: (गुरजीत बिल्ला//संगीत स्क्रीन)::

प्राचीन कला केंद्र और गुरमत संगीत सोसाइटी चंडीगढ़ ने केंद्र की 7वीं गुरमत संगीत बैठक के रूप में रागमाई कीर्तन दरबार का आयोजन किया और 10वीं अखिल भारतीय शबद गायन प्रतियोगिता का सफलतापूर्वक आयोजन किया।

प्राचीन कला केंद्र की ओर से आज प्राचीन कला केंद्र के 7वें गुरमत बैठक में गुरु तेग बहादुर गुरुद्वारा सेक्टर 34 में रचमाई कीर्तन दरबार का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का संचालन गुरमत संगीत विभाग, पुराण कला केंद्र के प्रमुख मलकीत सिंह जंडियाला ने किया। इस अवसर पर श्री सजल कौसर, सचिव, केंद्र, गुरमत संगीत विभाग और श्री आशुतोष महाजन, मानद निदेशक, परियोजना, योजना एवं विकास, प्राचीन कला केंद्र उपस्थित थे। श्री सजल कौसर, सचिव, प्राचीन कला केंद्र ने इस अवसर पर घोषणा की कि गुरमत संगीत में रुचि रखने वाले सभी छात्रों को मुफ्त गुरमत संगीत शिक्षा प्रदान की जाएगी।

कार्यक्रम की शुरुआत रोपड़ की कीर्तनकार कमलजीत कौर ने की, जिसमें उन्होंने राग कल्याण में 'प्रभ मेरा अंतरजामी जान' शब्दों का प्रदर्शन किया। तत्पश्चात उन्होंने राग धनश्री में शब्दों को प्रस्तुत कर संगत का मनोरंजन किया। तब भाई राजवीर सिंह ने सुंदर शब्द 'शोभा मेरे ललन की' पेश किए।

इसके बाद होशियारपुर के सतविंदर सिंह ने राग सोरठ से 'रे मन राम सियों कर प्रीत' वाक्यांश का पाठ किया और राग कन्हारा में सुंदर शब्दों का प्रदर्शन भी किया। बाद में, भाई भगत सिंह, जो कीर्तन करने के लिए अमृतसर से आए थे, ने राग कन्हारा में "मेरा मन साध जान मिल हरिया" के साथ प्राचीन संस्कारों से गुरमत संगीत के बोलों का पाठ किया। इसके बाद पटियाला के डॉ. गुरनाम सिंह ने पुराना जत्था गाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया

इसके बाद दिल्ली के अमृतपाल सिंह जी ने राग श्री में 'रंग रात मेरा साहिब' शब्द का परिचय दिया। फिर उन्होंने राग नट नारायण में शब्द की शुरुआत की और कई प्राचीन गुरमत बंधों की शुरुआत की। बाद में श्री मलकीत सिंह जंडियाला जी ने राग श्री और केदार में कुछ प्राचीन गुरमत गीत प्रस्तुत कर संगत का मनोरंजन किया।

कार्यक्रम के अंत में जालंधर के प्रसिद्ध कीर्तनकार भाई दविंदर सिंह बोदल ने राग गौरी पूर्वी में 'काम क्रोध नगर भो भारिया' और प्राचीन परंपरा में 'पीर देखना दा आस' का पाठ कर संगत का मनोरंजन किया। कार्यक्रम के अंत में कलाकारों को सम्मानित किया गया।

दूसरे दिन 10वीं अखिल भारतीय शबद गायन का आयोजन किया गया, जिसमें परमदीप सिंह, होशियारपुर, अमनजोत सिंह राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, सेक्टर 38, चंडीगढ़ दूसरे और वैभव शर्मा, शिवालिक पब्लिक स्कूल, मोहाली तीसरे स्थान पर रहे।

इसके अलावा हरमन कौर और हरशरण सिंह, जिला उधमपुर, जम्मू-कश्मीर, एवलिन कौर सिद्धू, टेंडर हार्ट स्कूल, चंडीगढ़, जफमीत सिंह, जीरकपुर को सांत्वना पुरस्कार दिए गए।

सीनियर सिंगल्स में अमृतपाल कौर, खालसा कॉलेज, अमृतसर ने पहला, सागर, गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर 38 वेस्ट दूसरे , और अमृतपाल सिंह गुरु गोबिंद सिंह खालसा कॉलेज, सेक्टर 26, चंडीगढ़ ने तीसरा स्थान हासिल किया। इसके अलावा रमनदीप सिंह, गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-35, चंडीगढ़ और जेवी सिंह, चंडीगढ़ को सांत्वना पुरस्कार दिए गए।

जूनियर ग्रुप प्रतियोगिता में गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर 38 (वेस्ट) ने पहला, गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर 16 (वेस्ट) ने दूसरा और सीनियर सेकेंडरी स्कूल सेक्टर 23 को सांत्वना पुरस्कार दिया। सीनियर ग्रुप प्रतियोगिता में खालसा कॉलेज अमृतसर ने पहला, टीपीडी मालवा कॉलेज बठिंडा ने दूसरा और अंजलि, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ ने तीसरा स्थान हासिल किया।

इसके अलावा विदेश से भाग लेने वाले बच्चों को कुछ विशेष पुरस्कार भी दिए गए, जिनमें फ्लोरिडा यूएसए की गुरलीन सभरवाल, डबलिन की एकनूर कौर और फ्लोरिडा की जान्हवी सुब्रमण्यम शामिल हैं।

उत्कृष्ट श्रेणी में परमदेव, होशियारपुर को स्वर्ण पदक, हरमन कौर हर्षरन सिंह, जम्मू-कश्मीर को रजत और अमृतपाल कौर, अमृतसर को रजत से सम्मानित किया गया।

सहायक प्रो. वनिता, पंजाबी विश्वविद्यालय, श्रीमती त्रिपत कौर, चंडीगढ़ और मोहाली की डॉ. सोनिया शर्मा ने निर्णायक के रूप में भाग लिया।

Thursday, November 11, 2021

मुख्यमंत्री ने देवभूमि हिमाचल को समर्पित गीत जारी किया

11th November 11, 2021 at 6:48 PM

बहुत से रंग हैं इस गीत में हिमाचल की दिव्य छटा के 


शिमला
:11 नवम्बर, 2021: (देवभूमि स्क्रीन//संगीत स्क्रीन)::

हिमचल प्रदेश में घूमने जाओ तो वहां के दिव्य नज़ारे आपको प्रकृति से भी जोड़ते हैं और आध्यात्मिक दुनिया से भी। इन्हीं अनुभूतियों के दौरान आपको दिव्यता का अहसास भी होने लगता है। इस अहसास को आप बिना कहीं घूमे इस गीत को सुनकर भी महसूस कर सकते हैं। इस गीत की वीडियो में भी ऐसी बहुत सी अनुभूतियों का अहसास आपको होगा और इसके शब्दों और संगीत में भी। 

मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां देवभूमि हिमाचल प्रदेश को समर्पित गीत दिव्यधारा- जर्नी टू दि डिवाइन लेंड जारी किया। इस गीत को मण्डी जिला के इन्द्रजीत ने संगीतबद्ध व तैयार किया है।

मुख्यमंत्री ने गायक के प्रयासों की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

Wednesday, October 13, 2021

प्रेसक्लब मोहाली में प्रीत थिंद के गीत की प्री-लांचिंग मीडिया रिलीज़

इस आवाज़ में हैं कई खूबियां लेकिन सामने आएंगी 14 को 

मोहाली: 13 अक्टूबर 2021 (कार्तिका सिंह//संगीत स्क्रीन)::

प्रीत थिंद पंजाबी की जानीमानी गायका है।बेहद ही तेज़ी से लोकप्रिय भी हो रही है और सचमुच बहुत ही अच्छा गाती है। 
सुर पर भी पकड़ है और सांस की क्षमता भी बहुत अच्छी है। बहुत ही दमदार आवाज़ जिसमें काफी बुलंदी है। साथ ही मनोभावों को चेहरे पर लाने में अदाकारी का कमाल भी जानती है। उसके कई गीत हिट हो चुके हैं। पंजाबी के साथ साथ हिंदी गायन में भी कमांड है। हल्के फुल्के गीतों से लेकर गंभीर स्वर के गीत गाने में भी कमाल है उसके पास। अब नई एल्बम आ रही है-ENOUGH-नाम ही अंग्रेज़ी है गीत पंजाबी के ही होंगें। इस नए गीत का औपचारिक विमोचन तो होगा 15 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर लेकिन मीडिया विमोचन 14 अक्टूबर 2021 को सुबह 11:30 बजे मोहाली प्रेस क्लब में। यह प्रेस क्लब फेस-4, मोहाली में है। 

इस गीत में आवाज़ें हैं -प्रीत थिंद और गैवी चाहल की। संगीत है लाडी गिल्ल का। फिल्म है-प्रमोद शर्मा राणा की। गीत लिखा है गुर सेखों ने और निर्माता हैं संदीप भट्टी//राज//प्रिंस संधु। बाकी फैसला श्रोताओं और दर्शकों के हाथ में। वही बताएंगे किस ने कितना बढ़िया काम किया।

कल की इस इस मीडिया मीट में चर्चा होगी प्रीत थिंद के संघर्ष की, गायन में छुपी खूबियों की, ज़िंदगी के संघर्ष की, रास्त में आई मुश्किलों के सामने की और इस क्षेत्र में मिली उपलब्धियों की भी। उसके गीले शिकवे भी सुने जाएंगे और गीत भी। इस गीत की पूरी टीम भी इस मौके पर रहेगी ही। इसके साथ ही इससे पहले हिट हो चुके गीतों की भी चर्चा और निकट भविष्य में आने वाले गीतों की संभावनाएं।